
Nakti Village MLA Colony Bulldozer Action: छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर के माना एयरपोर्ट के पास बसे नकटी गांव में प्रशासन ने बड़े स्तर पर अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई शुरू कर दी है. गांव खाली करने के लिए दी गई 48 घंटे की समय सीमा समाप्त होते ही प्रशासनिक अमला भारी पुलिस बल और मशीनों के साथ मौके पर पहुंच गया. इस कार्रवाई के कारण सुबह से ही पूरे गांव में भारी तनाव का माहौल बना हुआ है. स्थानीय ग्रामीण इस बेदखली का कड़ा विरोध कर रहे हैं लेकिन प्रशासन ने सुरक्षा घेरा मजबूत कर अपनी कार्रवाई को जारी रखा है. इस मुहिम से करीब 1600 की आबादी वाले इस गांव के 85 मकानों को जमींदोज करने की प्रक्रिया शुरू हो गई है.

गांव में तैनात किए गए 4000 पुलिस जवान और मंगाए गए 14 भारी बुलडोजर
प्रशासन ने इस विवादित जमीन को खाली कराने के लिए सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए हैं. कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए मौके पर करीब 4000 पुलिस जवानों की तैनाती की गई है. इसके साथ ही बाधाओं को हटाने के लिए 14 बुलडोजर, 250 कोटवार और लगभग 300 टीम प्रहरियों को इस अभियान में लगाया गया है. किसी भी तरह के हिंसक विरोध या अप्रिय स्थिति से निपटने के लिए गांव को चारों तरफ से छावनी में तब्दील कर दिया गया है. राजस्व और पुलिस विभाग के आला अधिकारी खुद मौके पर डटे हुए हैं.

प्रस्तावित विधायक निवास परियोजना के लिए खाली कराई जा रही है सरकारी जमीन
जिला प्रशासन के अधिकारियों का कहना है कि नकटी गांव की जिस 40 एकड़ भूमि पर यह कार्रवाई की जा रही है, वह पूरी तरह से सरकारी राजस्व रिकॉर्ड में दर्ज है. इस जगह पर शासन की ओर से स्वीकृत वीआईपी आवासीय परिसर यानी विधायक निवास परियोजना का निर्माण प्रस्तावित है. अधिकारियों का दावा है कि नियमानुसार सभी परिवारों को पहले ही तीन बार नोटिस दिए जा चुके हैं और तय समय सीमा पूरी होने के बाद ही यह कदम उठाया गया है. सरकारी काम के लिए इस जमीन को मुक्त कराना बेहद जरूरी था.
पुश्तैनी जमीन का दावा कर ग्रामीणों ने जताई कड़ी नाराजगी और किया भारी विरोध
दूसरी तरफ बेघर हो रहे ग्रामीणों का आक्रोश फूट पड़ा है. प्रभावित परिवारों का कहना है कि वे इस जमीन पर अपने पूर्वजों के समय से काबिज हैं और पीढ़ियों से यहीं रहते आ रहे हैं. ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि प्रशासन ने उनकी दलीलों और दस्तावेजों को सुने बिना ही एकतरफा कार्रवाई शुरू कर दी है. महिलाओं और बुजुर्गों ने बुलडोजरों के सामने खड़े होकर विरोध दर्ज कराया और अपनी गृहस्थी बचाने की गुहार लगाई लेकिन पुलिस बल ने उन्हें पीछे खदेड़ दिया.

पहले सरकारी योजना से दिए पक्के मकान और अब उन्हीं आशियानों को उजाड़ने पर उठे सवाल
कार्रवाई के बीच ग्रामीणों ने एक बड़ा विरोधाभास उजागर किया है. लोगों का कहना है कि जिन मकानों को आज ढहाया जा रहा है, उनमें से कई घर कुछ साल पहले ही शासन की प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत स्वीकृत हुए थे. कई गरीब परिवारों ने बैंक से कर्ज लेकर और अपनी जमा पूंजी लगाकर इन सरकारी मकानों को तैयार किया था. ग्रामीणों का सवाल है कि एक तरफ सरकार ने खुद उन्हें पक्का मकान बनाने के लिए पैसे दिए और अब दूसरी तरफ उन्हीं के दिए घरों को अवैध बताकर तोड़ा जा रहा है.

नया रायपुर के सेक्टर-30 में प्रभावित परिवारों के लिए की जा रही है पुनर्वास की व्यवस्था
इस भारी विरोध के बीच जिला प्रशासन ने दावा किया है कि नकटी के 75 प्रभावित परिवारों के पुनर्वास के लिए ठोस कदम उठाए जा रहे हैं. प्रशासनिक अधिकारियों के मुताबिक सभी बेघर हो रहे परिवारों को नया रायपुर के सेक्टर-30 में स्थित ईडब्ल्यूएस (आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग) फ्लैटों में अस्थायी और स्थायी रूप से बसाने का इंतजाम किया जा रहा है. इन आवासों के आवंटन की कागजी प्रक्रिया भी शुरू कर दी गई है ताकि कोई भी परिवार खुले आसमान के नीचे रहने को मजबूर न हो.
सांसद बृजमोहन अग्रवाल के आश्वासन के बाद भी शुरू हुई तोड़फोड़ से ग्रामीण असमंजस में
तीन दिन पहले ही नकटी गांव के एक प्रतिनिधिमंडल ने रायपुर के सांसद बृजमोहन अग्रवाल से मुलाकात कर अपनी व्यथा सुनाई थी. उस समय सांसद ने ग्रामीणों को भरोसा दिलाया था कि बिना किसी ठोस पुनर्वास योजना या रहने के वैकल्पिक इंतजाम के उनके घरों को नहीं उजाड़ा जाएगा. उन्होंने जरूरत पड़ने पर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय से भी इस विषय पर बात करने का वादा किया था. इसके बावजूद अचानक शुरू हुई इस बड़ी कार्रवाई से ग्रामीण अब खुद को ठगा हुआ महसूस कर रहे हैं.
विकास और विस्थापन की इस जंग में सैकड़ों जिंदगियों के भविष्य पर लगा प्रश्नचिह्न
नकटी गांव में हो रही इस कार्रवाई ने एक बार फिर विकास की योजनाओं और उसके कारण होने वाले विस्थापन के पुराने दर्द को हरा कर दिया है. एक तरफ जहां सरकार जनप्रतिनिधियों के लिए एक आधुनिक विधायक कॉलोनी का निर्माण करने पर अड़ी है, वहीं दूसरी तरफ सैकड़ों गरीब लोग अपने आशियाने और रोजगार को बचाने की आखिरी लड़ाई लड़ रहे हैं. फिलहाल भारी सुरक्षा व्यवस्था के बीच गांव में तोड़फोड़ की कार्रवाई लगातार आगे बढ़ रही है.



