Nark Chaturdashi 2026: नरक चतुर्दशी की की रात जला दें ये 5 चीजें, शत्रुओं और नकारात्मकता से मिलेगा छुटकारा

Nark Chaturdashi 2026 Upay: दीपावली के पांच दिवसीय पावन पर्व के दूसरे दिन नरक चतुर्दशी का विशेष महत्व माना गया है। इसे छोटी दिवाली और रूप चतुर्दशी के नाम से भी जाना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन भगवान श्रीकृष्ण ने अत्याचारी नरकासुर का वध कर १६ हजार से अधिक कन्याओं को उसकी कैद से मुक्त कराया था। इस दिन यमराज के निमित्त दीपदान करने और घर के कोने-कोने की शुद्धि करने की परंपरा है। पंचांग के अनुसार कार्तिक कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि पर विधि-विधान से पूजा करने से घर में सुख-समृद्धि बनी रहती है और सभी प्रकार के कष्टों से मुक्ति मिलती है।

छोटी दिवाली की रात इन पांच सामग्रियों से तैयार करें मिश्रण

Choti Diwali Dhuni Totke: छोटी दिवाली या नरक चतुर्दशी की रात घर से नकारात्मक ऊर्जा को दूर भगाने के लिए विशेष उपाय किए जाते हैं। इस पारंपरिक प्रयोग के लिए पांच मुख्य सामग्रियों का उपयोग किया जाता है, जिसमें काली राई, पीली सरसों, खड़ा नमक, काले तिल और कपूर शामिल हैं। ज्योतिष और लोक मान्यताओं के अनुसार इन पांचों चीजों का अपना अलग धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व होता है, जो घर के वातावरण को शुद्ध करने में मदद करता है।

घर के मुख्य द्वार से लेकर सभी कमरों में दें हवन जैसी धूनी

Nark Chaturdashi Puja Vidhi: इस विशेष उपाय को करने के लिए किसी मिट्टी या लोहे के बर्तन में काली राई, पीली सरसों, खड़ा नमक और काले तिल की थोड़ी-थोड़ी मात्रा मिला लें। इसके बाद इसमें कपूर जलाकर धूनी तैयार करें। घर के मुख्य द्वार से इस प्रक्रिया की शुरुआत करते हुए इसे रसोई, पूजा घर और बाकी कमरों में घुमाएं। पारंपरिक मान्यताओं के अनुसार इस तरह धूनी देने से घर में मौजूद बुरी नजर, नकारात्मक प्रभाव और शत्रु बाधाओं से राहत मिलती है।

जानिए इन पांच औषधीय और पारंपरिक सामग्रियों का विशेष महत्व

  1. काली राई: पारंपरिक प्रयोगों में काली राई का उपयोग नजर दोष और नकारात्मक प्रभावों से बचाव के लिए किया जाता है।

2. पीली सरसों: घर की शुद्धि और जीवन में आने वाली बाधाओं से मुक्ति पाने के लिए धार्मिक कार्यों में इसका उपयोग होता है।

3. खड़ा नमक: नमक को नकारात्मक ऊर्जा को खींचने वाला और शुद्धता का प्रतीक मानकर इस प्रयोग में शामिल किया जाता है।

4. काले तिल: काले तिल का सीधा संबंध शनिदेव और पितरों से माना जाता है, जो ऊर्जा संतुलन में सहायक हैं।

5. कपूर: पूजा-पाठ और आरती के दौरान कपूर जलाने से आसपास का वातावरण पवित्र और सकारात्मक बनता है।

धूनी देते समय बरखा रखें विशेष सावधानी और सुरक्षा के नियम

Kali Rai Pili Sarso Upay Diwali: यह पारंपरिक प्रयोग परिवार के सदस्यों के अच्छे स्वास्थ्य, मानसिक शांति और खुशहाली की कामना के लिए किया जाता है। हालांकि धूनी देते समय इस बात का विशेष ध्यान रखना चाहिए कि आग से किसी प्रकार की दुर्घटना न हो। बंद कमरे में बहुत अधिक धुआं करने से बचें ताकि सांस लेने में किसी को परेशानी न हो। सावधानी के साथ की गई यह पूजा घर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार करती है।

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Ravi Pratap Pandey

रवि पिछले 7 वर्षों से छत्तीसगढ़ में सक्रिय पत्रकार हैं। उन्होंने राज्य के सामाजिक, राजनीतिक और सांस्कृतिक पहलुओं पर गहराई से रिपोर्टिंग की है। जमीनी हकीकत को उजागर करने और आम जनता की आवाज़ को मंच देने के लिए वे लगातार लेखन और रिपोर्टिंग करते रहे हैं।

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