
Kurud News: छत्तीसगढ़ के धमतरी जिले में महिला सशक्तिकरण की एक अनोखी मिसाल देखने को मिल रही है। कुरुद विकासखंड का चटौद गांव अब अपनी स्वावलंबी और उद्यमी महिलाओं की वजह से पूरे प्रदेश में पहचान बना रहा है। विधायक अजय चंद्राकर की पहल से गांव की महिलाएं स्वावलंबी और उद्यमी महिलाओं बनी और चटौद गांव आज पुरे प्रदेश ‘लखपति ग्राम’ बना कुरुद विधायक चंद्राकर ने ही फीता काटकर श्री गणेशा फायर वर्क्स प्राइवेट लिमिटेड का उद्घाटन किया था। कभी आजीविका के लिए केवल खेती-मजदूरी पर निर्भर रहने वाला यह गांव अब ‘लखपति ग्राम’ का दर्जा हासिल कर चुका है। गांव की 220 महिलाओं ने अपनी मेहनत और समझदारी से सालाना एक लाख रुपये से अधिक की कमाई दर्ज की है।
बिहान योजना और सरकारी प्रोत्साहन से बदली किस्मत
Dhamtari Chataud Success Story: राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन ‘बिहान’ से जुड़ने के बाद चटौद गांव की महिलाओं के जीवन में यह बड़ा बदलाव आया है। महिलाओं की बढ़ी हुई आय की पुष्टि आरसेटी के सर्वे, डिजिटल आजीविका रजिस्टर के आंकड़ों और थर्ड पार्टी वेरिफिकेशन की रिपोर्ट में हो चुकी है। गांव की महिलाओं को स्व-सहायता समूहों के जरिए संगठित किया गया और फिर उन्हें कौशल विकास, वित्तीय साक्षरता तथा बिजनेस मैनेजमेंट की ट्रेनिंग दी गई। इसके साथ ही आसान किस्तों पर लोन उपलब्ध कराकर उन्हें छोटे-छोटे स्वरोजगार शुरू करने के लिए प्रेरित किया गया।

पर्यावरण अनुकूल पटाखे बनाकर आत्मनिर्भर बनीं महिलाएं
Bihan Mission Kurud: गांव की महिलाओं की आमदनी बढ़ाने में ‘गणेशा फायरवर्क्स’ इकाई ने सबसे अहम भूमिका निभाई है। इस यूनिट में गांव की लगभग 100 महिलाएं पर्यावरण अनुकूल ग्रीन पटाखे बनाने का काम करती हैं। पटाखों की इस मैन्युफैक्चरिंग यूनिट से महिलाओं को गांव में ही स्थायी रोजगार मिल गया है। इससे उन्हें हर महीने नियमित आय हो रही है, जिससे उनके परिवारों को आर्थिक संबल मिला है और दूसरों पर निर्भरता खत्म हो गई है।

पारंपरिक खेती के अलावा पशुपालन और मत्स्य पालन को अपनाया
चटौद की महिलाओं ने खुद को केवल पारंपरिक खेती तक सीमित नहीं रखा। अपनी आय बढ़ाने के लिए उन्होंने पशुपालन, मत्स्य पालन, सब्जी उत्पादन और कृषि पर आधारित छोटे उद्योगों को अपनाया। इसके अलावा गोधन परियोजना से जुड़कर भी 200 से अधिक परिवारों ने गोबर और जैविक खाद बेचकर अतिरिक्त कमाई की है। इन बहुआयामी प्रयासों ने गांव के भीतर ही रोजगार के कई नए रास्ते खोल दिए हैं।
निर्णय लेने की क्षमता और सामाजिक आत्मविश्वास में बढ़ोतरी
आर्थिक रूप से मजबूत होने के बाद महिलाओं के आत्मविश्वास में अभूतपूर्व बदलाव आया है। स्व-सहायता समूहों से जुड़ी ये महिलाएं अब केवल अपने परिवार का बजट ही नहीं संभाल रहीं, बल्कि गांव के सामाजिक और विकास से जुड़े फैसलों में भी मुख्य भूमिका निभा रही हैं। चटौद की ‘लखपति दीदियां’ अब आसपास के गांवों की महिलाओं के लिए प्रेरणास्रोत बन चुकी हैं और गांव के बुनियादी ढांचे को मजबूत करने में योगदान दे रही हैं।

समूह आधारित रोजगार मॉडल से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई दिशा
चटौद गांव का ‘लखपति ग्राम’ बनना यह साबित करता है कि अगर ग्रामीण महिलाओं को सही प्रशिक्षण, संस्थागत सहयोग और वित्तीय साधन उपलब्ध कराए जाएं तो गांव की तस्वीर बदल सकती है। 220 से अधिक महिलाओं का लखपति बनना इस बात का प्रमाण है कि स्थानीय स्तर पर छोटे-छोटे उद्यम खड़े करके ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नए सिरे से गढ़ा जा सकता है।
प्रशासनिक स्तर पर चटौद मॉडल को अन्य गांवों में लागू करने की तैयारी
चटौद गांव की इस सफलता को देखते हुए जिला प्रशासन और पंचायत विभाग इस मॉडल को जिले के अन्य गांवों में भी दोहराने की योजना बना रहा है। अधिकारियों का मानना है कि क्लस्टर आधारित आजीविका गतिविधियों को बढ़ावा देकर और अधिक ग्रामीण महिलाओं को लखपति दीदी योजना के तहत लाया जा सकता है। इससे पलायन रोकने और ग्रामीण क्षेत्रों में स्थानीय रोजगार पैदा करने में बड़ी मदद मिलेगी।
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