
छत्तीसगढ़ में राज्य प्रशासनिक सेवा की निलंबित अधिकारी सौम्या चौरसिया की मुश्किलें एक बार फिर बढ़ गई हैं। प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने उन्हें शराब घोटाला मामले में पूछताछ के लिए तलब किया था। लंबी पूछताछ के बाद ईडी की टीम ने आज उन्हें गिरफ्तार कर लिया है। सौम्या चौरसिया को कल सुबह ईडी की विशेष कोर्ट में पेश किया जाएगा। उल्लेखनीय है कि सौम्या चौरसिया पहले से ही कोयला घोटाला मामले की मुख्य आरोपियों में शामिल रही हैं। इससे पहले मई महीने में सुप्रीम कोर्ट की शर्तों पर उन्हें रिहा किया गया था, जिसमें राज्य से बाहर रहने का निर्देश भी शामिल था।
2165 करोड़ के घोटाले में ऐसे लगा सरकारी खजाने को चूना
शराब घोटाला छत्तीसगढ़ में कांग्रेस सरकार के दौरान वर्ष 2019 से 2023 के बीच हुआ था। इस घोटाले में आरोप है कि शराब नीति को बदलकर चहेते सप्लायरों के माध्यम से अनियमितताएं की गईं। लाइसेंस की शर्तें इस तरह से रखी गईं कि काम केवल विशेष कंपनियों को ही मिले। इन कंपनियों ने नोएडा की एक कंपनी से नकली होलोग्राम और सील बनवाकर उससे शराब की बोतलें सरकारी दुकानों के माध्यम से बिक्री करवाई। नकली होलोग्राम होने के कारण बिक्री की जानकारी शासन को नहीं मिलती थी और बिना एक्साइज टैक्स दिए शराब बेची जाती रही।
नेताओं-अधिकारियों तक बंटी रकम
जांच एजेंसी के मुताबिक इस पूरे षडयंत्र के कारण छत्तीसगढ़ शासन को कुल ₹2165 करोड़ रुपये के टैक्स का भारी नुकसान हुआ था। ईडी का आरोप है कि यह रकम कांग्रेस भवन बनवाने से लेकर नेताओं, अधिकारियों और मंत्रियों तक बांटी गई थी। यह मामला राज्य के सबसे बड़े वित्तीय घोटालों में से एक है, जिसमें शासन के राजस्व को सीधा नुकसान पहुंचाया गया और पूरी प्रणाली को भेदकर अवैध बिक्री की गई।
कवासी लखमा, अनिल टुटेजा समेत कई बड़े नाम हुए हैं गिरफ्तार
शराब घोटाला मामले में ईडी ने अब तक कई हाई-प्रोफाइल लोगों को गिरफ्तार किया है। जिन प्रमुख आरोपियों की गिरफ्तारी हो चुकी है, उनमें पूर्व आबकारी मंत्री कवासी लखमा, पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के बेटे चैतन्य बघेल, पूर्व आईएएस अनिल टुटेजा और एजाज ढेबर के भाई अनवर ढेबर शामिल हैं। इसके अलावा, आबकारी विभाग के 28 अधिकारी भी आरोपी बनाए गए थे, जिन्हें फिलहाल सुप्रीम कोर्ट से जमानत मिल गई है।
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