CG Top 10 News Today: छत्तीसगढ़ की 10 बड़ी खबरें नवा रायपुर में 54 करोड़ का इंटरनेशनल बोर्डिंग स्कूल नवंबर तक होगा तैयार, दुर्ग यूनिवर्सिटी के कुलसचिव महिला कर्मचारी वेतन गबन मामले में गिरफ्तार, बरबसपुर शराब दुकान को लेकर बवाल, भिलाई में 4.50 करोड़ संपत्ति फर्जीवाड़ा, पैरी लिंक नहर टेंडर पर हाईकोर्ट सख्त, गैस कनेक्शन के नाम पर साइबर फ्रॉड अलर्ट, राष्ट्रमंडल रजत विजेता ज्ञानेश्वरी यादव बनेंगी DSP, मदननगर पंचायत में 20 पंचों का सामूहिक इस्तीफा, बिजली बिल बढ़ोतरी पर कांग्रेस का हमला और महासमुंद बाल सुधार गृह से 8 बाल अपचारी फरार समेत पढ़ें छत्तीसगढ़ की बड़ी खबरें…

CG Top 10 News Today: छत्तीसगढ़ की सभी बड़ी और छोटी खबरें रोजाना हमारी नजर में रहती हैं। दक्षिण कोसल के विशेष सेगमेंट ‘CG की 10 बड़ी खबरें’ में हम आपको समाचार जगत की हर गतिविधि का अपडेट सरल और सहज भाषा में प्रदान करेंगे। तो आइए, पत्रकारिता की इस दुनिया में बने रहें और छत्तीसगढ़ की हर ताजातरीन खबर से अपनी जानकारी को और विस्तृत करे
नवा रायपुर में 54 करोड़ की लागत से बन रहा इंटरनेशनल बोर्डिंग स्कूल, नवंबर तक होगा तैयार
Education News: नवा रायपुर के सेक्टर-32 में लगभग 54 करोड़ रुपए की लागत से तैयार हो रहे पहले सरकारी इंटरनेशनल बोर्डिंग स्कूल का निर्माण कार्य अब अपने अंतिम चरण में पहुंच चुका है। राज्य सरकार के इस महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट का निर्माण कार्य सितंबर 2022 में शुरू हुआ था, जिसे अब नवंबर 2026 तक पूरी तरह से तैयार किए जाने की उम्मीद जताई जा रही है। लगभग 20 एकड़ जमीन पर फैला यह परिसर छत्तीसगढ़ का अपनी तरह का पहला ऐसा आवासीय विद्यालय होगा, जहां कक्षा 6वीं से 12वीं तक के लगभग 700 विद्यार्थियों के लिए विश्वस्तरीय शिक्षा और आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी। इस कैंपस में आधुनिक अकादमिक भवन, उन्नत प्रयोगशालाएं, प्रशासनिक ब्लॉक, 328 छात्रों के लिए छात्रावास, विशाल डाइनिंग हॉल, इनडोर स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स, स्विमिंग पूल, हॉर्स राइडिंग सुविधा और भव्य खेल मैदान का निर्माण किया जा रहा है। परियोजना के शुरुआती चरणों में कई वित्तीय अड़चनों और प्रशासनिक देरी के कारण काम प्रभावित हुआ था, लेकिन वर्तमान में लगभग 70 प्रतिशत निर्माण कार्य पूरा हो चुका है जिस पर करीब 35.89 करोड़ रुपए खर्च किए जा चुके हैं। स्कूल का बुनियादी ढांचा तैयार होने के बाद अब सबसे बड़ी चुनौती इसके सुचारू संचालन को लेकर है, जिसके तहत शिक्षा बोर्ड का चयन, योग्य शिक्षकों की नियुक्ति और प्रवेश प्रक्रिया के नियम जल्द तय किए जाने बाकी हैं। सरकार की योजना इस मॉडल स्कूल में राज्य के साथ-साथ अन्य राज्यों और विदेशी छात्रों को भी प्रवेश देने की है, ताकि बच्चों को एक ही परिसर में उच्च कोटि की शिक्षा और सर्वांगीण विकास का अवसर मिल सके।
दुर्ग यूनिवर्सिटी के कुलसचिव भूपेंद्र कुलदीप गिरफ्तार, महिला कर्मचारी के वेतन गबन का सनसनीखेज मामला
Crime Update: हेमचंद यादव विश्वविद्यालय दुर्ग के कुलसचिव भूपेंद्र कुलदीप को एक दैनिक वेतन भोगी महिला कर्मचारी के वेतन से जुड़े वित्तीय गबन के आरोप में पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। यह पूरा मामला उस समय प्रकाश में आया जब विश्वविद्यालय प्रशासन को महिला कर्मचारी के बैंक खाते और वेतन भुगतान में भारी अनियमित्ताओं की शिकायत प्राप्त हुई, जिसके बाद मोहन नगर थाने में एफआईआर दर्ज कर विस्तृत जांच शुरू की गई। प्रारंभिक पुलिस जांच में यह चौंकाने वाला तथ्य सामने आया कि आरोपी कुलसचिव अपने घर पर उक्त महिला से घरेलू कार्य और खाना बनवाते थे, जबकि महिला को विश्वविद्यालय से हर महीने 15,515 रुपए का नियमित वेतन मिलता था। आरोप है कि कुलसचिव महिला के खाते में आने वाली पूरी राशि में से मात्र 2,200 रुपए उसे थमा देते थे और शेष बची हुई भारी-भरकम राशि पेटीएम के माध्यम से अपने खुद के बेटे के बैंक खाते में ट्रांसफर करवा लेते थे। इस तरह कुलसचिव ने लंबे समय तक इस अवैध खेल को जारी रखते हुए कुल 1 लाख 49 हजार 384 रुपए का गबन किया, जिससे डरी-सहमी महिला विरोध करने की हिम्मत नहीं जुटा पा रही थी। पुलिस ने सारे वित्तीय दस्तावेजों, बैंक रिकॉर्ड्स और पेटीएम ट्रांजैक्शन के पुख्ता सबूत जुटाने के बाद कुलसचिव को गिरफ्तार कर माननीय न्यायालय में पेश किया, जहां से उन्हें न्यायिक रिमांड पर सीधे जेल भेज दिया गया है। उच्च शिक्षा विभाग ने इस घटना को बेहद गंभीरता से लिया है और स्पष्ट किया है कि जांच रिपोर्ट के आधार पर आरोपी अधिकारी से गबन की गई पूरी राशि की शत-प्रतिशत वसूली की जाएगी तथा विभागीय स्तर पर भी कठोर अनुशासनात्मक कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।
भिलाई में 4.50 करोड़ के संपत्ति सौदे में बड़ा फर्जीवाड़ा, पार्षद रीता सिंह और उनके परिजनों पर FIR दर्ज
Legal News: भिलाई नगर निगम की पार्षद रीता सिंह, उनके पति रमेशचंद सिंह राजपूत और पुत्र मानवचंद सिंह के खिलाफ उतई थाना पुलिस ने न्यायालय के सख्त आदेश पर धोखाधड़ी और कूटसाक्ष्य रचने की गंभीर धाराओं में आपराधिक प्रकरण दर्ज किया है। यह कानूनी कार्रवाई परिवादी बीबी सिंह द्वारा दायर की गई निजी शिकायत पर न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी (JMFC) पाटन की अदालत के निर्देशानुसार सुनिश्चित की गई है। विवाद का यह पूरा मामला लगभग 4.50 करोड़ रुपए के भारी-भरकम लेनदेन से जुड़ा है, जिसमें जनवरी 2024 के दौरान पार्षद रीता सिंह की जमीन, खदान से जुड़ी संपत्ति, एक टाटा हिटाची मशीन और भारत बेंज टिपर वाहनों की खरीद-बिक्री के लिए विधिवत इकरारनामा निष्पादित किया गया था। शिकायतकर्ता बीबी सिंह का आरोप है कि उन्होंने इस बड़े सौदे के एवज में तयशुदा राशि में से लगभग 4.39 करोड़ रुपए का भारी भुगतान भी कर दिया था, लेकिन इसके बावजूद उनके साथ सुनियोजित तरीके से धोखाधड़ी की गई। पीड़ित पक्ष का कहना है कि सौदे के वक्त यह महत्वपूर्ण जानकारी छिपाई गई कि जिन जमीनों को बिक्री के लिए दिखाया जा रहा है, उनमें से कई संपत्तियां या तो पहले ही अन्य व्यक्तियों के नाम दर्ज हैं अथवा उन पर कानूनी बिक्री प्रतिबंध लागू है, और कुछ संपत्तियां बैंकों में भारी कर्ज के एवज में बंधक रखी हुई हैं। खनन पट्टा, बैंक एनओसी और अन्य अनिवार्य दस्तावेज लंबे समय तक टालमटोल के बाद भी उपलब्ध नहीं कराए जाने पर जब फरवरी 2026 में स्थानीय पुलिस और एसपी कार्यालय में कोई संतोषजनक कार्रवाई नहीं हुई, तब परिवादी ने अदालत का दरवाजा खटखटाया। फिलहाल उतई पुलिस ने न्यायालय के निर्देश पर एफआईआर दर्ज कर ली है और सभी संबंधित दस्तावेजों तथा वित्तीय लेन-देन के रिकॉर्ड की गहन छानबीन शुरू कर दी है, ताकि सच्चाई सामने आ सके।
गरियाबंद पैरी लिंक नहर परियोजना के टेंडर पर उठे गंभीर सवाल, हाईकोर्ट ने राज्य सरकार से मांगा जवाब
Government: छत्तीसगढ़ के गरियाबंद जिले की दो हजार 549 करोड़ 86 लाख रुपए की अत्यधिक लागत वाली महत्वपूर्ण पैरी लिंक नहर परियोजना के टेंडर आवंटन को लेकर राजनीति और प्रशासनिक गलियारों में भूचाल आ गया है। जल संसाधन विभाग के अंतर्गत सिकासार जलाशय गरियाबंद से कोडर जलाशय महासमुंद तक पाइपलाइन निर्माण के इस वृहद प्रोजेक्ट का टेंडर 27 जुलाई 2026 को रात ठीक 10 बजकर 16 मिनट पर खोले जाने और चहेती कंपनी दिलीप बिल्डकॉन को विजेता घोषित किए जाने की प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़े हुए हैं। इस मामले में याचिका दायर कर आरोप लगाया गया है कि मुख्यमंत्री को गुमराह करते हुए नियमों को ताक पर रखकर इस कंपनी को टेंडर दिया गया है, जबकि यह कंपनी निर्धारित पात्रता शर्तों को पूरा ही नहीं करती थी। टेंडर की मूल शर्तों के अनुसार इस कार्य के लिए किसी भी प्रकार के जॉइंट वेंचर की अनुमति नहीं थी और बोली लगाने वाली कंपनी को प्राइम कॉन्ट्रैक्टर के रूप में व्यक्तिगत अनुभव होना अनिवार्य था, परंतु दिलीप बिल्डकॉन ने पात्रता साबित करने के लिए गांधी सागर 2 मल्टी विलेज स्कीम का जो अनुभव प्रमाण पत्र प्रस्तुत किया, वह उन्होंने अकेले नहीं बल्कि एक संयुक्त उपक्रम (DBL-SIPL JV) के रूप में पूरा किया था। इसके अलावा वित्तीय पात्रता के मामले में भी यह आरोप है कि प्रोजेक्ट लागत का 50 प्रतिशत यानी 1274.93 करोड़ के अनुभव की शर्त के मुकाबले कंपनी का व्यक्तिगत हिस्सा मात्र 846 करोड़ रुपए ही बैठता है, जो निर्धारित मानक से 428 करोड़ रुपए कम है। रात के अंधेरे में असामान्य समय पर वित्तीय बिड खोलने और नियमों की अनदेखी कर चहेती कंपनी को अनुचित लाभ पहुँचाने के इस गंभीर प्रकरण को लेकर अब छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने कड़ा रुख अपनाते हुए राज्य शासन को नोटिस जारी कर विस्तृत जवाब तलब किया है तथा टेंडर प्रक्रिया की पारदर्शिता पर बड़ा प्रश्नचिह्न लगा दिया है।
नए घरेलू गैस कनेक्शन के नाम पर फैला साइबर फ्रॉड का जाल, रायपुर में ठगी के कई मामले आए सामने
Consumer Alert: देश और प्रदेश में नए घरेलू गैस कनेक्शनों के आवंटन पर लगी प्रशासनिक रोक का फायदा उठाकर शातिर साइबर ठगों ने आम जनता को ठगने का नया नायाब तरीका ढूंढ निकाला है, जिससे रायपुर शहर समेत पूरे छत्तीसगढ़ में हड़कंप मच गया है। ठग गिरोह एसएमएस, व्हाट्सएप और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स के माध्यम से लोगों को यह लुभावना फर्जी संदेश भेज रहे हैं कि नए गैस कनेक्शन फिर से सुचारू रूप से शुरू हो गए हैं और उज्ज्वला योजना का लाभ आसानी से मिल सकता है। इसके बाद वे सरकारी वेबसाइट MyLPG.in से मिलती-जुलती कई फर्जी और मिलती-जुलती लिंक प्रेषित कर ऑनलाइन आवेदन पत्र भरवाते हैं और रजिस्ट्रेशन, दस्तावेज अपलोड करने, आधार सत्यापन तथा प्रोसेसिंग फीस के नाम पर पहले 50 से 100 रुपए की छोटी रकम ऑनलाइन ट्रांसफर करवाते हैं। इस संबंध में डीडी नगर निवासी कंचन दुबे और सुभाष नगर निवासी ज्योति नाग के पुत्र के साथ हुई ठगी की कोशिशों के ताजा उदाहरण सामने आए हैं, जहां समय रहते सतर्कता बरतने के कारण पीड़ित बड़ी आर्थिक क्षति से बाल-बाल बच गए। गैस एजेंसियों और पेट्रोलियम कंपनियों (एचपीसीएल, बीपीसीएल, इंडेन) के पास इस तरह की लगातार शिकायतों के पहुँचने के बाद उन्होंने पंपलेट और स्थानीय समाचार पत्रों के जरिए आम नागरिकों के लिए चेतावनी भरी एडवाइजरी जारी की है। इसी क्रम में जिला खाद्य नियंत्रक भूपेंद्र मिश्रा के नेतृत्व में खाद्य विभाग की टीम ने शहर के 10 से अधिक प्रमुख गैस गोदामों का औचक निरीक्षण कर सिलेंडर स्टॉक, पारदर्शी डिलीवरी व्यवस्था और एक्सपायरी डेट की बारीकी से जांच की। अधिकारियों ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि उपभोक्ता किसी भी संदेहास्पद या अज्ञात लिंक पर क्लिक करके ऑनलाइन भुगतान न करें और केवल अधिकृत एजेंसी या आधिकारिक मोबाइल ऐप का ही उपयोग करें, तथा ठगी होने पर तुरंत राष्ट्रीय साइबर क्राइम हेल्पलाइन नंबर 1930 पर अपनी शिकायत दर्ज कराएं।
ग्लासगो राष्ट्रमंडल खेल की रजत पदक विजेता ज्ञानेश्वरी यादव बनेंगी डीएसपी, सीएम साय ने की 30 लाख सम्मान राशि की घोषणा
Sports News: स्कॉटलैंड के ग्लासगो में आयोजित राष्ट्रमंडल खेल 2026 में महिलाओं की 53 किलोग्राम भारोत्तोलन (वेटलिफ्टिंग) स्पर्धा में देश और छत्तीसगढ़ के लिए ऐतिहासिक रजत पदक हासिल करने वाली राजनांदगांव की प्रतिभावान बेटी ज्ञानेश्वरी यादव पर राज्य सरकार ने पूरी उदारता के साथ सौगातों की बौछार कर दी है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने सोमवार को राजधानी रायपुर स्थित अपने आधिकारिक निवास पर इस होनहार खिलाड़ी का भव्य स्वागत और अभिनंदन करते हुए उन्हें छत्तीसगढ़ पुलिस में सीधे ‘आउट ऑफ टर्न’ डीएसपी (उप पुलिस अधीक्षक) के पद पर पदोन्नत करने तथा 30 लाख रुपए की भारी-प्रोत्साहन राशि प्रदान करने की आधिकारिक घोषणा की। मुख्यमंत्री ने इस गौरवशाली उपलब्धि की सराहना करते हुए कहा कि ज्ञानेश्वरी ने अपने पहले ही राष्ट्रमंडल खेलों में कुल 199 किलोग्राम वजन उठाकर जो शानदार प्रदर्शन किया है, उसने छत्तीसगढ़ के खेल इतिहास में एक स्वर्णिम अध्याय जोड़ दिया है। बेहद साधारण परिवार से ताल्लुक रखने वाली और तमाम सीमित संसाधनों तथा कठिन परिस्थितियों से जूझते हुए मुकाम हासिल करने वाली ज्ञानेश्वरी आज प्रदेश के लाखों युवाओं और विशेषकर बेटियों के लिए एक प्रेरणास्त्रोत बन चुकी हैं। मुख्यमंत्री ने बताया कि प्रतियोगिता में भाग लेने रवाना होने से पहले भी उनकी ज्ञानेश्वरी से आत्मीय भेंट हुई थी और पदक जीतने के बाद उन्होंने वीडियो कॉल के जरिए उन्हें बधाई दी थी। राज्य सरकार की इस खेल-अनुकूल पहल से यह स्पष्ट हो गया है कि प्रदेश की खेल नीति का मुख्य उद्देश्य उभरती हुई प्रतिभाओं को समय पर पहचानना, उन्हें बेहतर अवसर उपलब्ध कराना और उनकी अनथक मेहनत का उचित सम्मान करना है, जिससे आने वाले समय में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर छत्तीसगढ़ का नाम और अधिक रोशन हो सके।
सूरजपुर के मदननगर पंचायत में बड़ा राजनीतिक भूचाल, बर्खास्त सरपंच के समर्थन में 20 पंचों का सामूहिक इस्तीफा
Politics: सूरजपुर जिले के प्रतापपुर विकासखंड अंतर्गत मदननगर ग्राम पंचायत में सोमवार को एक अभूतपूर्व राजनीतिक घटनाक्रम देखने को मिला, जब भ्रष्ट व मनमाने प्रशासनिक आदेश के खिलाफ यहाँ के सभी 20 निर्वाचित पंचों ने सामूहिक रूप से अपने पदों से त्यागपत्र सौंप दिया। यह पूरा विरोध प्रदर्शन बर्खास्त की गई महिला सरपंच सुंदरी बाई के समर्थन में किया गया है, जिन पर एसईसीएल भटगांव ओपनकास्ट कोयला परियोजना के लिए हो रहे भूमि अधिग्रहण और डीजीपीएस सर्वेक्षण का पुरजोर विरोध करने का आरोप था। पंचों ने अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) एवं विहित प्राधिकारी प्रतापपुर को सौंपे गए अपने आधिकारिक इस्तीफा पत्र में कड़े शब्दों में आरोप लगाया है कि सरपंच सुंदरी बाई को छत्तीसगढ़ पंचायत राज अधिनियम 1993 की धारा 40(1)(ख) के प्रावधानों का दुरुपयोग करते हुए पूरी तरह विधि-विरुद्ध तरीके से उनके पद से हटाया गया है। उनका कहना था कि सरपंच क्षेत्र के आदिवासी किसानों के अधिकारों की रक्षा करने, प्रस्तावित भूमि अधिग्रहण के दौरान पांचवीं अनुसूची के प्रावधानों और पेसा कानून के तहत ग्रामसभा की अनिवार्य सहमति व भूमिका को लागू करने की न्यायसंगत मांग उठा रही थीं, जिसकी उन्हें यह राजनीतिक सजा मिली है। प्रशासन का तर्क था कि 2 और 3 अप्रैल 2026 को सर्वेक्षण के दौरान सरपंच के नेतृत्व में ग्रामीणों ने शासकीय कार्य में बाधा पहुंचाई थी, जिसके आधार पर 8 जुलाई 2026 को उन्हें पद से पृथक करने का आदेश जारी किया गया था, जबकि सरपंच का स्पष्ट पक्ष था कि ग्रामसभा को पूर्व सूचना दिए बिना सर्वे किया जा रहा था। इस दमनकारी प्रशासनिक कार्रवाई के विरोध में सुनीता बेक, अमृता केसरी, रामविनोद खाखा, छोटेलाल कुजूर समेत सभी 20 पंचों ने अपनी स्वेच्छा से सामूहिक इस्तीफा देकर प्रशासन के समक्ष कड़ा संदेश दिया है कि वे आदिम संस्कृति और पेसा कानूनों के हनन को किसी भी कीमत पर सहन नहीं करेंगे।
छत्तीसगढ़ में 8 महीने में 4 गुना बढ़ा बिजली बिल, कांग्रेस ने सरकार के दावों को बताया जनता के जख्मों पर नमक
Electricity Bill Hike: छत्तीसगढ़ में बिजली के बढ़ते दामों और आम उपभोक्ताओं को आ रहे भारी-भरकम बिलों को लेकर राजनीतिक सरगर्मी अपने चरम पर पहुंच गई है, जहाँ प्रदेश कांग्रेस संचार विभाग के अध्यक्ष सुशील आनंद शुक्ला ने विद्युत कंपनी और भाजपा सरकार के तमाम दावों को पूरी तरह खारिज करते हुए इसे जनता के साथ खुला छल करार दिया है। कांग्रेस पार्टी का आरोप है कि राज्य में भाजपा सरकार के गठन के बाद बीते मात्र ढाई वर्षों के छोटे से कार्यकाल में बिजली की दरों में कुल मिलाकर पांच बार ताबड़तोड़ बढ़ोतरी की जा चुकी है और पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार की सबसे लोकप्रिय ‘400 यूनिट तक बिजली बिल हाफ योजना’ को पूरी तरह बंद कर दिया गया है। कांग्रेस नेता ने विद्युत कंपनी के उस प्रशासनिक दावे को सिरे से खारिज किया जिसमें यह कहा जा रहा था कि जून माह की तुलना में जुलाई में बिजली की खपत में 30 प्रतिशत की कमी आई है, और इसके विपरीत वास्तविक धरातल पर सच यह है कि पिछले आठ महीनों से हर आम उपभोक्ता का औसत बिजली बिल बढ़कर चार गुना तक अधिक हो चुका है। बढ़े हुए बिजली बिलों के मुख्य कारणों को रेखांकित करते हुए कांग्रेस ने बताया कि सरकार द्वारा लगातार टैरिफ बढ़ाना, बिल हाफ योजना का बंद होना और प्रदेशभर में तेजी से लगाए जा रहे स्मार्ट मीटर उपभोक्ताओं के लिए सबसे बड़ी मुसीबत बन गए हैं। उनका यह भी गंभीर आरोप है कि नए स्मार्ट मीटर उपभोक्ताओं की वास्तविक और सामान्य खपत से कई गुना अधिक रीडिंग प्रदर्शित कर रहे हैं तथा बिना किसी पूर्व सहमति के चुपचाप ‘कॉन्ट्रैक्ट डिमांड’ बढ़ाकर भारी-भरकम अर्थदंड और पेनल्टी जोड़ी जा रही है, जिसके चलते आज की तारीख में आम आदमी का बिजली बिल उनके घर के मासिक राशन के खर्च से भी ज्यादा भारी साबित हो रहा है। इन गंभीर जनसमस्याओं को आधार बनाते हुए प्रदेश कांग्रेस कमेटी ने राज्य सरकार के समक्ष तत्काल बिजली के बढ़े हुए दाम वापस लेने, पुरानी बिल हाफ योजना फिर से शुरू करने और स्मार्ट मीटर की इस अव्यवस्थित प्रणाली को तुरंत बंद करने की पुरजोर मांग उठाई है।
महासमुंद बाल सुधार गृह से 8 बाल अपचारी फरार, खिड़की की ग्रिल और कटीले तार काटकर भागे
Crime Update: छत्तीसगढ़ के महासमुंद जिले में कानून व्यवस्था और संप्रेक्षण गृहों की सुरक्षा व्यवस्था की पोल उस समय खुल गई जब सोमवार, 3 अगस्त 2026 की तड़के लगभग साढ़े 3 बजे बरोंड़ा बाजार स्थित शासकीय बाल संप्रेक्षण गृह से 8 खतरनाक बाल अपचारी खिड़की की लोहे की मजबूत ग्रिल को तोड़कर और 12 फीट ऊंची सुरक्षा दीवार पर लगे कंटीले तारों को काटकर फरार हो गए। सिटी कोतवाली थाना क्षेत्र के अंतर्गत हुई इस बेहद गंभीर और सनसनीखेज घटना के सामने आते ही जिला प्रशासन, पुलिस विभाग और महिला एवं बाल विकास मंत्रालय में भारी हड़कंप मच गया है। महासमुंद जिला मुख्यालय के समीप संचालित इस बाल सुधार गृह में कुल 27 बाल अपचारियों को रखा गया था, जिनमें से ये 8 शातिर बच्चे बलात्कार (दुष्कर्म), चोरी, आबकारी अधिनियम और एनडीपीएस एक्ट जैसे बेहद गंभीर और संगीन मामलों में लंबे समय से निरुद्ध थे। सोमवार की सुबह जब सुरक्षाकर्मी और ड्यूटी पर तैनात स्टाफ ने कमरों का मुआयना किया तो उन्हें खिड़कियां टूटी हुई मिलीं और छानबीन करने पर पता चला कि इन नाबालिगों ने अत्यंत सुनियोजित और शातिर तरीके से पूरी घटना को अंजाम दिया है। फरार होने वाले इन 8 अपचारियों में से 6 किशोर छत्तीसगढ़ के ही बलौदाबाजार, सरायपाली, महासमुंद, फिंगेश्वर और कुरूद अंचल के रहने वाले हैं, जबकि 2 अन्य नाबालिग पड़ोसी राज्य ओडिशा के कालाहांडी जिले से ताल्लुक रखते हैं और पिछले 4-5 महीनों से यहाँ बंद थे। गौरतलब है कि छत्तीसगढ़ के विभिन्न बाल सुधार गृहों से बच्चों के भागने का यह कोई पहला मामला नहीं है, क्योंकि इससे पहले सरगुजा, बिलासपुर और अन्य जिलों में भी इस तरह की कई वीभत्स घटनाएं सामने आ चुकी हैं, जहाँ चौकीदारों की हत्या या गंभीर मारपीट कर बच्चे फरार हुए हैं। घटना की सूचना मिलते ही पुलिस के वरिष्ठ अधिकारी तुरंत मौके पर पहुंचे, आसपास के सीमावर्ती जिलों में युद्धस्तर पर नाकेबंदी कर दी गई है और फरार नाबालिगों की तलाश के लिए सघन एवं व्यापक सर्च अभियान चलाया जा रहा है।
छत्तीसगढ़ व्यावसायिक शिक्षा की किताबें गायब, कांग्रेस ने भाजपा सरकार पर शिक्षा विरोधी होने का लगाया आरोप
CG Vocational Education Books: छत्तीसगढ़ के सरकारी विद्यालयों में शैक्षणिक सत्र शुरू हुए डेढ़ महीने से अधिक का समय बीत चुका है, लेकिन प्रदेश के लाखों विद्यार्थियों को अब तक व्यावसायिक शिक्षा (वोकेशनल एजुकेशन) से जुड़ी आवश्यक पाठ्यपुस्तकें उपलब्ध नहीं कराई जा सकने के कारण बड़ा राजनीतिक और शैक्षणिक विवाद खड़ा हो गया है। प्रदेश कांग्रेस कमेटी की मुख्य प्रवक्ता वंदना राजपूत ने राज्य की भाजपा सरकार पर करारा प्रहार करते हुए इसे पूरी तरह जनविरोधी और शिक्षा विरोधी मानसिकता करार दिया है। उन्होंने तीखा सवाल उठाते हुए कहा कि प्रदेशभर के लगभग 1244 शासकीय उच्च माध्यमिक विद्यालयों में पिछले 8 से 10 वर्षों से लगातार व्यावसायिक शिक्षा का महत्वपूर्ण पाठ्यक्रम संचालित किया जा रहा है, इसके बावजूद लगभग 15 अलग-अलग ट्रेडों की एक भी मानक पुस्तक आज दिनांक तक स्कूलों के परिसरों तक नहीं पहुँच पाई है। कांग्रेस ने चिंता जताते हुए कहा कि शैक्षणिक सत्र के डेढ़ महीना बीत जाने के ठीक बाद अब स्कूलों में तिमाही परीक्षाएं सिर पर आ चुकी हैं, ऐसे में देश का भविष्य कहे जाने वाले हमारे ये नौनिहाल बिना किसी पाठ्यपुस्तक के अपना पाठ्यक्रम कैसे पूरा करेंगे और कैसे बोर्ड परीक्षाओं की तैयारी करेंगे। वंदना राजपूत ने राज्य परियोजना कार्यालय समग्र शिक्षा की कार्यप्रणाली पर गंभीर अंगुली उठाते हुए आरोप लगाया कि वर्तमान में प्रशासनिक अधिकारियों की सर्वोच्च प्राथमिकता बच्चों का उज्ज्वल भविष्य संवारना नहीं रह गया है, बल्कि केवल और केवल टेंडर प्रक्रियाओं को अंजाम देना और अपने चहेते ठेकेदारों को अनुचित लाभ पहुँचाना मात्र रह गया है। इस गंभीर लापरवाही का कड़ा संज्ञान लेते हुए कांग्रेस पार्टी ने राज्य सरकार से यह पुरजोर मांग की है कि बिना किसी और विलंब के प्रदेश के सभी विद्यालयों में व्यावसायिक शिक्षा की समस्त पाठ्यपुस्तकों की त्वरित एवं निःशुल्क आपूर्ति सुनिश्चित की जाए तथा इस नाकामी और घोर लापरवाही के लिए जिम्मेदार दोषी विभागीय अधिकारियों के विरुद्ध कठोरतम अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाए ताकि भविष्य में विद्यार्थियों के भविष्य के साथ इस तरह का खिलवाड़ दोबारा न दोहराया जा सके।



