
छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में साइबर ठगों ने धोखाधड़ी का एक नया और खतरनाक तरीका अपनाया है। टिकरापारा थाना क्षेत्र में रहने वाले एक कारोबारी को शेयर ट्रेडिंग और दोगुने मुनाफे का झांसा देकर 6 लाख रुपये की चपत लगा दी गई। इस ठगी की सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि जालसाजों ने लोगों का भरोसा जीतने के लिए देश की वित्त मंत्री के नाम और उनके वीडियो का सहारा लिया। सोशल मीडिया पर चल रहे इस फर्जी प्रचार के जाल में फंसकर पीड़ित ने अपनी जीवन भर की जमा पूंजी गंवा दी।
फेसबुक वीडियो और वित्त मंत्री के नाम का सहारा
ठगी की यह कहानी सितंबर 2025 में शुरू हुई थी। छत्तीसगढ़ नगर के रहने वाले 55 वर्षीय पुखराज साहू, जो एक मार्बल आर्ट गैलरी चलाते हैं, उन्होंने फेसबुक पर एक विज्ञापन देखा। इस वीडियो में केंद्रीय वित्त मंत्री के नाम का इस्तेमाल कर दावा किया गया था कि बेरोजगार और आम लोग निवेश कर रोजाना 1 से 2 हजार रुपये आसानी से कमा सकते हैं। जैसे ही पुखराज ने उस लिंक पर अपनी जानकारी दर्ज की, अनीष माथुर नाम के एक शख्स ने उनसे संपर्क किया और खुद को निवेश सलाहकार बताकर जाल बुनना शुरू कर दिया।
किश्तों में ऐंठे लाखों रुपये, शेयर बाजार का दिया हवाला
जालसाजों ने पीड़ित को पूरी तरह अपने विश्वास में ले लिया था। शुरुआत में उनसे 21 हजार रुपये का छोटा निवेश कराया गया। इसके बाद ठगों ने व्हाट्सएप पर क्यूआर कोड भेजकर अलग-अलग किश्तों में 1.50 लाख रुपये ट्रांसफर करवा लिए। जब पीड़ित को मुनाफे की उम्मीद जगी, तो ठगों ने शेयर मार्केट और सोने के चढ़ते दामों का लालच दिया। इसके बाद आरटीजीएस (RTGS) के जरिए 4.50 लाख रुपये और मंगवा लिए गए। इस तरह पीड़ित के खाते से कुल 6 लाख रुपये साफ कर दिए गए।
ऐसे खुला धोखाधड़ी का राज
जब पुखराज साहू ने अपने निवेश किए हुए पैसे और उस पर हुए मुनाफे की मांग की, तो ठगों के सुर बदल गए। उन्होंने पैसे लौटाने के बजाय उन पर और अधिक निवेश करने का दबाव बनाना शुरू कर दिया। जब भी पीड़ित अपनी रकम वापस मांगते, जालसाज कोई नया टैक्स या चार्ज बताकर और रुपयों की मांग करते। बार-बार पैसे मांगे जाने पर पुखराज को संदेह हुआ और उन्हें समझ आ गया कि वे एक बड़े साइबर गिरोह का शिकार हो चुके हैं।
पुलिस और साइबर सेल ने शुरू की जांच
पीड़ित की शिकायत पर टिकरापारा पुलिस ने मामला दर्ज कर लिया है। पुलिस ने उन बैंक खातों और ट्रांजैक्शन हिस्ट्री को खंगालना शुरू कर दिया है, जिनमें पैसे ट्रांसफर किए गए थे। साइबर एक्सपर्ट्स उस फेसबुक लिंक और फर्जी वीडियो की भी पड़ताल कर रहे हैं, जिसका इस्तेमाल इस ठगी में किया गया था। पुलिस का मानना है कि यह किसी संगठित गिरोह का काम हो सकता है जो बड़े नेताओं के डीपफेक या पुराने वीडियो का गलत इस्तेमाल कर लोगों को ठग रहा है।
साइबर एक्सपर्ट्स की सलाह: बरतें ये सावधानी
इस घटना ने एक बार फिर ऑनलाइन सुरक्षा पर सवाल खड़े कर दिए हैं। साइबर एक्सपर्ट्स का कहना है कि किसी भी सोशल मीडिया विज्ञापन पर भरोसा करने से पहले उसकी आधिकारिक पुष्टि जरूर करें। सरकार या कोई भी मंत्री कभी भी इस तरह के निजी निवेश की सलाह सोशल मीडिया के जरिए नहीं देते। किसी भी अनजान व्यक्ति द्वारा भेजे गए क्यूआर कोड को स्कैन न करें और न ही लुभावने वादों के चक्कर में आकर अपनी बैंक डिटेल्स साझा करें।
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