
छत्तीसगढ़ के जशपुर जिले से कानून और जांच प्रक्रिया को हैरान कर देने वाला एक मामला सामने आया है। सिटी कोतवाली क्षेत्र के ग्राम पुरनानगर में करीब दो महीने पहले जिस युवक को पुलिस रिकॉर्ड में मृत घोषित कर दिया गया था, वह अचानक जिंदा अपने गांव लौट आया है। सीमित खाखा नाम का यह युवक झारखंड के हजारीबाग में मजदूरी कर रहा था। इस घटना के बाद पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया है क्योंकि जिस अधजली लाश को सीमित समझकर दफनाया गया था और जिसकी हत्या के आरोप में गिरफ्तारियां हुई थीं, वह कोई और था। अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि आखिर वह लाश किसकी थी।

गड्ढे में मिली थी अधजली लाश और शुरू हुई थी हत्या की जांच
जशपुर पुलिस को 18 अक्टूबर 2025 को सूचना मिली थी कि ग्राम पुरनानगर के तुरीटोंगरी इलाके में एक गड्ढे में किसी का शव पड़ा है। मौके पर पहुंची टीम ने देखा कि शव को बुरी तरह जलाया गया था जिससे पहचान करना नामुमकिन जैसा था। चेहरे और शरीर का बड़ा हिस्सा झुलसा होने के बावजूद पुलिस ने पंचनामा तैयार कर पोस्टमार्टम कराया। रिपोर्ट में साफ हुआ कि युवक की मौत सामान्य नहीं बल्कि हत्या थी। इसके बाद पुलिस ने अज्ञात के खिलाफ हत्या और साक्ष्य छिपाने की धाराओं के तहत मामला दर्ज कर जांच की दिशा आगे बढ़ाई।
परिजनों ने की थी शिनाख्ती और आरोपियों ने कबूला था जुर्म
पहचान के लिए पुलिस ने शव की तस्वीरें आसपास के थानों में भेजीं और गुमशुदा लोगों का डेटा खंगाला। इसी दौरान सिटोंगा निवासी सीमित खाखा के लापता होने की बात सामने आई। कार्यपालिक मजिस्ट्रेट की मौजूदगी में जब शव को सीमित के परिजनों को दिखाया गया, तो उन्होंने उसे अपना बेटा मानकर पहचान कर ली। पुलिस ने फॉरेंसिक एक्सपर्ट की मदद से घटना का दोबारा दृश्य तैयार कराया। हैरानी की बात यह है कि पुलिस ने इस मामले में कुछ संदिग्धों को भी पकड़ा जिन्होंने कोर्ट के सामने अपना जुर्म स्वीकार कर लिया था। यह पूरी कानूनी प्रक्रिया पूरी हो चुकी थी और आरोपी जेल में थे।
झारखंड से लौटते ही उड़े सबके होश और कार्रवाई पर उठे सवाल
हाल ही में जब सीमित खाखा मजदूरी कर झारखंड से अपने घर सिटोंगा वापस पहुंचा, तो उसे जीवित देखकर परिवार और गांव वाले सन्न रह गए। जिस बेटे का वे अंतिम संस्कार कर चुके थे, उसे अपने सामने खड़ा देख गांव में चर्चाओं का बाजार गर्म हो गया। परिजनों ने तुरंत इसकी जानकारी पुलिस को दी। पूछताछ में सीमित ने बताया कि वह पिछले कुछ महीनों से हजारीबाग इलाके में काम कर रहा था और उसे अपने ही ‘मर्डर’ की खबर तक नहीं थी। इस मोड़ ने पुलिस की शिनाख्ती प्रक्रिया और जांच की विश्वसनीयता पर गंभीर सवालिया निशान लगा दिए हैं।
अब असली मृतक की पहचान के लिए विशेष टीम का हुआ गठन
SSP जशपुरने मामले की गंभीरता को देखते हुए अब एक राजपत्रित अधिकारी के नेतृत्व में विशेष जांच दल (SIT) बना दिया है। पुलिस का कहना है कि पिछली कार्रवाई परिस्थितियों और परिजनों द्वारा की गई पहचान के आधार पर की गई थी। अब पुलिस उन लोगों की रिहाई के लिए वैधानिक प्रक्रिया शुरू कर रही है जिन्हें गलत पहचान के चलते जेल भेजा गया था। सबसे बड़ी चुनौती अब उस अधजले शव की असली पहचान करना है जिसे दो महीने पहले गड्ढे से बरामद किया गया था। पुलिस नए सिरे से लापता लोगों की सूची खंगाल रही है।
कानून और फॉरेंसिक साक्ष्यों के बीच उलझा हत्याकांड का सच
हत्या केस के इस अजीबोगरीब मोड़ ने यह साबित कर दिया है कि केवल बयानों और अधूरी पहचान के भरोसे की गई जांच कितनी जोखिम भरी हो सकती है। अब पुलिस डीएनए टेस्ट और अन्य वैज्ञानिक तरीकों का सहारा लेने पर विचार कर रही है ताकि असली मृतक तक पहुंचा जा सके। फिलहाल गांव में पुलिस की गश्त जारी है और सीमित खाखा से विस्तृत पूछताछ की जा रही है ताकि यह पता चल सके कि उसके नाम पर किन लोगों ने साजिश रची थी या यह महज एक मानवीय चूक का नतीजा था। जशपुर का यह मामला पूरे प्रदेश में चर्चा का विषय बना हुआ है।
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