
छत्तीसगढ़ के धमतरी जिले के नारी गाँव के सहायक शिक्षक ढालू राम साहू को अंततः व्हाट्सएप स्टेटस पर पोस्ट साझा करने के कारण दिए गए निलंबन से बहाल कर दिया गया है। साहू ने राज्योत्सव के दौरान शिक्षा विभाग की खामियों को उजागर करते हुए एक पोस्ट साझा की थी, जिसके बाद उन्हें निलंबित कर दिया गया था। उनके निलंबन को लेकर पूरे प्रदेश के शिक्षकों में आक्रोश था और शिक्षक फेडरेशन ने सड़क पर उतरने की चेतावनी जारी की थी।
निलंबन वापसी के साथ DEO की कड़ी चेतावनी
शिक्षक ढालू राम साहू का निलंबन आदेश जिला शिक्षा अधिकारी (डीईओ) द्वारा वापस ले लिया गया है। हालांकि, बहाली के साथ ही उन्हें कड़ी चेतावनी भी दी गई है। डीईओ ने साहू को भविष्य में इस तरह के कृत्य की पुनरावृत्ति न करने और छत्तीसगढ़ सिविल सेवा नियमों के प्रतिकूल कोई भी टिप्पणी नहीं करने का स्पष्ट निर्देश दिया है। यह आदेश फेडरेशन के मजबूत दबाव और शिक्षकों की एकता के बाद 13 नवंबर को जारी किया गया।
राज्योत्सव पर सवाल उठाकर किया था नियमों का उल्लंघन
शिक्षक ढालू राम साहू ने अपने व्हाट्सएप स्टेटस पर एक पोस्ट साझा की थी जिसमें उन्होंने स्कूलों में पुस्तकों की कमी और शैक्षणिक अव्यवस्था का जिक्र किया था। उन्होंने लिखा था कि जब तक स्कूलों में किताबें नहीं दी जातीं, तब तक डीईओ से लेकर कलेक्टर और मंत्री तक का वेतन काटा जाना चाहिए। जिला शिक्षा विभाग ने इस स्टेटस को सरकारी सेवक के आचरण नियमों का उल्लंघन और अनुशासनहीनता मानते हुए उन्हें तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया था।
शिक्षक फेडरेशन और विपक्षी दलों ने किया था कड़ा विरोध
शिक्षक ढालू राम साहू पर हुई इस कार्रवाई को शिक्षक फेडरेशन की जिला और प्रांतीय इकाइयों ने अनुचित बताया था। उन्होंने तर्क दिया था कि शिक्षक ने केवल व्यवस्था की वास्तविकता पर प्रश्न उठाया था, जिसे अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के दायरे में देखा जाना चाहिए। संगठन ने उग्र आंदोलन की चेतावनी दी थी, जिसका विपक्षी राजनीतिक दलों ने भी समर्थन किया। इसी राजनीतिक और संगठनात्मक दबाव के चलते प्रशासन को पीछे हटना पड़ा।
फेडरेशन का आभार, इसे बताया एकता की जीत
शुक्रवार को डीईओ कार्यालय ने ढालू राम साहू को बुलाकर बहाली आदेश सौंपा और उन्हें पुनः नवीन प्राथमिक शाला नारी में पदस्थ करने का निर्णय सुनाया। आदेश प्राप्त होते ही साहू ने संघर्ष में साथ देने के लिए फेडरेशन के प्रति आभार व्यक्त किया। शिक्षक फेडरेशन ने इस बहाली को सत्य और एकता की जीत करार दिया है। संगठन ने कहा है कि वे शिक्षा व्यवस्था में सुधार और शिक्षक हितों की रक्षा के लिए भविष्य में भी दृढ़ता के साथ आवाज उठाते रहेंगे।
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