
छत्तीसगढ़ में सहायक शिक्षक भर्ती की रुकी हुई प्रक्रिया को बहाल करने की मांग को लेकर डीएड अभ्यर्थियों का आमरण अनशन तीसरे दिन भी जारी है। रायपुर के माना-तूता धरना स्थल पर डेढ़ सौ से अधिक युवा इस हाड़ कंपाने वाली ठंड में खुले आसमान के नीचे बैठे हैं। अनशन के तीसरे दिन कुछ अभ्यर्थियों की शारीरिक स्थिति बिगड़ने लगी है। जानकारी के अनुसार, तीन प्रदर्शनकारियों का ब्लड प्रेशर (BP) अचानक बढ़ गया और वे कमजोरी की वजह से निढाल हो गए हैं। स्वास्थ्य संबंधी दिक्कतों के बावजूद, आंदोलनकारी अपनी मांगों पर अड़े हुए हैं और उनका कहना है कि जब तक सरकार ठोस कदम नहीं उठाती, वे पीछे नहीं हटेंगे।
रिक्त पदों का गणित: हाईकोर्ट के आदेश के बाद भी प्रक्रिया अटकी
प्रदर्शन कर रहे युवाओं का कहना है कि वे केवल अपने हक की मांग कर रहे हैं। सहायक शिक्षक भर्ती के पांचवें चरण की काउंसलिंग के दौरान 2600 पदों पर प्रक्रिया शुरू हुई थी, लेकिन विडंबना यह रही कि केवल 1299 अभ्यर्थियों को ही नियुक्ति पत्र मिल पाए। आंकड़ों के मुताबिक, 1316 पद उस समय खाली रह गए थे और कुल मिलाकर अभी भी लगभग 2300 पद रिक्त पड़े हैं। इस मामले में हाईकोर्ट ने भी स्पष्ट निर्देश दिए थे कि दो महीने के भीतर इन खाली पदों पर भर्ती की प्रक्रिया पूरी की जाए। इसके बावजूद प्रशासन की ओर से कोई हलचल न होने से अभ्यर्थियों में भारी आक्रोश है।

मंत्री के आश्वासन पर भारी पड़ी प्रशासनिक सुस्ती: दो महीने से नहीं निकला समाधान
अभ्यर्थियों ने बताया कि वे अपनी समस्या लेकर स्कूल शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव के पास भी गए थे। मंत्री ने उनकी मांगों को जायज बताते हुए जल्द समाधान निकालने का भरोसा दिया था। हालांकि, उस आश्वासन को दिए हुए भी दो महीने से अधिक का समय बीत चुका है, लेकिन जमीनी स्तर पर कोई प्रगति नहीं हुई। युवाओं का आरोप है कि सरकार और विभाग की उदासीनता की वजह से वे सड़क पर बैठने को मजबूर हैं। उनका कहना है कि जब तक रिक्त पदों पर जॉइनिंग की प्रक्रिया शुरू नहीं होती, वे तूता के मैदान से नहीं हटेंगे, चाहे उनकी जान पर ही क्यों न बन आए।
प्रदेशभर के युवाओं का जुटान: सरकार पर दबाव बढ़ाने की रणनीति
तूता में चल रहे इस आंदोलन में प्रदेश के अलग-अलग जिलों से आए डीएड डिप्लोमा धारी अभ्यर्थी शामिल हैं। ये सभी युवा योग्यता रखने के बावजूद नौकरी के लिए दर-दर भटक रहे हैं। आंदोलनकारियों ने सरकार को चेतावनी दी है कि कड़ाके की सर्दी में अगर किसी अभ्यर्थी को कुछ होता है, तो इसकी पूरी जिम्मेदारी शासन और प्रशासन की होगी। वे अब सोशल मीडिया और स्थानीय प्रतिनिधियों के जरिए भी अपनी आवाज बुलंद कर रहे हैं ताकि सरकार की कुंभकर्णी नींद टूटे और रिक्त पदों पर पात्र उम्मीदवारों को जल्द से जल्द नियुक्ति मिल सके।



