
Mahtari Sadan Kurud Assembly Constituency: छत्तीसगढ़ की कुरुद विधानसभा क्षेत्र की महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त और आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक बड़ी सौगात दी गई है. कुरुद के विधायक अजय चंद्राकर की पहल पर क्षेत्र के दो गांवों, ग्राम पंचायत चर्रा और कोड़बोड़ में आधुनिक ‘महतारी सदन’ के निर्माण की प्रशासनिक मंजूरी मिल गई है. छत्तीसगढ़ शासन के पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग ने इस परियोजना के लिए कुल 60 लाख रुपये का बजट स्वीकृत किया है, जिसके तहत दोनों ग्राम पंचायतों में 30-30 लाख रुपये की लागत से भव्य भवनों का निर्माण कराया जाएगा. इस योजना का मुख्य उद्देश्य ग्रामीण अंचल की महिलाओं को एकजुट करना और उन्हें स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसरों से जोड़ना है.
केवल एक भवन नहीं बल्कि ग्रामीण महिलाओं के स्वावलंबन का मुख्य केंद्र बनेगा यह सदन
क्षेत्रीय विधायक अजय चंद्राकर ने इस सौगात को साझा करते हुए कहा कि यह महतारी सदन केवल ईंट-पत्थर का ढांचा या कोई सामान्य सरकारी भवन नहीं होगा, बल्कि यह ग्रामीण क्षेत्र की महिलाओं के आत्मबल और स्वावलंबन का एक मजबूत आधार स्तंभ बनेगा. उन्होंने जोर देकर कहा कि किसी भी क्षेत्र या समाज की तरक्की तभी संभव है जब वहां की महिलाएं आर्थिक रूप से स्वतंत्र और सक्षम हों. कुरुद विधानसभा को समृद्ध बनाने के लिए महिलाओं की भागीदारी को सबसे जरूरी माना जा रहा है, और यह सदन इसी दिशा में मील का पत्थर साबित होगा.
आत्मनिर्भर भारत अभियान के तहत न्यू इंडिया के विकास से जुड़ रही है देश की आधी आबादी
विधायक अजय चंद्राकर ने देश के विकास मॉडल की चर्चा करते हुए कहा कि आज के नए भारत के विकास चक्र (ग्रोथ साइकिल) में महिलाओं की हिस्सेदारी पहले के मुकाबले काफी ज्यादा बढ़ चुकी है. मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आत्मनिर्भर भारत अभियान के तहत देश की आधी आबादी की कार्यक्षमता को सीधे राष्ट्र के आर्थिक विकास से जोड़ा जा रहा है. छत्तीसगढ़ की ग्राम पंचायतों में महतारी सदनों का जाल बिछाने की यह पूरी योजना भी इसी राष्ट्रीय सोच और महिलाओं को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने के प्रयासों का एक मुख्य हिस्सा है.
स्वरोजगार को बढ़ावा देने के लिए परिसर के भीतर ही बनाई जा रही हैं पक्की दुकानें
Gram Panchayat Charra: इस पूरी महत्वाकांक्षी योजना का सबसे बेहतरीन पहलू यह है कि महतारी सदन में काम करने वाली स्थानीय महिलाओं और महिला स्व-सहायता समूहों (SHGs) के लिए आजीविका का पूरा प्रबंध परिसर के अंदर ही किया गया है. महिलाएं अपने पारंपरिक कौशल या हुनर से जो भी उत्पाद या सामग्रियां तैयार करेंगी, उन्हें बेचने के लिए भटकना नहीं पड़ेगा. वे परिसर के अग्रभाग में बनने वाली पक्की दुकानों के माध्यम से अपने सामानों की सीधी बिक्री स्थानीय बाजार और राहगीरों को कर सकेंगी, जिससे उनकी मासिक आय का एक स्थाई जरिया विकसित होगा.

ये सुविधाएं होंगी उपलब्ध…
- दो कमरे व्यावसायिक उपयोग के लिए (ऑफिस या दुकान)।
- 60 वर्ग मीटर का हॉल, जहां महिलाएं काम कर सकें।
- एक किचन और एक स्टोर भी बनाया जाएगा।
- पानी के लिए ट्यूबवेल के साथ वॉटर हार्वेस्टिंग।
- महिलाओं की सुरक्षा को ध्यान में रखकर बाउंड्री वॉल।



