
Dhamtari Petrol Black Marketing: छत्तीसगढ़ के कई जिलों में अचानक गहराए ईंधन संकट ने आम जनता की मुसीबतें बढ़ा दी हैं. धमतरी और बीजापुर जिलों से पेट्रोल-डीजल की भारी किल्लत की खबरें आ रही हैं, जिसके कारण स्थानीय जनजीवन की रफ्तार पूरी तरह थम गई है. धमतरी में स्थिति इतनी बिगड़ चुकी है कि वहां पेट्रोल पंप बंद होने का फायदा उठाकर खुलेआम कालाबाजारी शुरू हो गई है. वहीं बस्तर संभाग के बीजापुर जिले में स्टॉक खत्म होने की वजह से पेट्रोल पंप पूरी तरह सूख चुके हैं. इस संकट के चलते सबसे ज्यादा परेशानी दैनिक यात्रियों, नौकरीपेशा लोगों और खेती-किसानी के काम में जुटे किसानों को उठानी पड़ रही है.
धमतरी जिले के सभी 77 पेट्रोल पंपों में ईंधन स्टॉक हुआ शून्य
ईंधन किल्लत का सबसे ज्यादा असर धमतरी, कुरुद, मगरलोड और नगरी अंचल में देखने को मिल रहा है. इस पूरे क्षेत्र में छोटे-बड़े मिलाकर कुल 77 पेट्रोल पंप संचालित होते हैं. प्रशासनिक सूत्रों के मुताबिक, 9 जून की देर शाम तक जिले के लगभग सभी प्रमुख पेट्रोल पंपों का सुरक्षित स्टॉक पूरी तरह से शून्य हो गया. कुछ गिने-चुने पंपों पर केवल डीजल ही बचा हुआ है. पेट्रोल न होने की वजह से 10 जून की सुबह से ही शहर और ग्रामीण इलाकों के सभी फ्यूल स्टेशनों पर ‘नो स्टॉक’ की तख्तियां लटका दी गई हैं.
आधी रात से भटक रहे वाहन चालक, सुबह भी नहीं पहुंची सप्लाई
पेट्रोल खत्म होने की खबर फैलते ही पूरे धमतरी शहर में अफरा-तफरी का माहौल बन गया. बड़ी संख्या में लोग अपने वाहनों में ईंधन भरवाने के लिए आधी रात को भी एक स्टेशन से दूसरे स्टेशन के चक्कर काटते नजर आए. उम्मीद थी कि 10 जून की सुबह तक तेल कंपनियों के टैंकर जिला मुख्यालय पहुंच जाएंगे, लेकिन दोपहर तक नई सप्लाई नहीं आ सकी. इस वजह से दफ्तर जाने वाले कर्मचारियों और स्कूली बच्चों को ले जाने वाले वाहनों के पहिए पूरी तरह थम गए हैं. उपभोक्ता अब बेसब्री से नई खेप का इंतजार कर रहे हैं.
3. संकट का फायदा उठाकर 140 रुपये लीटर बिक रहा ब्लैक का पेट्रोल
पेट्रोल पंपों के बंद होने का सीधा फायदा स्थानीय मुनाफाखोर उठा रहे हैं. धमतरी और उसके आसपास के ग्रामीण इलाकों में स्थित कुछ साइकिल रिपेयरिंग दुकानों और ऑटो पार्ट्स सेंटरों में चोरी-छिपे पेट्रोल की कालाबाजारी की जा रही है. मजबूरी का फायदा उठाकर मुनाफाखोर 140 रुपये प्रति लीटर की मनमानी कीमत पर पेट्रोल बेच रहे हैं. जिन लोगों को बेहद जरूरी काम से बाहर जाना है, वे भारी मन से इस महंगी दर पर भी खुले कप्पों और बोतलों में पेट्रोल खरीदने को मजबूर हैं.
पेट्रोल पंप संचालकों ने शाम तक टैंकर पहुंचने की जताई उम्मीद
इस पूरे मामले पर पेट्रोल पंप एसोसिएशन और स्थानीय संचालकों का कहना है कि डिपो से तेल की लोडिंग में आई कुछ तकनीकी दिक्कतों और परिवहन की समस्या की वजह से यह अस्थायी किल्लत पैदा हुई है. संचालकों के मुताबिक, तेल कंपनियों को एडवांस पेमेंट की जा चुकी है और टैंकर रास्ते में हैं. उम्मीद जताई जा रही है कि शाम तक सभी प्रमुख आउटलेट्स पर पेट्रोल की नई खेप पहुंच जाएगी, जिसके बाद आपूर्ति व्यवस्था को दोबारा सामान्य कर दिया जाएगा.
बीजापुर के सुदूर अंचलों में सूखे पंप, जनजीवन बुरी तरह प्रभावित
दूसरी तरफ, बस्तर संभाग के नक्सल प्रभावित बीजापुर जिले में भी स्थिति बेहद चिंताजनक बनी हुई है. बीजापुर जिला मुख्यालय सहित भैरमगढ़, भोपालपट्टनम और आवापल्ली जैसे सुदूरवर्ती सीमांत इलाकों के पेट्रोल पंपों पर ईंधन का स्टॉक पूरी तरह समाप्त हो चुका है. इन इलाकों में पिछले दो दिनों से तेल की भारी किल्लत है. दूर-दराज के गांवों से आने वाले ग्रामीणों को जब पंपों पर पेट्रोल नहीं मिल रहा, तो उन्हें भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है.
खेती के सीजन में डीजल-पेट्रोल न मिलने से परेशान हुए किसान
बीजापुर और धमतरी, दोनों ही जिलों में इस ईंधन संकट की सबसे बड़ी मार किसानों पर पड़ रही है. जून का महीना खरीफ फसलों की बोनी का समय होता है, जब खेतों की जुताई और पानी के इंजन चलाने के लिए ट्रैक्टरों को भारी मात्रा में डीजल और पेट्रोल की जरूरत होती है. ऐन खेती के सीजन में ईंधन न मिलने की वजह से कृषि कार्य पिछड़ने का डर पैदा हो गया है. इसके अलावा मालवाहक वाहनों के खड़े हो जाने से आवश्यक वस्तुओं की समय पर सप्लाई भी प्रभावित हो रही है.



