कथावाचक युवराज पांडे का छलका दर्द: सुरक्षा न मिलने पर उठाए सवाल, कहा- छत्तीसगढ़िया होना ही क्या हमारी गलती है?

रायपुर के सेजबहार (खिलोरा) में चल रही शिव महापुराण कथा के दौरान प्रसिद्ध कथावाचक आचार्य रामानुज युवराज पांडे का गुस्सा प्रशासन पर फूट पड़ा। कथा के मंच से उनका एक वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें वे सुरक्षा इंतजामों को लेकर बेहद दुखी नजर आ रहे हैं। उन्होंने कहा कि पंडाल में भक्तों का भारी जनसैलाब उमड़ रहा है, लेकिन इतनी भीड़ के बावजूद सुरक्षा के लिए दो पुलिसकर्मी तक तैनात नहीं किए गए हैं। युवराज पांडे ने सीधे तौर पर प्रशासन को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि क्या हमारी गलती सिर्फ इतनी है कि हम छत्तीसगढ़ के स्थानीय कथावाचक हैं?

कलश यात्रा में चोरी और अव्यवस्था से बढ़ी चिंता

कथावाचक ने बताया कि कार्यक्रम के पहले ही दिन कलश यात्रा के दौरान सुरक्षा न होने का फायदा उठाकर चोरों ने कई श्रद्धालुओं की सोने की मालाएं पार कर दीं। इस घटना के बाद से कई भक्त डर के मारे कथा में आने से कतरा रहे हैं। उन्होंने प्रशासन से तीखे सवाल पूछते हुए कहा कि क्या कोई बड़ा टारगेट तय किया गया है कि महाराज को भीड़ के बीच असुरक्षित छोड़कर निपटाना है? उन्होंने स्पष्ट किया कि सुरक्षा के लिए हर विभाग को लिखित आवेदन दिया गया था, लेकिन अब तक कोई सुनवाई नहीं हुई। फिलहाल पूरी व्यवस्था केवल कुछ निजी बाउंसरों के भरोसे चल रही है।

छत्तीसगढ़ी शैली के लिए देशभर में मशहूर हैं युवराज

आचार्य युवराज पांडे महज 10-12 साल की उम्र से ही कथा वाचन कर रहे हैं और अपनी खास छत्तीसगढ़ी शैली और ‘पचरा गीत’ (देवी भक्ति गीत) के लिए सोशल मीडिया पर खासे लोकप्रिय हैं। उनकी सादगी और क्षेत्रीय भाषा में दिए जाने वाले उपदेशों की वजह से उन्हें सुनने दूर-दूर से लोग आते हैं। वर्तमान में चल रही कथा में अव्यवस्थाओं को लेकर उन्होंने भावुक होते हुए कहा कि अब सब कुछ भगवान जगन्नाथ और छत्तीसगढ़ महतारी के भरोसे है। यदि कोई अनहोनी होती है, तो इसकी जिम्मेदारी केवल प्रशासन की होगी।

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Ravi Pratap Pandey

रवि पिछले 7 वर्षों से छत्तीसगढ़ में सक्रिय पत्रकार हैं। उन्होंने राज्य के सामाजिक, राजनीतिक और सांस्कृतिक पहलुओं पर गहराई से रिपोर्टिंग की है। जमीनी हकीकत को उजागर करने और आम जनता की आवाज़ को मंच देने के लिए वे लगातार लेखन और रिपोर्टिंग करते रहे हैं।

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