
Kareli Badi Frooti Lizard: छत्तीसगढ़ के धमतरी जिले से एक बेहद चौंकाने वाला और डराने वाला मामला सामने आया है. यहाँ बाजार में मिलने वाले बेहद लोकप्रिय मैंगो ड्रिंक ‘फ्रूटी’ के 10 रुपये वाले छोटे पाउच के भीतर छिपकली की चमड़ी मिलने से हड़कंप मच गया है. इस दूषित पेय पदार्थ को पीने के तुरंत बाद एक दो साल की मासूम बच्ची की तबीयत अचानक खराब हो गई, जिसे परिजनों ने फौरन नजदीकी अस्पताल में दाखिल कराया. इस सनसनीखेज घटना ने बाजार में बिकने वाले पैकेज्ड फूड और कोल्ड ड्रिंक्स की शुद्धता सहित खाद्य सुरक्षा विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं.
करेली बड़ी क्षेत्र की घटना, ₹10 वाले पाउच से निकला 3 इंच लंबा जहरीला अवशेष
यह पूरा मामला धमतरी जिले के अंतर्गत आने वाले करेली बड़ी क्षेत्र का है. जानकारी के मुताबिक, एक स्थानीय ग्रामीण परिवार ने अपने घर के पास स्थित किराना दुकान से बच्चों के पीने के लिए 100 एमएल का फ्रूटी पाउच खरीदा था. घर लाकर जैसे ही दो वर्षीय मासूम बच्ची को फ्रूटी पिलाई गई, उसने कुछ ही घूंट पिए थे कि उसे अचानक उल्टी होने लगी और उसका जी मिचलाने लगा. बच्ची की हालत बिगड़ती देख घबराए माता-पिता ने जब फ्रूटी के पाउच को काटकर उसके भीतर देखा, तो उनके होश उड़ गए. पाउच के अंदर करीब 3 इंच लंबा एक संदिग्ध जहरीला अवशेष तैर रहा था.

जांच में हुई छिपकली की चमड़ी होने की आधिकारिक पुष्टि, सहम गए ग्रामीण
परिजनों ने बिना वक्त गंवाए बीमार बच्ची को इलाज के लिए तुरंत अस्पताल पहुंचाया और मामले की जानकारी स्थानीय प्रशासन को दी. इसके साथ ही पाउच से निकले उस संदिग्ध अवशेष को जांच के लिए संबंधित अधिकारियों को सौंपा गया. शुरुआती तकनीकी और भौतिक जांच के बाद यह आधिकारिक रूप से साफ हो गया कि पाउच के भीतर मिला वह जहरीला टुकड़ा वास्तव में एक छिपकली की चमड़ी थी. इस बात की पुष्टि होते ही इलाके के लोग सहम गए हैं और दुकानों में बिकने वाले पैकेट बंद सामानों को लेकर उनके बीच डर का माहौल बन गया है.
अस्पताल में डॉक्टरों की निगरानी में है मासूम, हालत फिलहाल स्थिर
करेली बड़ी के स्थानीय अस्पताल सूत्रों से मिली ताजा जानकारी के अनुसार, फूड पॉइजनिंग की शिकार हुई दो साल की बच्ची को समय रहते डॉक्टरी इलाज मिल गया. डॉक्टरों की एक टीम लगातार बच्ची के स्वास्थ्य की निगरानी कर रही है. राहत की बात यह है कि प्राथमिक उपचार के बाद बच्ची के शरीर में जहर फैलने का खतरा टल गया है और वर्तमान में उसकी स्थिति खतरे से बाहर और स्थिर बताई जा रही है. हालांकि, इस दर्दनाक अनुभव से सहमे हुए माता-पिता का रो-रोकर बुरा हाल है.
निर्माण इकाई में गड़बड़ी हुई या सप्लाई चेन में लापरवाही, जांच में जुटा प्रशासन
फ्रूटी जैसे बड़े और नामचीन ब्रांड के सीलबंद पैकेट में छिपकली की चमड़ी मिलने की खबर मिलते ही धमतरी जिला प्रशासन और खाद्य सुरक्षा विभाग का अमला सक्रिय हो गया है. अधिकारी अब इस बात की गहन तफ्तीश कर रहे हैं कि इतनी बड़ी लापरवाही आखिर किस स्तर पर हुई. जांच टीम यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि यह जहरीला अवशेष फैक्ट्री में निर्माण प्रक्रिया (मैन्युफैक्चरिंग प्रोसेस) के दौरान पैकेट के भीतर बंद हुआ था या फिर थोक वितरण और ट्रांसपोर्टेशन के दौरान किसी स्थानीय स्तर पर खराबी के कारण ऐसा हुआ.
आक्रोषित परिजनों ने की दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की मांग, विभाग की चुप्पी पर उठे सवाल
मासूम बच्ची के माता-पिता और क्षेत्र के ग्रामीणों ने इस लापरवाही के लिए जिम्मेदार कंपनी और संबंधित किराना दुकान संचालक के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई करने की मांग की है. ग्रामीणों का कहना है कि बच्चों के खाद्य पदार्थों के साथ इस तरह का खिलवाड़ किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाना चाहिए. दूसरी ओर, इस पूरे गंभीर मामले को लेकर खाद्य सुरक्षा विभाग के जिम्मेदार आला अधिकारियों ने अभी तक मीडिया के सामने कोई भी आधिकारिक बयान जारी नहीं किया है, जिससे स्थानीय लोगों में नाराजगी और बढ़ती जा रही है.



