
Ajay Chandrakar On Congress: कर्नाटक में मुख्यमंत्री की कुर्सी पर हुए बड़े फेरबदल ने छत्तीसगढ़ के सियासी गलियारों में एक नई बहस छेड़ दी है। सिद्धारमैया के पद छोड़ने के बाद डीके शिवकुमार को कर्नाटक का नया मुख्यमंत्री बनाए जाने पर भारतीय जनता पार्टी ने छत्तीसगढ़ कांग्रेस के वरिष्ठ नेता टीएस सिंहदेव के बहाने तीखा हमला बोला है। कुरुद के भाजपा विधायक और पूर्व मंत्री अजय चंद्राकर ने इस बदलाव को लेकर कांग्रेस आलाकमान की विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि कर्नाटक के इस फैसले ने एक बार फिर छत्तीसगढ़ के उस चर्चित ‘ढाई-ढाई साल’ के मुख्यमंत्री फॉर्मूले की यादें ताजा कर दी हैं, जिसे कांग्रेस नेतृत्व ने ठंडे बस्ते में डाल दिया था।
कर्नाटक में चला सत्ता परिवर्तन का फॉर्मूला, छत्तीसगढ़ में क्यों फेल हुए टीएस बाबा?
भाजपा विधायक अजय चंद्राकर ने छत्तीसगढ़ और कर्नाटक की राजनीतिक परिस्थितियों की तुलना करते हुए कांग्रेस की नीतियों को आड़े हाथों लिया। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ में जब कांग्रेस की सरकार थी, तब यह बात बार-बार सामने आई थी कि दिल्ली में बंद कमरे की बैठक के दौरान आलाकमान ने ढाई साल भूपेश बघेल और ढाई साल टीएस सिंहदेव को मुख्यमंत्री बनाने का फॉर्मूला तय किया था। हालांकि, यह कथित समझौता छत्तीसगढ़ में कभी लागू नहीं हो पाया और पूरे पांच साल भूपेश बघेल ही मुख्यमंत्री के पद पर बने रहे। अब कर्नाटक में डीके शिवकुमार की ताजपोशी के बाद यह सवाल उठने लगा है कि जो न्याय वहां के नेता को मिला, वह छत्तीसगढ़ के कद्दावर नेता टीएस सिंहदेव को क्यों नहीं मिल सका।

अजय चंद्राकर का आलाकमान पर हमला, कहा- चुनाव जिताने में बड़ी भूमिका के बाद भी हुआ अपमान
अजय चंद्राकर ने टीएस सिंहदेव की राजनीतिक अहमियत का जिक्र करते हुए कहा कि राज्य में कांग्रेस की सरकार बनाने में तत्कालीन नेता प्रतिपक्ष के रूप में सिंहदेव की भूमिका सबसे बड़ी थी। उन्होंने घोषणा पत्र से लेकर चुनावी रणनीति तक में महत्वपूर्ण योगदान दिया था, इसके बावजूद उन्हें मुख्यमंत्री के पद से वंचित रखा गया। चंद्राकर ने दावा किया कि यह बात स्वयं टीएस बाबा ने कई बार सार्वजनिक और व्यक्तिगत चर्चाओं में स्वीकार की है कि उनके बीच समझौता हुआ था। भाजपा नेता ने स्पष्ट किया कि ‘ढाई-ढाई साल’ का यह मुद्दा विपक्ष ने मनगढ़ंत नहीं बनाया था, बल्कि यह कांग्रेस के भीतर का ही एक बड़ा सच था जिसे दबा दिया गया।
पैसे और संपत्ति के समीकरण पर भाजपा का शोध, शिवकुमार और सिंहदेव की तुलना से खड़ा हुआ विवाद
भाजपा विधायक ने एक बेहद संवेदनशील पहलू को उठाते हुए कांग्रेस के निर्णय लेने के तरीके पर सवाल खड़े किए। उन्होंने कहा कि यदि कांग्रेस में मुख्यमंत्री का पद तय करने के लिए पैसा ही सबसे महत्वपूर्ण मापदंड है, तो संपत्ति के मामले में टीएस सिंहदेव कहीं से भी पीछे नहीं हैं। डीके शिवकुमार ने जितनी संपत्ति घोषित की और चुनाव जीतने के लिए जितना निवेश किया, लगभग उतनी ही क्षमता और आर्थिक पृष्ठभूमि टीएस सिंहदेव की भी है। चंद्राकर ने तंज कसते हुए कहा कि यह एक बड़ा शोध का विषय है कि आखिर टीएस बाबा से कहां चूक हुई या उनकी विश्वसनीयता में आलाकमान को क्या कमी दिखी। उन्होंने इस पूरे विषय की उच्च स्तरीय जांच कराने की मांग भी कर डाली।
भूपेश बघेल के दावों पर पलटवार, ‘ढाई-ढाई साल’ के वादे को लेकर विश्वसनीयता के घेरे में हाईकमान
इधर, पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल लगातार इन दावों को खारिज करते आ रहे हैं कि दिल्ली की बैठकों में कभी ‘ढाई-ढाई साल’ जैसी कोई बात तय हुई थी। उनके इस बयान पर पलटवार करते हुए भाजपा ने कहा कि यह पूरी तरह से कांग्रेस आलाकमान की साख का मामला है। अगर ऐसा कोई वादा नहीं था, तो पार्टी के भीतर इतना लंबा गतिरोध क्यों बना रहा। चंद्राकर के मुताबिक, कर्नाटक के ताजा घटनाक्रम ने यह पूरी तरह साफ कर दिया है कि कांग्रेस का केंद्रीय नेतृत्व अपने नेताओं के साथ वादे करके मुकर जाता है और छत्तीसगढ़ में सिंहदेव के साथ सीधा विश्वासघात किया गया।

सिंहदेव को चंद्राकर की दोटूक सलाह, कहा- भूपेश बघेल के साथ दिखने वाली दोस्ती महज एक छल है
अपने बयान के आखिरी हिस्से में अजय चंद्राकर ने टीएस सिंहदेव को खुलकर अपनी राजनीतिक ताकत दिखाने की नसीहत दे डाली। उन्होंने कहा कि पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल और टीएस सिंहदेव के बीच जो दोस्ताना संबंध दिखाई देते हैं, वे जमीनी हकीकत से कोसों दूर हैं और महज एक राजनीतिक छल हैं। भाजपा नेता ने सिंहदेव से अपील की कि वे कांग्रेस के भीतर लगातार हो रहे इस अपमान को झेलना बंद करें। उन्होंने कहा कि अब समय आ गया है जब बाबा जी को एक बार राजनीतिक रूप से अपनी असली ताकत और वजूद का अहसास पार्टी नेतृत्व को करा देना चाहिए, ताकि भविष्य में उनके समर्थकों के साथ इस तरह का धोखा न हो सके।



