
Mobile Recharge Price Hike: भारतीय मोबाइल उपभोक्ताओं को आने वाले दिनों में मोबाइल रीचार्ज के लिए अपनी जेब ज्यादा ढीली करनी पड़ सकती है। देश की प्रमुख टेलीकॉम कंपनियां एक बार फिर अपने प्रीपेड और पोस्टपेड प्लान्स की कीमतें बढ़ाने की तैयारी कर रही हैं। सेंट्रम इंस्टीट्यूशनल रिसर्च की हालिया रिपोर्ट के अनुसार, अगले तीन से चार महीनों के भीतर मोबाइल रीचार्ज प्लान्स की दरों में बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है। इस फैसले का सीधा असर देश के करोड़ों मोबाइल यूजर्स के मासिक बजट पर पड़ने वाला है।
15 फीसदी तक बढ़ सकते हैं दाम
Telecom Tariff Hike Alert: मार्केट रिसर्च रिपोर्ट के मुताबिक टेलीकॉम कंपनियां अपने मौजूदा प्लान्स की कीमतों में 12 से 15 प्रतिशत तक का इजाफा कर सकती हैं। अगर यह बढ़ोतरी लागू होती है तो सामान्य से लेकर लंबी वैधता वाले सभी प्लान महंगे हो जाएंगे। कंपनियों का मानना है कि बदलती आर्थिक परिस्थितियों और नेटवर्क संचालन की बढ़ती लागत के कारण दरों में यह बदलाव अब जरूरी हो गया है। इसके संकेत कंपनियों द्वारा पहले भी दिए जाते रहे हैं।
जेब पर कितना बढ़ेगा सीधा बोझ
प्लान्स की कीमतें बढ़ने के बाद उपभोक्ताओं के खर्च का गणित पूरी तरह बदल जाएगा। उदाहरण के तौर पर जो शुरुआती प्लान अभी 199 रुपये में मिलता है, उसकी कीमत बढ़कर लगभग 229 रुपये हो जाएगी। इसी तरह मध्यम वर्ग में सबसे ज्यादा लोकप्रिय 299 रुपये वाला प्लान महंगा होकर 344 रुपये से 359 रुपये के बीच पहुंच सकता है। लंबी वैधता यानी तीन महीने या उससे अधिक वाले 999 रुपये के प्लान के लिए उपभोक्ताओं को करीब 1,149 रुपये तक चुकाने पड़ सकते हैं।
5G नेटवर्क विस्तार पर भारी खर्च
दरों में इस संभावित बढ़ोतरी के पीछे सबसे बड़ी वजह देश भर में चल रहा 5G नेटवर्क का विस्तार है। रिलायंस जियो और भारती एयरटेल जैसी दिग्गज कंपनियां पूरे भारत में अपने हाई स्पीड 5G इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने के लिए लगातार भारी निवेश कर रही हैं। नए टावर लगाने, स्पेक्ट्रम की लागत और तकनीकी अपग्रेडेशन में कंपनियों का काफी पैसा खर्च हो रहा है। इसी भारी भरकम खर्च की भरपाई करने के लिए कंपनियां अब उपभोक्ताओं से ज्यादा शुल्क वसूलने की रणनीति बना रही हैं।
प्रति ग्राहक कमाई बढ़ाने का लक्ष्य
कीमतें बढ़ाने का एक मुख्य उद्देश्य कंपनियों के एआरपीयू (Average Revenue Per User) यानी प्रति उपभोक्ता औसत राजस्व में सुधार करना भी है। सीधे शब्दों में कहें तो इसका मतलब यह है कि कंपनी अपने नेटवर्क पर मौजूद हर एक एक्टिव यूजर से औसतन कितनी कमाई करती है। टेलीकॉम कंपनियों के बेहतर वित्तीय स्वास्थ्य और शेयर बाजार में उनकी स्थिति मजबूत बनाए रखने के लिए इस आंकड़े का बढ़ना बेहद जरूरी माना जाता है। कंपनियां काफी समय से इस आंकड़े को ऊपर ले जाने का प्रयास कर रही हैं।
बाजार में कम मुकाबले का फायदा
भारतीय टेलीकॉम सेक्टर में इस समय प्रतिस्पर्धा पहले के मुकाबले काफी कम हो गई है। बाजार में मुख्य रूप से रिलायंस जियो और भारती एयरटेल का ही दबदबा है, जबकि वोडाफोन आइडिया अभी अपने 5G नेटवर्क को तेजी से फैलाने के संघर्ष दौर से गुजर रहा है। बाजार में मजबूत विकल्प कम होने की वजह से कंपनियों के लिए प्लान्स की कीमतें बढ़ाना और उसे बाजार में लागू करना काफी आसान हो गया है क्योंकि उपभोक्ताओं के पास नेटवर्क बदलने के ज्यादा रास्ते नहीं बचे हैं।
लगातार बढ़ रही है यूजर्स की संख्या
तमाम तरह की चर्चाओं और महंगे होते प्लान्स के बीच बड़ी टेलीकॉम कंपनियों के यूजर बेस में लगातार बढ़ोतरी दर्ज की जा रही है। रिपोर्ट के अनुमानों के मुताबिक आगामी तिमाहियों में रिलायंस जियो के साथ हर महीने औसतन 70 लाख नए ग्राहक जुड़ सकते हैं। वहीं दूसरी तरफ भारती एयरटेल भी हर तिमाही में करीब 50 लाख नए उपभोक्ता अपने नेटवर्क से जोड़ने में कामयाब रह सकती है। डिजिटल सेवाओं पर बढ़ती निर्भरता के कारण लोग महंगे रीचार्ज के बाद भी सिम कार्ड चालू रखने को मजबूर हैं।



