
छत्तीसगढ़ स्वास्थ्य विभाग ने आयुष्मान भारत और डॉ. खूबचंद बघेल स्वास्थ्य सहायता योजना में हो रहे फर्जी क्लेम को रोकने के लिए एक बड़ा कदम उठाया है। अब हर लेनदेन पर मरीज के रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर पर बैंक की तरह तुरंत एसएमएस अलर्ट भेजा जाएगा। इस नई व्यवस्था का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि कार्ड धारक को इलाज-जाँच के नाम पर अतिरिक्त राशि कटने या कार्ड ब्लॉक होने जैसी किसी भी गतिविधि की जानकारी तत्काल मिल सके।
नया सिस्टम क्यों है जरूरी? धोखाधड़ी की शिकायतें बढ़ी थीं
यह नया सिस्टम इसलिए आवश्यक हो गया, क्योंकि पिछले कुछ समय में आयुष्मान कार्ड का दुरुपयोग कर फर्जी बिलिंग, अनावश्यक जाँच और बिना उपचार के ही राशि काटे जाने की शिकायतें तेजी से बढ़ी थीं। कई मामलों में तो मरीजों को उनके कार्ड से राशि कटने या ब्लॉक होने की जानकारी महीनों बाद मिलती थी। इन अनियमितताओं से न केवल आर्थिक नुकसान होता था, बल्कि गंभीर मरीज समय पर इलाज से भी वंचित रह जाते थे।
ऑडिट में सामने आई थी बड़ी गड़बड़ी
विभाग को लगातार शिकायतें मिल रही थीं कि कैशलेस इलाज के बावजूद निजी अस्पताल मरीजों से अतिरिक्त पैसे वसूल रहे हैं। हाल ही में किए गए ऑडिट में इन गड़बड़ियों का खुलासा हुआ, जिसके बाद स्वास्थ्य विभाग ने सख्त कार्रवाई की। अनियमितता पाए जाने पर चार अस्पतालों को एक-एक साल के लिए निलंबित कर दिया गया, साथ ही उन पर जुर्माना भी लगाया गया। इसी पारदर्शिता को बनाए रखने के लिए यह मैसेजिंग सिस्टम शुरू किया जा रहा है।
प्रति माह 150 करोड़ रुपये के क्लेम की होती है जाँच
आयुष्मान भारत और राज्य की स्वास्थ्य बीमा योजनाओं के तहत, निजी और सरकारी अस्पताल मिलकर प्रतिमाह औसतन 150 करोड़ रुपये के क्लेम प्रस्तुत करते हैं। विभाग इन क्लेम्स का नियमित ऑनलाइन ऑडिट भी करता है। अब, जैसे ही किसी अस्पताल द्वारा उपचार से संबंधित कोई एंट्री की जाएगी या राशि काटी जाएगी, उसका संदेश तुरंत मरीज के फोन पर आएगा। इससे अनावश्यक बिलिंग या अतिरिक्त वसूली जैसी मनमानी पर प्रभावी रोक लगने की उम्मीद है।
अनियमितता होने पर तुरंत यहाँ करें शिकायत
इस नए मैसेजिंग सिस्टम के लागू होने से आयुष्मान कार्ड धारक मरीजों को इलाज से जुड़ी सभी गतिविधियों की तुरंत जानकारी मिल सकेगी। यदि मरीज को कोई अनियमितता दिखती है जैसे अनावश्यक जाँच का क्लेम या अधिक राशि कटना तो वे बिना देर किए सीधे टोल-फ्री नंबर 104 या 14555 पर अपनी शिकायत दर्ज करा सकते हैं। इस त्वरित सूचना तंत्र से फर्जीवाड़े पर त्वरित अंकुश लगने की उम्मीद है।



