बृजमोहन अग्रवाल की याचिका पर हाईकोर्ट सख्त: स्काउट-गाइड अध्यक्ष पद से हटाने पर राज्य सरकार को नोटिस, 12 फरवरी को अगली सुनवाई

बिलासपुर: छत्तीसगढ़ में भारत स्काउट-गाइड के राज्य परिषद अध्यक्ष पद को लेकर छिड़ी कानूनी जंग अब निर्णायक मोड़ पर पहुंच गई है। सांसद बृजमोहन अग्रवाल को इस पद से हटाए जाने के फैसले के खिलाफ बिलासपुर हाईकोर्ट में मंगलवार को महत्वपूर्ण सुनवाई हुई। न्यायमूर्ति की सिंगल बेंच ने मामले पर गौर करते हुए राज्य सरकार को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है। अदालत ने शासन को निर्देश दिया है कि वह इस पूरे मामले में अपना पक्ष स्पष्ट करे। हालांकि, फिलहाल कोर्ट ने अग्रवाल की याचिका पर कोई अंतरिम रोक या आदेश जारी नहीं किया है, लेकिन सरकार से जवाब मांगकर मामले को गंभीरता से लिया है।

हटाने की प्रक्रिया को बताया असंवैधानिक

सांसद बृजमोहन अग्रवाल ने अपनी याचिका में सरकार के कदम को पूरी तरह गलत और नियम विरुद्ध करार दिया है। उनका तर्क है कि उन्हें अध्यक्ष पद से हटाने का प्रस्ताव न केवल असंवैधानिक है, बल्कि पूरी तरह एकतरफा भी है। अग्रवाल का कहना है कि पद से मुक्त करने से पहले उन्हें कोई नोटिस नहीं दिया गया और न ही अपना पक्ष रखने का मौका मिला। याचिका में स्पष्ट किया गया है कि वे एक निर्वाचित सांसद होने के साथ-साथ परिषद के वैधानिक अध्यक्ष भी हैं, ऐसे में बिना किसी ठोस प्रक्रिया या सुनवाई के उन्हें हटाया जाना लोकतांत्रिक मर्यादाओं के खिलाफ है।

10 करोड़ की गड़बड़ी और जंबूरी का विवाद

विवाद की जड़ में जंबूरी आयोजन और उसमें हुई कथित वित्तीय अनियमितता को माना जा रहा है। बृजमोहन अग्रवाल ने अपनी याचिका में उल्लेख किया है कि परिषद के अध्यक्ष के रूप में उन्होंने 5 जनवरी को जंबूरी आयोजन को लेकर एक समीक्षा बैठक बुलाई थी। इस बैठक में करीब 10 करोड़ रुपये की वित्तीय गड़बड़ियों की बात सामने आई थी। अग्रवाल का दावा है कि सरकारी खजाने के दुरुपयोग को रोकने के लिए उन्होंने इस आयोजन को रद्द करने का बड़ा फैसला लिया था, जिसके बाद बदले की भावना से उनके खिलाफ यह कार्रवाई की गई।

फरवरी में होगी मामले की अगली सुनवाई

हाईकोर्ट ने इस हाई-प्रोफाइल मामले की अगली सुनवाई के लिए 12 फरवरी की तारीख मुकर्रर की है। तब तक राज्य सरकार को अपनी दलीलें और जवाब कोर्ट के समक्ष पेश करने होंगे। राजनीतिक गलियारों में इस मामले को लेकर काफी चर्चा है, क्योंकि यह सीधे तौर पर एक वरिष्ठ नेता और वर्तमान सरकार के बीच के टकराव से जुड़ा है। अब सबकी नजरें फरवरी में होने वाली सुनवाई पर टिकी हैं, जहां यह तय होगा कि अग्रवाल को राहत मिलती है या सरकार का फैसला बरकरार रहता है।

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Ravi Pratap Pandey

रवि पिछले 7 वर्षों से छत्तीसगढ़ में सक्रिय पत्रकार हैं। उन्होंने राज्य के सामाजिक, राजनीतिक और सांस्कृतिक पहलुओं पर गहराई से रिपोर्टिंग की है। जमीनी हकीकत को उजागर करने और आम जनता की आवाज़ को मंच देने के लिए वे लगातार लेखन और रिपोर्टिंग करते रहे हैं।

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