
रायपुर के 21 निजी अस्पतालों के लिए आयुष्मान भारत योजना से जुड़े रहना अब बड़ी चुनौती बन गया है। स्वास्थ्य विभाग ने इन अस्पतालों को कारण बताओ नोटिस जारी कर कड़ी चेतावनी दी है। मामला ‘HEM-2.0’ पोर्टल पर डॉक्टरों और बिस्तरों की पूरी जानकारी अपलोड न करने से जुड़ा है। बार-बार याद दिलाने के बाद भी लापरवाही बरतने पर विभाग ने कड़ा रुख अपनाया है और प्रबंधन को अपनी स्थिति स्पष्ट करने के लिए 13 फरवरी तक का आखिरी मौका दिया है।
मरीजों के मुफ्त इलाज पर मंडराया संकट
यह प्रशासनिक कार्रवाई उन हजारों मरीजों के लिए चिंता का विषय है जो गंभीर बीमारियों के इलाज के लिए आयुष्मान कार्ड पर निर्भर हैं। यदि ये 21 अस्पताल पोर्टल की अनिवार्य शर्तों को पूरा नहीं कर पाते हैं, तो उनका नाम योजना की सूची से हटा दिया जाएगा। ऐसी स्थिति में इन अस्पतालों में मुफ्त इलाज की सुविधा बंद हो जाएगी, जिसका सीधा आर्थिक बोझ मध्यम और निम्न वर्ग के परिवारों पर पड़ेगा।
दस्तावेज और लैपटॉप के साथ सीएमएचओ ऑफिस तलब
स्वास्थ्य विभाग ने आदेश दिया है कि जिन अस्पतालों ने अब तक अपना स्टाफ और बेड स्ट्रेंथ अपडेट नहीं किया है, वे शुक्रवार को सीधे मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO) कार्यालय पहुंचें। संचालकों को निर्देश दिया गया है कि वे अपने साथ जरूरी कागजात और लैपटॉप लेकर आएं ताकि मौके पर ही पोर्टल की एंट्री पूरी की जा सके। दिल्ली स्थित केंद्रीय कार्यालय से लगातार आ रहे दबाव के कारण राज्य नोडल एजेंसी अब इस मामले में और ढील देने को तैयार नहीं है।
छोटे अस्पतालों के बचाव में उतरा IMA
इस बीच इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (IMA) ने छोटे और मंझोले अस्पतालों का पक्ष लेते हुए मोर्चा खोल दिया है। संगठन का कहना है कि नए पोर्टल की शर्तें बहुत जटिल हैं, खासकर डॉक्टरों की अनिवार्य संख्या को लेकर छोटे नर्सिंग होम को परेशानी हो रही है। आईएमए के प्रतिनिधिमंडल ने स्वास्थ्य मंत्री से मुलाकात कर नियमों में बदलाव की मांग की है ताकि संसाधनों की कमी वाले अस्पतालों को योजना से बाहर होने से बचाया जा सके।
केंद्र सरकार को भेजा जाएगा नियमों में ढील का प्रस्ताव
स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल ने इस मामले पर सकारात्मक रुख दिखाया है। उन्होंने भरोसा दिलाया है कि वे जल्द ही स्वास्थ्य विभाग, वित्त विभाग और आईएमए के साथ संयुक्त बैठक करेंगे। इस बैठक के बाद स्थानीय परिस्थितियों के आधार पर कुछ नियमों को सरल बनाने का एक औपचारिक प्रस्ताव केंद्र सरकार को भेजा जाएगा। हाल ही में छत्तीसगढ़ दौरे पर आई केंद्रीय टीम ने भी कुछ बदलावों की जरूरत को स्वीकार किया है।
शुक्रवार की बैठक पर टिकी सबकी नजरें
शुक्रवार को होने वाली इस अहम बैठक के बाद ही यह साफ हो पाएगा कि कितने अस्पताल आयुष्मान योजना की दौड़ में बने रहते हैं। यदि केंद्र सरकार छत्तीसगढ़ के प्रस्ताव को मान लेती है, तो छोटे अस्पतालों को बड़ी राहत मिलेगी। फिलहाल, रायपुर के इन 21 अस्पतालों के पास केवल कुछ ही घंटों का समय है कि वे अपनी त्रुटियां सुधार लें, अन्यथा उन पर योजना से बाहर होने की गाज गिरना लगभग तय माना जा रहा है।
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