Electricity Bill Hike: बिजली हाफ योजना बंद के बाद दोगुना-तिगुना बिजली बिल से आमजनता में मचा हाहाकार

कुरुद, 11 सितंबर: Electricity Bill Hike: महंगाई से जूझ रही जनता को राहत देने के बजाय प्रदेश सरकार ने 400 यूनिट तक हाफ बिजली बिल योजना बंद कर बड़ा झटका दिया है। इसका असर इस महीने आए बिजली बिलों में साफ झलक रहा है। उपभोक्ताओं का कहना है कि उनका बिल अचानक दोगुना-तिगुना बढ़ गया है

उपभोक्ता परेशान, गुस्से में लोग

Kurud News: कुरुद के रमेशर साहू, राजेश निर्मलकर, रहीम भाई और बिष्णु साहू का कहना है कि पहले उनका मासिक बिजली बिल 400 से 500 रुपये आता था, लेकिन इस बार 800 से 1500 रुपये तक पहुंच गया है। उनका कहना है कि हाफ बिल योजना से गरीब और मध्यमवर्गीय परिवार बच्चों की शिक्षा, घर और स्वास्थ्य पर खर्च कर पाते थे, लेकिन अब अतिरिक्त बोझ से हालात बिगड़ गए हैं।

किसानों ने जताई नाराजगी

बगदेही के किसान सनत साहू, युवराज, मेघनाथ, ठाकुरराम, तुलसी, मेंघू, ऋषि साहू, उदय ध्रुवंशी, युगल यादव और दीपक साहू ने बिजली बिल हाफ योजना को फिर से लागू करने की मांग की है। उनका कहना है कि मौजूदा सरकार का फैसला गरीब परिवारों के साथ अन्याय है। यदि जल्द सुधार नहीं किया गया तो जनता विरोध प्रदर्शन करने मजबूर होगी।

ग्रामीण इलाकों पर ज्यादा असर

भखारा क्षेत्र के ग्राम जोरातराई के ईश्वरलाल साहू, मोरध्वज, गैंदलाल, रमेश और यशवंत साहू ने बताया कि गर्मी और बढ़ते तापमान के कारण घरों में कुलर-पंखों का उपयोग जरूरी हो गया है, जिससे खपत 100 यूनिट से ज्यादा होती है। पहले भूपेश बघेल सरकार में हर महीने 250 से 300 रुपये बिल आता था, अब यह 630 से 970 रुपये तक पहुंच गया है।

“महंगाई से अधमरे, ऊपर से बिजली का बोझ”

ग्रामवासियों लोचन ध्रुव, गिरधर मारकंडे, अम्बेद और गंगाराम साहू ने कहा कि महंगाई पहले ही कमर तोड़ रही है, अब बिजली का बोझ और बढ़ गया है। अधिकारियों से शिकायत करने पर वे पीएम सूर्य घर योजना का हवाला देते हैं, लेकिन इसका लाभ हर किसी को तुरंत नहीं मिल पा रहा है। ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि सरकार ने अपने फैसले पर पुनर्विचार नहीं किया तो उन्हें सड़क पर उतरकर आंदोलन करना पड़ेगा।

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Ravi Pratap Pandey

रवि पिछले 7 वर्षों से छत्तीसगढ़ में सक्रिय पत्रकार हैं। उन्होंने राज्य के सामाजिक, राजनीतिक और सांस्कृतिक पहलुओं पर गहराई से रिपोर्टिंग की है। जमीनी हकीकत को उजागर करने और आम जनता की आवाज़ को मंच देने के लिए वे लगातार लेखन और रिपोर्टिंग करते रहे हैं।

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