
Raigarh BJP Resignation Break: छत्तीसगढ़ के रायगढ़ जिले की स्थानीय राजनीति में भारतीय जनता पार्टी को एक बड़ा झटका लगा है। पुसौर नगर पंचायत के 8 भाजपा पार्षदों ने पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से सामूहिक रूप से इस्तीफा दे दिया है। इन सभी जनप्रतिनिधियों ने अपना संयुक्त त्यागपत्र रायगढ़ जिला भाजपा अध्यक्ष अरुणधर दीवान को सौंपकर इसे तत्काल स्वीकार करने का अनुरोध किया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिन पर शुरू हुए पार्टी के सेवा पखवाड़े के बीच हुए इस सामूहिक इस्तीफे से स्थानीय संगठन और प्रशासनिक गलियारों में हड़कंप मच गया है।
नगर पंचायत अध्यक्ष और अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर उठाए सवाल
Pusaur Nagar Panchayat Controversy: पार्टी छोड़ने वाले पार्षदों ने अपने इस्तीफे में नगर पंचायत के प्रशासनिक तंत्र और नगर पंचायत अध्यक्ष के कामकाज पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। पार्षदों का आरोप है कि नगर पंचायत के शासकीय कर्मचारियों और अध्यक्ष के रवैये से उन्हें मानसिक परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। लगातार शिकायतों के बाद भी प्रशासनिक सुस्ती बनी हुई है, जिससे पूरे नगर पंचायत क्षेत्र में विकास का काम पूरी तरह से ठप पड़ा हुआ है।
बुनियादी सुविधाओं की किल्लत और पार्षद निधि रोकने का आरोप
Raigarh Politics Breaking: सामूहिक त्यागपत्र सौंपने वाले पार्षदों का कहना है कि उनके वार्डों में पानी, बिजली, सड़क और नाली जैसी मूलभूत नागरिक सुविधाएं तक उपलब्ध नहीं हो पा रही हैं। जनसमस्याओं को लेकर बार-बार ध्यान आकर्षित कराने के बावजूद स्थिति में सुधार नहीं हुआ। इसके अलावा पार्षदों ने यह गंभीर आरोप भी लगाया है कि उनकी पार्षद निधि से स्वीकृत होने वाले विकास कार्यों को भी रोका जा रहा है, जिससे वे अपने-अपने वार्ड के नागरिकों के सामने जवाब देने की स्थिति में नहीं हैं।
इस्तीफा सौंपने वाले प्रमुख पार्षदों और उपाध्यक्ष के नाम
Pusaur News: भाजपा की प्राथमिक सदस्यता त्यागने वालों में पुसौर नगर पंचायत के उपाध्यक्ष और प्रमुख वार्डों के प्रतिनिधि शामिल हैं। सामूहिक पत्र में हस्ताक्षर करने वाले जनप्रतिनिधियों में नगर पंचायत उपाध्यक्ष उमेश साव, वार्ड 1 से प्रदीप यादव, वार्ड 2 से फागूलाल प्रधान, वार्ड 3 से मंजू पटेल, वार्ड 6 से बलराम, वार्ड 7 से वरुण महाणा, वार्ड 11 से रूपेश कुमार साव और वार्ड 14 से शौकीलाल चौहान का नाम शामिल है।
बार-बार गुहार लगाने के बाद भी नहीं हुई सुनवाई
पार्षदों ने अपनी व्यथा व्यक्त करते हुए कहा कि वे लंबे समय से इन प्रशासनिक और राजनीतिक समस्याओं को लेकर पार्टी के वरिष्ठ पदाधिकारियों को अवगत करा रहे थे। इसके बावजूद जब नगर पंचायत के कामकाज में कोई सुधार नहीं हुआ और विकास कार्य पूरी तरह शून्य हो गए, तो उनके पास इस्तीफा देने के अलावा कोई अन्य रास्ता नहीं बचा।
स्थानीय राजनीति में हलचल, संगठन की प्रतिक्रिया का इंतजार
8 पार्षदों के एक साथ इस्तीफा देने से पुसौर नगर पंचायत के सियासी समीकरण बिगड़ गए हैं। इस घटनाक्रम के बाद स्थानीय निकाय के सत्ता संतुलन पर भी असर पड़ने की संभावना जताई जा रही है। फिलहाल इस मामले में भाजपा जिला संगठन की ओर से कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। देखना होगा कि संगठन रूठे हुए पार्षदों को मनाने की कोशिश करता है या उनके इस्तीफे को स्वीकार कर नई रणनीति बनाता है।



