Digital Census 2027: देश की पहली डिजिटल जनगणना का शंखनाद: आज से घर-घर पहुंचेंगे 30 लाख कर्मचारी, जातिगत गणना और 33 सवालों से तैयार होगा नया भारत

भारत के इतिहास में आज का दिन एक बड़े बदलाव का गवाह बनने जा रहा है। केंद्र सरकार ने 1 अप्रैल 2026 से देश की पहली ‘डिजिटल जनगणना’ के पहले चरण की शुरुआत कर दी है। कोरोना महामारी के कारण लंबे समय से टल रही यह 16वीं राष्ट्रीय जनगणना कई मायनों में ऐतिहासिक है। इस बार कागजों के बजाय मोबाइल ऐप और वेब पोर्टल के जरिए हर नागरिक का डेटा जुटाया जाएगा। सबसे बड़ा बदलाव यह है कि 1931 के बाद पहली बार देश में आधिकारिक रूप से ‘जातिगत जनगणना’ को भी इसमें शामिल किया गया है। करीब 11,718 करोड़ रुपये के भारी-भरकम बजट वाली इस योजना को अमलीजामा पहनाने के लिए देशभर में 30 लाख कर्मचारियों की फौज तैनात की गई है।

दो चरणों में पूरा होगा महा-अभियान: जानिए क्या है जनगणना का पूरा शेड्यूल

सरकार ने इस विशाल प्रक्रिया को सुव्यवस्थित रखने के लिए दो मुख्य हिस्सों में बांटा है। आज से शुरू हुआ पहला चरण ‘हाउसलिस्टिंग और हाउसिंग ऑपरेशंस’ के नाम से जाना जाएगा, जो 30 सितंबर 2026 तक चलेगा। इस दौरान मुख्य रूप से मकानों की गिनती और वहां मौजूद बुनियादी सुविधाओं का लेखा-जोखा तैयार होगा। इसके बाद दूसरा चरण फरवरी 2027 में शुरू होगा, जिसमें ‘जनसंख्या गणना’ और ‘जातिगत गणना’ का मुख्य काम किया जाएगा। हालांकि, लद्दाख और हिमाचल जैसे बर्फबारी वाले दुर्गम क्षेत्रों में यह प्रक्रिया समय से पहले यानी सितंबर 2026 तक ही पूरी कर ली जाएगी।

आपके दरवाजे पर आएंगे अधिकारी: पूछे जाएंगे ये 33 जरूरी सवाल

जनगणना कर्मचारी जब आपके घर पहुंचेंगे, तो उनके हाथ में रजिस्टर नहीं बल्कि एक खास मोबाइल ऐप होगा। पहले चरण में आपसे कुल 33 सवाल पूछे जाएंगे, जो आपके रहन-सहन और परिवार की स्थिति को दर्शाएंगे। इनमें घर के मुखिया का नाम, जेंडर, जाति श्रेणी (SC/ST/OBC), घर का मालिकाना हक और कमरों की संख्या जैसे बुनियादी सवाल शामिल होंगे। इसके अलावा, आपके घर में शौचालय की व्यवस्था, पीने के पानी का स्रोत, एलपीजी कनेक्शन और उपभोग किए जाने वाले अनाज के बारे में भी जानकारी मांगी जाएगी।

डिजिटल एसेट्स का लेखा-जोखा: स्मार्टफोन से लेकर कार तक की होगी गिनती

सरकार इस बार यह भी जानना चाहती है कि डिजिटल इंडिया के दौर में नागरिकों के पास आधुनिक सुविधाएं कितनी पहुंची हैं। सवालों की सूची में घर में मौजूद इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों जैसे रेडियो, टीवी, लैपटॉप और इंटरनेट कनेक्शन की उपलब्धता के बारे में पूछा जाएगा। साथ ही, आपके पास मौजूद वाहनों (साइकिल, स्कूटर या कार) और संचार के लिए इस्तेमाल होने वाले मोबाइल नंबर का डेटा भी दर्ज किया जाएगा। यह जानकारी भविष्य की सरकारी योजनाओं और बुनियादी ढांचे को बेहतर बनाने में मददगार साबित होगी।

‘स्व-गणना’ की नई सुविधा: अब खुद पोर्टल पर भर सकेंगे अपनी जानकारी

इस डिजिटल जनगणना की सबसे क्रांतिकारी खूबी ‘सेल्फ-एन्यूमरेशन’ यानी स्व-गणना है। अगर आप नहीं चाहते कि कर्मचारी आपके घर आकर घंटों समय बिताएं, तो आप खुद जनगणना पोर्टल पर जाकर अपनी जानकारी दर्ज कर सकते हैं। अपने राज्य में काम शुरू होने से 15 दिन पहले आप 16 अलग-अलग भाषाओं में से किसी एक को चुनकर डेटा सबमिट कर सकेंगे। फॉर्म भरने के बाद एक 16 अंकों की ‘यूनिक आईडी’ जनरेट होगी। जब अधिकारी सत्यापन के लिए आपके घर आएंगे, तो आपको बस वह आईडी दिखानी होगी और आपका काम मिनटों में पूरा हो जाएगा।

ऐप और पोर्टल से निगरानी: रीयल-टाइम अपडेट होगा देश का डेटा

डेटा में गड़बड़ी की गुंजाइश को खत्म करने के लिए भारत के महापंजीयक (RGI) ने एक मजबूत सिस्टम तैयार किया है। पूरा डेटा एंड्रॉयड और आईओएस आधारित एप्लिकेशन के जरिए क्लाउड पर स्टोर होगा। डेटा की शुद्धता और कर्मचारियों की लोकेशन की निगरानी के लिए ‘सेंसस मैनेजमेंट एंड मॉनिटरिंग सिस्टम’ (CMMS) पोर्टल बनाया गया है। इससे यह सुनिश्चित होगा कि कोई भी घर छूटने न पाए और डेटा में किसी भी तरह की हेराफेरी न हो सके।

जातिगत गणना का ऐतिहासिक फैसला: 95 साल बाद फिर बदलेगी सामाजिक तस्वीर

इस पूरी प्रक्रिया का सबसे संवेदनशील और अहम हिस्सा जातिगत गणना है। आजादी के बाद यह पहला मौका है जब सरकार आधिकारिक रूप से जातियों का डेटा जुटा रही है। इससे पहले 1881 से 1931 के बीच ही जाति आधारित आंकड़े जुटाए गए थे। राजनीतिक और सामाजिक दृष्टिकोण से यह डेटा भविष्य की आरक्षण नीतियों और कल्याणकारी योजनाओं का आधार बनेगा। सरकार का मानना है कि इस डिजिटल डेटाबेस से पारदर्शी तरीके से यह पता चल सकेगा कि विकास की धारा समाज के किस तबके तक कितनी पहुंची है।

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Ravi Pratap Pandey

रवि पिछले 7 वर्षों से छत्तीसगढ़ में सक्रिय पत्रकार हैं। उन्होंने राज्य के सामाजिक, राजनीतिक और सांस्कृतिक पहलुओं पर गहराई से रिपोर्टिंग की है। जमीनी हकीकत को उजागर करने और आम जनता की आवाज़ को मंच देने के लिए वे लगातार लेखन और रिपोर्टिंग करते रहे हैं।

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