
Vedanta Power Plant Accident FIR: छत्तीसगढ़ के सक्ती जिले में स्थित वेदांता पावर प्लांट में हुए भीषण हादसे के बाद अब कानून का शिकंजा कसना शुरू हो गया है। प्रारंभिक जांच में प्लांट प्रबंधन की गंभीर लापरवाही सामने आने के बाद पुलिस ने बड़ी कार्रवाई की है। इस मामले में वेदांता ग्रुप के चेयरमैन अनिल अग्रवाल और प्लांट हेड देवेंद्र पटेल सहित कुल 19 लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है। पुलिस ने इन सभी के विरुद्ध भारतीय न्याय संहिता की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज कर जांच तेज कर दी है।
चेयरमैन अनिल अग्रवाल सहित 19 लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज
सक्ती पुलिस ने प्लांट प्रबंधन के शीर्ष अधिकारियों पर लापरवाही बरतने का आरोप लगाया है। पुलिस की ओर से जारी जानकारी के अनुसार भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 106(1), 289 और 3(5) के तहत अपराध पंजीबद्ध किया गया है। एफआईआर में साफ तौर पर कहा गया है कि सुरक्षा मानकों की अनदेखी के चलते यह बड़ा हादसा हुआ जिसमें कई मासूम श्रमिकों को अपनी जान गंवानी पड़ी। प्रशासन की इस कार्रवाई के बाद औद्योगिक जगत में हड़कंप मच गया है।
14 अप्रैल को हुआ था भीषण धमाका, 20 मजदूरों की मौत
यह दर्दनाक हादसा 14 अप्रैल को हुआ था जब वेदांता पावर प्लांट के बॉयलर में अचानक ब्लास्ट हो गया। इस धमाके की चपेट में आने से अब तक 20 मजदूरों की मौत हो चुकी है जबकि 16 अन्य घायल हैं। मृतकों में 5 श्रमिक छत्तीसगढ़ के रहने वाले थे जबकि अन्य 15 मजदूर दूसरे राज्यों से यहां काम करने आए थे। घायलों का इलाज रायपुर और रायगढ़ के विभिन्न निजी अस्पतालों में चल रहा है जहां कुछ की हालत अब भी नाजुक बनी हुई है।
फर्नेस में ईंधन का अधिक जमा होना बना हादसे की मुख्य वजह
हादसे के तुरंत बाद पहुंची तकनीकी टीम और फोरेंसिक विशेषज्ञों (FSL) ने अपनी प्रारंभिक जांच रिपोर्ट सौंप दी है। रिपोर्ट के अनुसार बॉयलर के फर्नेस में ईंधन की मात्रा सामान्य से कहीं अधिक हो गई थी जिससे वहां दबाव असामान्य रूप से बढ़ गया। इसी अत्यधिक दबाव के कारण बॉयलर का निचला पाइप अपनी जगह से उखड़ गया और देखते ही देखते भीषण विस्फोट हो गया। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि समय रहते ईंधन की निगरानी की जाती तो इस त्रासदी को टाला जा सकता था।
सुरक्षा मानकों और मशीनरी के रख-रखाव में भारी चूक
जांच में यह बात भी उभरकर आई है कि प्लांट के भीतर मशीनरी के नियमित रख-रखाव और सुरक्षा प्रोटोकॉल का सही ढंग से पालन नहीं किया गया। प्रबंधन पर आरोप है कि उन्होंने श्रमिकों की सुरक्षा को ताक पर रखकर यूनिट का संचालन जारी रखा। सुरक्षा उपकरणों की कमी और निगरानी तंत्र के विफल होने के कारण ही बॉयलर का दबाव खतरनाक स्तर तक पहुंच गया। पुलिस अब उन दस्तावेजों की जांच कर रही है जो प्लांट के मेंटेनेंस और सुरक्षा ऑडिट से जुड़े हैं।
एडिशनल एसपी के नेतृत्व में एसआईटी करेगी जांच
मामले की गंभीरता को देखते हुए सक्ती जिले के पुलिस अधीक्षक प्रफुल्ल ठाकुर ने एक विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया है। इस टीम का नेतृत्व अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक करेंगे जिसमें तकनीकी और फोरेंसिक विशेषज्ञ भी शामिल रहेंगे। यह टीम न केवल घटना के कारणों की गहराई से जांच करेगी बल्कि यह भी पता लगाएगी कि सुरक्षा नियमों का उल्लंघन किन-किन स्तरों पर हुआ है। जांच टीम को जल्द से जल्द विस्तृत रिपोर्ट पेश करने के निर्देश दिए गए हैं।
मुख्यमंत्री ने दिए मजिस्ट्रियल जांच के आदेश और मुआवजे का एलान
छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने इस पूरी घटना पर गहरा दुख व्यक्त करते हुए मजिस्ट्रियल जांच के आदेश दिए हैं। उन्होंने स्पष्ट किया है कि जांच में दोषी पाए जाने वाले किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा और उन पर श्रम कानूनों के तहत सख्त कार्रवाई होगी। सरकार ने मृतकों के परिवारों को 5-5 लाख रुपये और घायलों को 50 हजार रुपये की सहायता राशि देने की घोषणा की है। इसके साथ ही प्रधानमंत्री राहत कोष (PMNRF) से भी मृतकों के परिजनों को 2 लाख रुपये और घायलों को 50 हजार रुपये की सहायता दी जाएगी।
कंपनी ने किया 35 लाख की सहायता और नौकरी देने का वादा
भारी दबाव और कानूनी कार्रवाई के बीच वेदांता प्रबंधन ने भी अपनी ओर से मुआवजे की घोषणा की है। कंपनी ने प्रत्येक मृतक के परिवार को 35 लाख रुपये की आर्थिक सहायता और परिवार के एक सदस्य को नौकरी देने का भरोसा दिलाया है। वहीं गंभीर रूप से घायल श्रमिकों को इलाज के लिए 15-15 लाख रुपये देने की बात कही गई है। फिलहाल रायपुर के अस्पतालों में दो और रायगढ़ के अस्पतालों में 11 श्रमिकों का उपचार जारी है जिनकी स्थिति पर स्वास्थ्य विभाग नजर बनाए हुए है।
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