
Raipur Jain Monk Memory: अगर किसी ब्लैकबोर्ड पर एक से लेकर एक हजार तक शब्द लिख दिए जाएं, तो किसी आम इंसान के लिए उन्हें क्रम से याद रखना नामुमकिन सा लगता है। यदि कोई आपसे अचानक पूछ बैठे कि 450वें नंबर पर कौन सा शब्द लिखा है, तो पन्ने पलटने में भी अच्छा खासा समय लग जाएगा। लेकिन 14 साल के बालमुनि हंसभद्रमुनि के लिए यह बेहद आसान काम है। दावा है कि वे किसी भी शब्द को केवल एक बार सुनकर उसका सटीक नंबर और नंबर सुनकर वह शब्द तुरंत बता देते हैं। छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में आयोजित होने वाले एक विशेष तीन दिवसीय कार्यक्रम में आगामी 17 जून को वे अपनी इसी हैरान कर देने वाली दिमागी क्षमता का सजीव प्रदर्शन करने जा रहे हैं।
भगवान महावीर के दौर की प्राचीन विधा का चेहरा
बालमुनि हंसभद्रमुनि की यह अनोखी प्रतिभा असल में जैन धर्म की सदियों पुरानी ज्ञान परंपरा का हिस्सा है। उनके गुरु विनयकुशल मुनि ने बताया कि भगवान महावीर स्वामी के मोक्ष जाने के करीब 890 साल बाद तक जैन शास्त्रों को कागजों पर नहीं लिखा गया था। उस दौर में पूरा ज्ञान केवल सुनकर याद रखा जाता था और इसी माध्यम से पीढ़ी-दर-पीढ़ी आगे बढ़ता था, जिसे शास्त्रों में ‘श्रुत ज्ञान’ कहा गया है। बालमुनि इसी 1700 साल पुरानी गौरवशाली भारतीय परंपरा के आधुनिक प्रतिनिधि बनकर उभरे हैं। वे खुद इसे कोई जादू या शॉर्टकट ट्रिक नहीं मानते, बल्कि गुरु की कृपा और एकाग्रता का परिणाम बताते हैं।
सिर्फ एलकेजी तक की पढ़ाई और फिर वैराग्य का रास्ता
राजस्थान के जोधपुर में जन्मे हंसभद्रमुनि की अध्यात्म की यात्रा बेहद कम उम्र में ही शुरू हो गई थी। उन्होंने स्कूल में केवल एलकेजी तक की ही औपचारिक पढ़ाई की है। इसके बाद उन्होंने अपने माता-पिता और स्कूल के प्रधानाचार्य से साफ कह दिया था कि उनका जन्म इस सांसारिक स्कूली शिक्षा के लिए नहीं हुआ है। इसके बाद उन्होंने सांसारिक जीवन का त्याग कर वैराग्य का रास्ता चुन लिया। उनके गुरु विरागमुनि बताते हैं कि जिस कठिन धार्मिक साधना और ज्ञान को हासिल करने में लोगों की उम्र गुजर जाती है, उसे इस बालक ने बचपन में ही सिद्ध कर लिया है।
चार साल की उम्र से अब तक कंठस्थ किए 22 जैन आगम
आमतौर पर जिस उम्र में बच्चे मोबाइल गेम, खिलौनों और पढ़ाई में व्यस्त रहते हैं, उस उम्र में बालमुनि ने शास्त्रों का विशाल भंडार अपने दिमाग में सुरक्षित कर लिया है। महज 8 से 12 वर्ष की आयु के बीच उन्होंने जैन धर्म के बेहद कठिन माने जाने वाले 45 में से 22 प्रमुख आगमों को पूरी तरह से कंठस्थ कर लिया। इसके अलावा, जिस धार्मिक ‘प्रतिक्रमण’ को याद करने में तेज बुद्धि वाले व्यक्ति को भी कम से कम 6 महीने का समय लग जाता है, उसे बालमुनि ने केवल 15 दिनों में कंठस्थ कर लिया था। यही नहीं, 350 से अधिक श्लोकों वाली पूरी गाथा को उन्होंने मात्र एक दिन में याद कर सबको हैरत में डाल दिया था।
डिजिटल गैजेट्स से दूरी और सुबह साढ़े चार बजे से दिनचर्या
बालमुनि हंसभद्रमुनि की इस तीव्र स्मरण शक्ति के पीछे उनकी बेहद अनुशासित और सात्विक दिनचर्या का बड़ा हाथ है। वे आज के दौर के बच्चों की तरह मोबाइल फोन, टेलीविजन या किसी भी अन्य डिजिटल स्क्रीन से कोसों दूर रहते हैं। उनकी दिनचर्या रोज सुबह 4 बजकर 30 मिनट पर ध्यान और साधना के साथ शुरू होती है। इस उम्र में भी उन्हें प्राकृत, संस्कृत, हिंदी और अंग्रेजी भाषाओं का बहुत अच्छा व्यावहारिक ज्ञान है। इन दिनों वे अपनी भाषायी समझ को और बढ़ाने के लिए गुजराती भाषा भी सीख रहे हैं।
जानिए कैसे काम करती है दिमाग की यह अद्भुत कला
इस अद्भुत कला के लाइव प्रदर्शन के दौरान पंडाल में मौजूद आम लोग अपनी मर्जी से कोई भी मुश्किल शब्द बोलते हैं। बालमुनि उन शब्दों को बेहद ध्यान से सुनते जाते हैं और एक सहायक उसे बोर्ड पर लिखता जाता है। जब एक हजार शब्दों की पूरी सूची तैयार हो जाती है, तो बालमुनि कुछ मिनटों तक उस बोर्ड को बहुत बारीकी से देखते हैं। इसके बाद जब जनता या आयोजक उनसे किसी भी रैंडम नंबर जैसे 732वें या 915वें स्थान का शब्द पूछते हैं, तो वे बिना एक सेकंड रुके बिल्कुल सटीक जवाब दे देते हैं। इससे पहले वे 100 और 200 शब्दों के साथ ऐसे कई सफल प्रयोग देश के अलग-अलग शहरों में कर चुके हैं।
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