
Chhattisgarh Police Constable Waiting List:छत्तीसगढ़ पुलिस कांस्टेबल भर्ती को लेकर लंबे समय से चले आ रहे कानूनी विवाद में सुप्रीम कोर्ट ने बड़ा निर्णय सुनाया है। शीर्ष अदालत ने राज्य सरकार की विशेष अनुमति याचिका (SLP) को खारिज कर दिया है। इस फैसले से प्रतीक्षा सूची (वेटिंग लिस्ट) में शामिल 400 से अधिक अभ्यर्थियों की जॉइनिंग का रास्ता पूरी तरह साफ हो गया है। अदालत के इस रुख के बाद पिछले कई सालों से नियुक्ति की राह देख रहे युवाओं में राहत की लहर दौड़ गई है।
राज्य सरकार की विशेष अनुमति याचिका सुप्रीम कोर्ट से खारिज
CG Police Constable Recruitment: कांस्टेबल भर्ती प्रक्रिया के वेटिंग लिस्ट मामले में छत्तीसगढ़ सरकार ने बिलासपुर हाईकोर्ट के आदेश को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट का रुख किया था। सुप्रीम कोर्ट में सोमवार को हुई सुनवाई के दौरान जस्टिस संदीप मेहता और जस्टिस संजीव सचदेवा की खंडपीठ ने सरकार की तरफ से दायर याचिका को निरस्त कर दिया। इस फैसले से हाईकोर्ट द्वारा अभ्यर्थियों के पक्ष में सुनाए गए फैसले पर अंतिम मुहर लग गई है।
तीन महीने के भीतर जॉइनिंग प्रक्रिया पूरी करने के निर्देश
CG Police Bharti Waiting List Bilaspur High Court Order:अदालत ने अपने आदेश में स्पष्ट किया है कि वेटिंग लिस्ट के तहत आने वाले सभी पात्र अभ्यर्थियों की नियुक्ति प्रक्रिया तीन महीने के भीतर पूरी की जाए। सुप्रीम कोर्ट के इस समयबद्ध निर्देश के बाद अब संबंधित विभाग को तय समय-सीमा के भीतर कागजी कार्रवाई और जॉइनिंग की औपचारिकताएं पूरी करनी होंगी। लंबे समय से कानूनी लड़ाई लड़ रहे अभ्यर्थियों के लिए यह बेहद महत्वपूर्ण पड़ाव है।
वर्ष 2017 की कांस्टेबल भर्ती प्रक्रिया से जुड़ा है पूरा विवाद
यह पूरा मामला साल 2017 में निकाली गई 2259 पदों की पुलिस कांस्टेबल भर्ती प्रक्रिया से संबंधित है। उस समय परीक्षा और चयन के बाद वेटिंग लिस्ट जारी की गई थी, लेकिन खाली पड़े पदों को इस सूची से भरने पर कानूनी पेंच फंस गया था। बिलासपुर हाईकोर्ट ने 1 फरवरी 2024 को अभ्यर्थियों के हक में फैसला सुनाया था, जिसके खिलाफ राज्य सरकार सुप्रीम कोर्ट चली गई थी।
हाईकोर्ट ने पुलिस कांस्टेबल सेवा नियम 2007 का दिया था हवाला
बिलासपुर हाईकोर्ट ने अपने आदेश में पुलिस कांस्टेबल सेवा नियम 2007 के नियम 13(2) का संदर्भ दिया था। हाईकोर्ट के अनुसार, अगर पदोन्नति, सेवानिवृत्ति या कैडर बदलाव जैसी वजहों से पद खाली होते हैं, तो उन्हें वैध प्रतीक्षा सूची के जरिए भरा जाना चाहिए। सुप्रीम कोर्ट ने भी इसी व्यवस्था को सही मानते हुए राज्य सरकार की दलीलों को अस्वीकार कर दिया।
शीर्ष अदालत के आदेश से सैकड़ों युवाओं को मिलेगी सरकारी नौकरी
सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान अभ्यर्थियों की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ताओं ने पक्ष रखा, जबकि राज्य सरकार की तरफ से अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल पेश हुए। इससे पहले अदालत ने 47 सफल अभ्यर्थियों के पदों को सुरक्षित रखने का अंतरिम आदेश भी जारी किया था। अब अंतिम फैसला आने के बाद पुलिस विभाग में भर्ती की उम्मीद लगाए बैठे सैकड़ों युवाओं को आखिरकार उनका हक मिलने जा रहा है।



