शादी की थाली से गायब हुए पकवान: LPG संकट और महंगाई की मार, रिसेप्शन का बजट डेढ़ लाख तक उछला

छत्तीसगढ़ में शादी-ब्याह का सीजन इस बार आम आदमी की जेब पर भारी पड़ रहा है। कमर्शियल गैस सिलेंडर की किल्लत और लगातार बढ़ती कीमतों ने कैटरिंग के बजट को पूरी तरह बिगाड़ दिया है। हालात यह हैं कि अब बारातियों की स्वागत थाली से कई महंगे पकवान कम होने लगे हैं। गैस संकट के चलते शादी और रिसेप्शन जैसे बड़े आयोजनों का कुल खर्च औसतन एक से डेढ़ लाख रुपये तक बढ़ गया है। मध्यमवर्गीय परिवारों के लिए अब ‘रॉयल वेडिंग’ तो दूर, एक सामान्य समारोह आयोजित करना भी बड़ी चुनौती बन गया है।

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कैटरिंग सेक्टर पर सबसे ज्यादा असर: 50 से 300 रुपये तक महंगी हुई एक प्लेट

राजधानी रायपुर समेत पूरे प्रदेश में कैटरिंग व्यवसाय से जुड़े लोग इस समय दोहरी मार झेल रहे हैं। एक तरफ कमर्शियल सिलेंडर के दाम आसमान छू रहे हैं, तो दूसरी तरफ बाजार में इनकी सप्लाई भी अनियमित हो गई है। कैटरर्स का कहना है कि गैस की कमी के कारण अब पुरानी दरों पर काम करना मुमकिन नहीं रह गया है। यही वजह है कि खाने की प्रति प्लेट कीमत में 50 रुपये से लेकर 300 रुपये तक का इजाफा कर दिया गया है। जो मेन्यू पहले बजट में फिट बैठता था, उसके लिए अब ग्राहकों को अतिरिक्त भुगतान करना पड़ रहा है।

20 फीसदी तक बढ़ी लागत: केवल गैस ही नहीं, राशन और तेल भी हुए महंगे

शादी के खाने का स्वाद बिगाड़ने में केवल गैस का हाथ नहीं है। बाजार में खाद्य तेल, दालें, मसाले और सब्जियों की कीमतों में भी पिछले कुछ महीनों में भारी उछाल आया है। कैटरर्स के मुताबिक, कच्चा माल महंगा होने और लेबर चार्ज बढ़ने की वजह से उनकी कुल लागत में 15 से 20 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी हुई है। इस बढ़ते खर्च का बोझ सीधे तौर पर उन परिवारों पर पड़ रहा है, जिनके घर में आने वाले दिनों में शहनाइयां बजने वाली हैं।

ऐसे समझिए गणित: 500 मेहमानों पर एक लाख का अतिरिक्त बोझ

अगर आंकड़ों के जरिए समझें, तो एक औसत शादी में कम से कम 500 से 1000 मेहमान शामिल होते हैं। यदि कैटरर प्रति प्लेट केवल 200 रुपये की बढ़ोतरी करता है, तो 500 मेहमानों के हिसाब से मेजबान की जेब पर सीधा एक लाख रुपये का अतिरिक्त भार बढ़ जाता है। इसी तरह बड़े आयोजनों में जहां मेहमानों की संख्या हजार से ऊपर होती है, वहां यह खर्च डेढ़ से दो लाख रुपये तक पहुंच रहा है। लोग अब मजबूरी में अपने जीवन की सबसे बड़ी खुशी के बजट को दोबारा मैनेज करने में जुटे हैं।

प्रीमियम थाली अब पहुंच से बाहर: 800 से 3000 रुपये तक हुए नए रेट

महंगाई का असर हर स्तर के मेन्यू पर दिख रहा है। पहले जहां 500 रुपये में एक सम्मानजनक थाली तैयार हो जाती थी, अब उसकी शुरुआत ही 550 से 800 रुपये के बीच हो रही है। वहीं, अगर आप थोड़ा बेहतर या प्रीमियम मेन्यू चाहते हैं, तो इसकी कीमत 1000 रुपये से लेकर 3000 रुपये प्रति प्लेट तक जा रही है। आलीशान होटलों और बड़े गार्डन में होने वाले कार्यक्रमों के लिए यह दरें और भी ज्यादा हैं, जिससे शादी का कुल बजट लाखों के पार निकल गया है।

नई बुकिंग पर ‘न्यू रेट’ लागू: पुरानी बुकिंग वालों को भी राहत नहीं

कैटरिंग संचालकों का कहना है कि वे उन ग्राहकों को थोड़ी राहत देने की कोशिश कर रहे हैं जिन्होंने महीनों पहले बुकिंग कराई थी, लेकिन हर जगह यह संभव नहीं है। कई मामलों में ग्राहकों से आपसी सहमति बनाकर थोड़े पैसे बढ़ाए जा रहे हैं। वहीं, नई बुकिंग करने वालों के लिए पूरी तरह से नई और महंगी रेट लिस्ट लागू कर दी गई है। कुछ कैटरर्स ने तो अनिश्चितता को देखते हुए बुकिंग के समय ही ‘मार्केट रेट’ की शर्त रखना शुरू कर दिया है।

पकवानों में कटौती का ट्रेंड: कम आइटम वाली छोटी थाली को मिल रही प्राथमिकता

बजट को काबू में रखने के लिए अब लोग एक नया रास्ता अपना रहे हैं। मेन्यू में पकवानों की लंबी लिस्ट के बजाय अब केवल खास और जरूरी डिशेज ही रखी जा रही हैं। लोग स्टार्टर्स और डेजर्ट्स की संख्या कम कर रहे हैं ताकि प्रति प्लेट कीमत को कुछ हद तक नीचे लाया जा सके। मेहमानों की लिस्ट को भी अब 200 से 300 तक सीमित करने की कोशिशें की जा रही हैं ताकि महंगाई के दौर में मान-मर्यादा भी बनी रहे और कर्ज का बोझ भी न बढ़े।

टेंट और डेकोरेशन भी हुए महंगे: इवेंट मैनेजमेंट सेक्टर पर भी पड़ा असर

इस महंगाई की तपिश केवल किचन तक सीमित नहीं है। टेंट हाउस, लाइट डेकोरेशन और इवेंट मैनेजमेंट का काम भी महंगा हो गया है। ट्रांसपोर्टेशन के खर्चे बढ़ने के कारण सामान को एक जगह से दूसरी जगह ले जाना अब महंगा पड़ रहा है। इवेंट प्लानर्स का कहना है कि फूलों से लेकर जनरेटर तक, हर चीज का किराया 10-15 प्रतिशत तक बढ़ गया है। कुल मिलाकर एक मध्यमवर्गीय शादी का पूरा पैकेज अब पहले के मुकाबले काफी महंगा हो गया है।

सप्लाई चेन में सुधार का इंतजार: छोटे बजट वाले परिवारों की बढ़ी मुश्किलें

बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि अगर कमर्शियल गैस की सप्लाई में जल्द सुधार नहीं हुआ, तो आने वाले हफ्तों में मुश्किलें और बढ़ सकती हैं। छोटे बजट में सादगी से कार्यक्रम करने वाले परिवारों के लिए यह स्थिति सबसे ज्यादा चिंताजनक है। उनके पास न तो बड़े होटलों जैसे विकल्प हैं और न ही वे बहुत ज्यादा मेहमानों की कटौती कर सकते हैं। फिलहाल लोग उम्मीद कर रहे हैं कि प्रशासन हस्तक्षेप करेगा और गैस की कीमतों व सप्लाई को नियंत्रित किया जाएगा।

बजट की नई प्लानिंग: छत्तीसगढ़ में बदल रही शादियों की तस्वीर

बढ़ती लागत को देखते हुए छत्तीसगढ़ के लोग अब अपनी प्लानिंग में बदलाव कर रहे हैं। अब लोग दिखावे के बजाय उपयोगिता पर ध्यान दे रहे हैं। शादी की योजना बनाते समय अब लोग पहले से 20 से 30 प्रतिशत ज्यादा बजट का प्रावधान कर रहे हैं। साथ ही, कई लोग अब दिन के समय कार्यक्रम करने पर विचार कर रहे हैं ताकि बिजली और लाइटिंग के खर्च में थोड़ी बचत की जा सके। महंगाई ने शादियों के पारंपरिक तरीके को भी डिजिटल और स्मार्ट बनाने पर मजबूर कर दिया है।

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Ravi Pratap Pandey

रवि पिछले 7 वर्षों से छत्तीसगढ़ में सक्रिय पत्रकार हैं। उन्होंने राज्य के सामाजिक, राजनीतिक और सांस्कृतिक पहलुओं पर गहराई से रिपोर्टिंग की है। जमीनी हकीकत को उजागर करने और आम जनता की आवाज़ को मंच देने के लिए वे लगातार लेखन और रिपोर्टिंग करते रहे हैं।

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