करवा चौथ 2026 में ‘चक्रवात अर्नब’ के कारण न दिखे चांद तो इन 5 आसान उपायों से खोलें करवा चौथ का व्रत, जानें ये खास उपाय

Karva Chauth 2026 Moon Visibility Issue: हिन्दू पंचांग के अनुसार कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि पर मनाए जाने वाले करवा चौथ के व्रत का सुहागिन महिलाओं के जीवन में विशेष महत्व होता है। इस दिन महिलाएं पूरे दिन निर्जला उपवास रखकर शाम को विधि-विधान से करवा माता की पूजा करती हैं। परंपरा के अनुसार रात के समय चंद्रमा को अर्घ्य देने और दर्शन करने के बाद ही यह व्रत पूर्ण माना जाता है। हालांकि चक्रवात अर्णब और खराब मौसम के चलते कई इलाकों में आसमान में घने बादल छाए रहने की आशंका है, जिससे चांद के दीदार में बाधा आ सकती है। यदि आपके शहर में भी मौसम खराब होने के कारण चांद नजर न आए, तो शास्त्रों में बताए गए कुछ विशेष उपायों की मदद से आप अपना व्रत आसानी से खोल सकती हैं।

भगवान शिव के दर्शन करके खोलें व्रत

Karva Chauth Vrat Without Moon: यदि बादलों या बारिश के कारण आपके क्षेत्र में चांद दिखाई न दे, तो आप भगवान शिव की तस्वीर या मंदिर जाकर उनके दर्शन करके अपना व्रत पूरा कर सकती हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार भगवान शिव के मस्तक पर चंद्रमा स्वयं विराजमान रहते हैं। ऐसे में शिवजी के दर्शन करने मात्र से चंद्रमा के दर्शन के समान ही पुण्य और शुभ फल प्राप्त होता है।

चावल से चांद की आकृति बनाकर दें अर्घ्य

Karva Chauth 2026 Upay For Cloudy Sky: खराब मौसम की स्थिति में आप पूजा की थाली या किसी लाल साफ कपड़े पर चावल का ढेर बनाकर उस पर रोली और अक्षत से चंद्रमा की आकृति बना सकती हैं। इस प्रतीकात्मक चांद को ही असली चंद्रमा मानकर विधि-विधान से पूजा करें और जल से अर्घ्य देकर अपना उपवास खोल लें।

पंचांग के अनुसार चंद्रोदय के समय करें अर्घ्य

How To Open Karva Chauth Fast Without Moon: यदि आसमान बादलों से ढका हो और चांद के दर्शन न हों, तो आप अपने शहर के पंचांग या मौसम अपडेट के आधार पर निर्धारित चंद्रोदय के समय का इंतजार करें। तय समय पर चंद्रमा की सामान्य दिशा की तरफ मुख करके प्रार्थना करें, जल अर्पित करें और करवा चौथ की कथा का स्मरण करके व्रत का पारण कर लें।

चांदी के सिक्के और दर्पण का करें प्रयोग

Karva Chauth Moon Timing And Rules: देश के कई हिस्सों में ऐसी परंपरा भी निभाई जाती है कि यदि करवा चौथ की रात चांद नजर न आए, तो एक साफ थाली में चांदी का सिक्का रखकर उसमें जल भर दिया जाता है। इसके बाद दर्पण यानी आईने में उस सिक्के की परछाई या चांद के प्रतीक के दर्शन करके व्रत खोला जाता है।

वीडियो कॉल के जरिए करें चांद के दर्शन

आधुनिक तकनीक का सहारा लेते हुए यदि आपके शहर में मौसम खराब है, तो आप देश के किसी अन्य हिस्से में रहने वाले अपने परिवार के सदस्यों या परिचितों से वीडियो कॉल के जरिए वहां निकले चांद के सीधे दर्शन कर सकती हैं। इसके बाद पूजा संपन्न कर व्रत खोला जा सकता है।

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Ravi Pratap Pandey

रवि पिछले 7 वर्षों से छत्तीसगढ़ में सक्रिय पत्रकार हैं। उन्होंने राज्य के सामाजिक, राजनीतिक और सांस्कृतिक पहलुओं पर गहराई से रिपोर्टिंग की है। जमीनी हकीकत को उजागर करने और आम जनता की आवाज़ को मंच देने के लिए वे लगातार लेखन और रिपोर्टिंग करते रहे हैं।

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