
Dhamtari PM Awas Yojana: छत्तीसगढ़ के धमतरी जिले की ग्राम पंचायत पूरी में प्रधानमंत्री आवास योजना को लेकर एक बड़ा विवाद सामने आया है. यहां के करीब 40 गरीब परिवारों के नाम आवास योजना की चालू पात्रता सूची से अचानक गायब कर दिए गए हैं. इस प्रशासनिक फेरबदल से नाराज और परेशान ग्रामीणों ने जिला कलेक्टरेट पहुंचकर कलेक्टर को एक लिखित ज्ञापन सौंपा है. ग्रामीणों का सीधा आरोप है कि बिना किसी ठोस वजह या लिखित जानकारी के उनका हक छीना गया है. उन्होंने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने और दोबारा भौतिक सत्यापन करवाकर अपात्र किए गए असली हकदारों के नाम सूची में जोड़ने की मांग की है.
पहले जारी सूची में शामिल थे नाम
कलेक्टर से शिकायत करने पहुंचे दिलीप निषाद, कुंदेश्वरी साहू, अनिता और विसन बाई सहित अन्य ग्रामीणों ने बताया कि वे सभी लंबे समय से अपने पक्के मकान की उम्मीद में बैठे थे. सरकार की तरफ से पूर्व में जारी की गई पात्रता सूची में उनके नाम बाकायदा शामिल थे और सब कुछ तय माना जा रहा था. आरोप है कि हाल ही में पंचायत के तकनीकी सहायक ने गांव में आकर एक सर्वे और निरीक्षण किया था. इस विभागीय जांच के तुरंत बाद बिना किसी पूर्व सूचना या स्पष्टीकरण के चुपचाप 40 लोगों के नाम सूची से हटा दिए गए.
बिना किसी पूर्व सूचना या लिखित नोटिस के काटा नाम
पीड़ित परिवारों का कहना है कि किसी भी सरकारी योजना की लिस्ट से नाम हटाने से पहले संबंधित व्यक्ति को कारण बताओ नोटिस जारी किया जाना चाहिए या फिर ग्राम सभा की बैठक में इसका प्रस्ताव लाया जाना चाहिए. इस मामले में पंचायत स्तर पर ऐसी किसी भी पारदर्शी प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया. ग्रामीणों को इस बात की भनक तब लगी जब नई सूची जारी हुई और उसमें उनका नाम ही गायब था. किसी भी स्तर पर सुनवाई न होने के कारण अब ग्रामीणों को जिला मुख्यालय आकर गुहार लगानी पड़ी है.
ग्राम सभा के प्रस्ताव की अनदेखी
आवास विकास के नियमों के मुताबिक प्रधानमंत्री आवास योजना की सूची में किसी भी तरह के संशोधन या नाम जोड़ने-घटाने का अंतिम अधिकार ग्राम सभा के पास होता है. ग्रामीणों ने अपनी शिकायत में विशेष रूप से उल्लेख किया है कि पंचायत प्रशासन ने ग्राम सभा की पूरी व्यवस्था को दरकिनार कर यह मनमाना फैसला लिया है. इस अपारदर्शी कार्रवाई के कारण गांव के वास्तविक जरूरतमंद लोग इस महत्वपूर्ण कल्याणकारी योजना के लाभ से पूरी तरह वंचित हो गए हैं जिससे पंचायती राज व्यवस्था पर सवाल खड़े हो रहे हैं.
गरीब परिवारों के सिर पर मंडराया आशियाने का बड़ा संकट
इस प्रशासनिक चूक का सबसे ज्यादा असर गांव के बेहद गरीब और असहाय तबके पर पड़ा है. जिन 40 परिवारों के नाम सूची से काटे गए हैं, उनमें से अधिकांश लोग भूमिहीन हैं और रोज कमाना-रोज खाना जैसी स्थिति में मजदूरी कर अपना घर चलाते हैं. उनके पास इतने पैसे नहीं हैं कि वे खुद के खर्च पर ईंट और सीमेंट का पक्का मकान खड़ा कर सकें. सरकारी सहायता ही उनके लिए एकमात्र सहारा थी, जिसके छिन जाने के बाद अब उनके सामने रहने का संकट और ज्यादा गहरा हो गया है.
उम्मीद टूटने से परिवारों में छाई मायूसी
सालों से कच्चे मकान या झोपड़ी में रह रहे इन परिवारों को उम्मीद थी कि इस बार उनके सिर पर भी एक पक्की छत होगी. अचानक नाम कटने की खबर ने इन सभी को मानसिक रूप से परेशान कर दिया है. ग्रामीणों का कहना है कि इस फैसले से उनकी उम्मीदें पूरी तरह टूट गई हैं और वे खुद को ठगा हुआ महसूस कर रहे हैं. घर के बड़े सदस्य इस बात को लेकर चिंतित हैं कि बरसात के इस मौसम में वे अपने बच्चों और बुजुर्गों को लेकर कहां जाएंगे.
निष्पक्ष जांच और नए सिरे से दोबारा भौतिक सत्यापन की मांग
कलेक्टर को सौंपे गए ज्ञापन में ग्रामीणों ने स्पष्ट मांग रखी है कि इस पूरे गड़बड़झाले की जांच के लिए जिला स्तर से किसी स्वतंत्र अधिकारी को नियुक्त किया जाए. वह अधिकारी खुद गांव आकर जमीनी हकीकत देखे और दोनों पक्षों की मौजूदगी में दोबारा भौतिक सत्यापन (physical verification) करे. ग्रामीणों ने साफ कहा है कि जो भी परिवार नियमों के तहत पात्र पाए जाते हैं, उनके नाम तुरंत प्रभाव से प्रधानमंत्री आवास योजना की मुख्य सूची में वापस जोड़े जाएं ताकि उन्हें पक्का मकान मिल सके.



