
छत्तीसगढ़ के बिलासपुर जिले से एक चौंकाने वाली घटना सामने आई है, जहां पर्यटन विभाग के एक रिसॉर्ट में कथित तौर पर हिरण का मांस पकाया जा रहा था। मामला कोटा क्षेत्र का है, जहां सरकारी संरक्षण में चलने वाले कुरदर वैली रिसॉर्ट में वन्यजीव संरक्षण कानून की धज्जियां उड़ाई जा रही थीं। वन विभाग की टीम ने गुप्त सूचना के आधार पर शाम के वक्त अचानक दबिश दी और मौके से भारी मात्रा में संदिग्ध मांस बरामद किया। इस कार्रवाई के बाद पर्यटन विभाग में हड़कंप मच गया है और विभाग की छवि पर भी सवाल उठने लगे हैं।
अचानक हुई छापेमारी: चूल्हे पर चढ़ी कढ़ाई और संदिग्ध मांस बरामद
वन विभाग को खबर मिली थी कि शहर से दूर स्थित कुरदर वैली रिसॉर्ट में कुछ अवैध पक रहा है। शाम करीब 6 बजे जब टीम मौके पर पहुंची, तो नजारा देख अधिकारी भी दंग रह गए। किचन के बाहर चूल्हे पर मांस पकाया जा रहा था। टीम ने तुरंत कार्रवाई करते हुए पक रहे मांस, कढ़ाई और खाना बनाने के अन्य बर्तनों को अपने कब्जे में ले लिया। मौके पर मौजूद कर्मचारियों में अफरा-तफरी मच गई, लेकिन घेराबंदी कर विभाग ने चार लोगों को हिरासत में ले लिया और पूछताछ के लिए बेलगहना रेस्ट हाउस ले गई।

मैनेजर और रसोइया समेत 4 गिरफ्तार: रसोइए ने खोला राज
देर रात तक चली पूछताछ के बाद वन विभाग ने रिसॉर्ट मैनेजर रजनीश सिंह, कर्मचारी रमेश यादव, संजय वर्मा और रसोइया रामकुमार टोप्पो को गिरफ्तार कर लिया। शुरुआती जांच में मैनेजर और कर्मचारियों ने खुद को बेकसूर बताते हुए सारा दोष रसोइए पर मढ़ने की कोशिश की। हालांकि, रसोइए रामकुमार ने बताया कि उसे गांव के ही एक व्यक्ति ने मांस लाकर दिया था और पकाने को कहा था। वन विभाग ने इन सभी के खिलाफ वन्यजीव संरक्षण अधिनियम की कड़ी धाराओं के तहत मामला दर्ज किया है।
मुख्य आरोपी की तलाश: ‘जनक बैगा’ ने लाकर दिया था मांस
पूछताछ में रसोइए ने बताया कि कुरदर गांव का रहने वाला जनक बैगा सुबह पत्तों में लपेटकर मांस लाया था। उसने ही रिसॉर्ट के कर्मचारियों को यह मांस दिया था। फिलहाल जनक बैगा फरार है और वन विभाग की टीम उसकी तलाश में कुरदर और आसपास के जंगलों में लगातार छापेमारी कर रही है। अधिकारियों का मानना है कि मुख्य आरोपी की गिरफ्तारी के बाद ही यह पता चल पाएगा कि शिकार कहां और कैसे किया गया था और इसमें क्या कोई बड़ा गिरोह शामिल है।
जांच के लिए जबलपुर भेजी जाएगी रिपोर्ट: फॉरेंसिक लैब से होगा खुलासा
जब्त किया गया मांस वाकई हिरण का है या किसी अन्य जंगली जानवर का, इसकी पुष्टि के लिए सैंपल को फॉरेंसिक जांच हेतु जबलपुर लैब भेजा जा रहा है। अधिकारियों का कहना है कि लैब की रिपोर्ट आने के बाद ही केस को और मजबूती मिलेगी। वन विभाग इस बात की भी जांच कर रहा है कि क्या इससे पहले भी रिसॉर्ट में इस तरह के ‘खास’ पकवान परोसे जाते थे। पर्यटन विभाग के रिसॉर्ट में इस तरह की गतिविधि का होना सुरक्षा और प्रबंधन की बड़ी चूक मानी जा रही है।
पर्यटन विभाग पर उठे सवाल: सरकारी रिसॉर्ट में कैसे पहुंचा शिकार?
कुरदर वैली रिसॉर्ट पर्यटन विभाग के अधीन आता है और यहां करीब 10 कर्मचारी तैनात हैं। सरकारी परिसर के भीतर वन्यजीव का मांस पकना यह दर्शाता है कि वहां नियमों का पालन किस तरह किया जा रहा था। स्थानीय लोगों और वन्यजीव प्रेमियों ने इस घटना पर कड़ी नाराजगी जताई है। वन विभाग के आला अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि वन्यजीवों के शिकार और उनके मांस के सेवन के मामले में कोई भी ढिलाई नहीं बरती जाएगी और फरार आरोपी को जल्द ही सलाखों के पीछे भेजा जाएगा।
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