
Rajnandgaon School Controversy: छत्तीसगढ़ के राजनांदगांव में नेताओं के कार्यक्रम में भीड़ जुटाने के लिए स्कूली बच्चों की परीक्षा रोकने का मामला लगातार तूल पकड़ता जा रहा है। पदुमलाल पुन्नालाल बख्शी शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय में 9वीं से 12वीं तक के छात्रों को तिमाही परीक्षा में बैठाने के बजाय भाजपा के सेवा संकल्प अभियान में भेज दिया गया। इस कार्यक्रम में राज्य के उपमुख्यमंत्री अरुण साव मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए थे। मामला उजागर होने के बाद शिक्षा विभाग ने जांच के आदेश दे दिए हैं।
राजनांदगांव के बख्शी स्कूल का पूरा मामला
Rajnandgaon School News: यह घटना राजनांदगांव के प्रसिद्ध बख्शी स्कूल की है। तय समय सारणी के अनुसार विद्यार्थियों की तिमाही परीक्षा आयोजित की जानी थी। बच्चे परीक्षा की तैयारी करके स्कूल पहुंचे थे, लेकिन उन्हें परीक्षा दिलाने के बजाय कार्यक्रम स्थल पर ले जाया गया। इस वाकये के बाद अभिभावकों और स्थानीय लोगों में काफी नाराजगी देखने को मिल रही है।
उपमुख्यमंत्री अरुण साव थे कार्यक्रम के मुख्य अतिथि
जिस आयोजन के लिए बच्चों को ले जाने का आरोप लगा है, वह भाजपा का सेवा संकल्प अभियान था। इसमें मुख्य अतिथि के रूप में उपमुख्यमंत्री अरुण साव मौजूद थे। वीआईपी कार्यक्रम में भीड़ दिखाने के लिए स्कूल की परीक्षा व्यवस्था को अचानक रोक दिया गया, जिससे शिक्षा महकमे की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
राज्य स्तर से तय थी तिमाही परीक्षा की तारीख
उल्लेखनीय है कि इस तिमाही परीक्षा का टाइम टेबल राज्य स्तर से ही निर्धारित किया गया था और प्रश्नपत्र जिला स्तर पर तैयार किए गए थे। सभी सरकारी स्कूलों में एक साथ परीक्षा का आयोजन होना था। इसके बावजूद बख्शी स्कूल में परीक्षा वाले दिन ही बच्चों को परीक्षा कक्ष में बैठाने के बजाय सीधे कार्यक्रम में भेज दिया गया।
जिला शिक्षा अधिकारी ने जताई अनभिज्ञता
मामले पर राजनांदगांव के जिला शिक्षा अधिकारी प्रवास सिंह बघेल ने स्पष्ट किया है कि शिक्षा विभाग की ओर से परीक्षा रद्द करने या आगे बढ़ाने का कोई आदेश जारी नहीं हुआ था। उन्होंने कहा कि न तो इसके लिए कोई अनुमति मांगी गई थी और न ही उन्हें इस बात की कोई जानकारी थी। विभाग को बिना बताए परीक्षा रोका जाना एक गंभीर लापरवाही है।
विभागीय आदेश के बिना कैसे रुकी परीक्षा
अब सबसे बड़ा सवाल यही उठ रहा है कि जब शिक्षा विभाग से कोई लिखित आदेश जारी नहीं हुआ था, तो किसके कहने पर परीक्षा रोकी गई। क्या स्कूल प्रशासन ने स्थानीय नेताओं के दबाव में यह फैसला लिया या फिर अपनी मर्जी से बच्चों को कार्यक्रम में भेजा। इस प्रशासनिक चूक को लेकर सवाल तीखे होते जा रहे हैं।
शिक्षा विभाग ने गठित की जांच कमेटी
मामले के तूल पकड़ने के बाद जिला शिक्षा अधिकारी ने पूरे घटनाक्रम की पड़ताल के लिए जांच कमेटी का गठन कर दिया है। अधिकारियों का कहना है कि जांच रिपोर्ट आने के बाद दोषी पाए जाने वाले कर्मचारियों और जिम्मेदारों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल पुलिस और प्रशासन की नजर जांच के नतीजों पर टिकी है।
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