
बलरामपुर छत्तीसगढ़ के बलरामपुर जिले के वाड्रफनगर में राजनीति की नई इबारत लिखी गई है। यहां गोंडवाना गणराज्य पार्टी (जीजीपी) को उस वक्त तगड़ा झटका लगा जब उसके 15 सक्रिय नेताओं और कार्यकर्ताओं ने एक साथ भारतीय जनता पार्टी में प्रवेश कर लिया। यह घटनाक्रम एक स्थानीय पुल के उद्घाटन समारोह के बाद हुआ, जहां बड़ी संख्या में ग्रामीण और कार्यकर्ता जुटे थे। भाजपा विधायक शकुंतला सिंह पोर्ते ने सभी नए सदस्यों को पार्टी का गमछा पहनाकर और तिलक लगाकर आधिकारिक रूप से सदस्यता दिलाई। इस अचानक हुए फेरबदल से क्षेत्र के सियासी गलियारों में खलबली मच गई है और इसे आगामी स्थानीय चुनावों से पहले भाजपा की बड़ी बढ़त के तौर पर देखा जा रहा है।
प्रभावशाली चेहरों की एंट्री से भाजपा मजबूत: विधायक बोलीं- विकास की सोच से जुड़ रहे लोग
भाजपा में शामिल होने वाले इन 15 सदस्यों में क्षेत्र के कई प्रभावशाली नाम और सामाजिक कार्यकर्ता शामिल हैं। इन नेताओं का अपने इलाकों में अच्छा खासा दबदबा माना जाता है, जिसका सीधा फायदा अब भाजपा को मिलने की उम्मीद है। विधायक शकुंतला सिंह पोर्ते ने इस मौके पर कहा कि प्रधानमंत्री मोदी और मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की जनकल्याणकारी नीतियों से प्रभावित होकर लोग लगातार भाजपा से जुड़ रहे हैं। उन्होंने भरोसा जताया कि इन नए सदस्यों के आने से पार्टी को न केवल बूथ स्तर पर मजबूती मिलेगी, बल्कि सरकारी योजनाओं को अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने में भी मदद मिलेगी। नए सदस्यों ने भी पार्टी के प्रति पूरी निष्ठा के साथ काम करने का संकल्प दोहराया है।
जीजीपी के लिए बढ़ी मुश्किलें: वाड्रफनगर में कमजोर हुआ गोंडवाना का आधार
वाड्रफनगर इलाके में गोंडवाना गणराज्य पार्टी का एक अपना खास जनाधार रहा है, लेकिन एक साथ इतने पदाधिकारियों का साथ छोड़ना पार्टी के लिए खतरे की घंटी है। जानकारों का मानना है कि इस घटना के बाद स्थानीय स्तर पर जीजीपी का प्रभाव काफी कम हो सकता है। यह पलायन ऐसे समय में हुआ है जब विपक्षी दल अपनी जमीन बचाने के लिए संघर्ष कर रहे हैं। भाजपा ने इस इलाके में अपनी पकड़ मजबूत करने के लिए काफी समय से घेराबंदी कर रखी थी, जिसमें अब उसे बड़ी कामयाबी मिली है। फिलहाल गोंडवाना गणराज्य पार्टी के स्थानीय नेतृत्व ने इस सामूहिक इस्तीफे पर कोई तीखी प्रतिक्रिया नहीं दी है, लेकिन अंदरूनी तौर पर हड़कंप की स्थिति बनी हुई है।



