आवारा कुत्तों पर ‘सुप्रीम कोर्ट का फैसला’: छत्तीसगढ़ समेत सभी राज्यों में नसबंदी कर सभी को शेल्टर होम में रखने का निर्देश

नई दिल्ली: Supreme Court Decision on Stray Dogs: आवारा कुत्तों की समस्या को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने छत्तीसगढ़ समेत देश के सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को कड़ा और निर्णायक आदेश दिया है। जस्टिस विक्रम नाथ, जस्टिस संदीप मेहता और जस्टिस एनवी अंजारिया की बेंच ने निर्देश दिया है कि सड़कों पर एक भी आवारा कुत्ता नहीं दिखना चाहिए।

सुप्रीम कोर्ट के आदेश की बड़ी बातें और निर्देश

शीर्ष न्यायालय ने इस मामले में तीन मुख्य आदेश जारी किए हैं, जिनका सख्ती से पालन करने को कहा गया है:

सड़कों और सार्वजनिक स्थानों से पूरी तरह हटाएं

कोर्ट ने स्पष्ट निर्देश दिया है कि स्कूल-कॉलेज, अस्पताल, स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स, बस अड्डे, रेलवे स्टेशन, हाई वे और एक्सप्रेस-वे से सभी आवारा कुत्तों और पशुओं को हटाया जाए।

  • सुरक्षित परिसर: राज्यों को दो सप्ताह के भीतर सभी सरकारी संस्थानों की पहचान करनी होगी और यह सुनिश्चित करना होगा कि आवारा कुत्तों का प्रवेश रोकने के लिए परिसरों को पर्याप्त बाड़ लगाकर सुरक्षित किया जाए।
  • समय सीमा: यह कार्य आठ सप्ताह के भीतर पूरा किया जाना है।

वैक्सिनेशन, नसबंदी और आश्रय स्थल में स्थानांतरण

कोर्ट ने कुत्तों को हटाने और उनके प्रबंधन के लिए विस्तृत प्रक्रिया तय की है:

  • प्रक्रिया: पकड़े गए आवारा कुत्तों का वैक्सिनेशन (टीकाकरण) और स्टरलाइजेशन (नसबंदी) किया जाए।
  • स्थानांतरण: नसबंदी के बाद उन्हें शेल्टर होम में रखा जाए। कोर्ट ने साफ कहा कि आवारा कुत्ते को उस क्षेत्र में वापस नहीं छोड़ा जाए, जहाँ से उसे उठाया गया है।
  • निगरानी: नगर निगम पेट्रोलिंग टीम बनाएँ और 24 घंटे निगरानी रखें। साथ ही, हेल्पलाइन नंबर जारी करने का भी आदेश दिया गया है।

आदेशों का पालन और अनुवर्ती कार्रवाई

सुप्रीम कोर्ट ने अपने निर्देशों का पालन सुनिश्चित करने के लिए सख्त रुख अपनाया है:

  • मुख्य सचिवों को निर्देश: सभी राज्यों के मुख्य सचिव इन निर्देशों का सख्ती से पालन करवाएंगे।
  • स्टेटस रिपोर्ट: राज्यों को आदेश लागू करने की स्टेटस रिपोर्ट और हलफनामा 3 सप्ताह के भीतर दायर करने के लिए कहा गया है।
  • अगली सुनवाई: इस मामले में अगली सुनवाई 13 जनवरी को होगी।

पूर्व में हुई सुनवाई और राज्यों का ढीला रवैया

कोर्ट ने इस बात पर नाराजगी जताई कि उसके नोटिस के जवाब में केवल दो राज्यों ने ही हलफनामा दाखिल किया था, जबकि यह मामला पूरे देश से जुड़ा हुआ है।

  • न्यायिक इतिहास: 11 अगस्त को जस्टिस जे बी पारडीवाला और जस्टिस आर महादेवन की बेंच ने दिल्ली-एनसीआर में सभी आवारा कुत्तों को शेल्टर होम में बंद करने का आदेश दिया था। हालाँकि, एनिमल लवर्स के विरोध के बाद सुप्रीम कोर्ट की तीन जजों की बेंच ने पुराने आदेश को बदलकर स्टरलाइज और वैक्सिनेट कर उन्हें इलाके में वापस छोड़ने का आदेश दिया था।
  • सख्त टिप्पणी: 27 अक्टूबर को कोर्ट ने राज्यों के जवाब दाखिल न होने पर ऐतराज जताते हुए कहा था कि क्या राज्य के अधिकारी अखबार नहीं पढ़ते? कोर्ट ने कहा था कि पूरे देश में लगातार कुत्तों से जुड़ी घटनाएं हो रही हैं, जिससे दुनिया में भारत की खराब छवि बन रही है, और राज्य सरकारों का यह ढीला रवैया गलत है।

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Ravi Pratap Pandey

रवि पिछले 7 वर्षों से छत्तीसगढ़ में सक्रिय पत्रकार हैं। उन्होंने राज्य के सामाजिक, राजनीतिक और सांस्कृतिक पहलुओं पर गहराई से रिपोर्टिंग की है। जमीनी हकीकत को उजागर करने और आम जनता की आवाज़ को मंच देने के लिए वे लगातार लेखन और रिपोर्टिंग करते रहे हैं।

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