
छत्तीसगढ़ के स्कूल शिक्षा विभाग में लंबे समय से चल रहे निलंबन और बहाली के खेल पर अब लगाम लगने वाली है। शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव के कड़े निर्देश के बाद लोक शिक्षण संचालनालय (DPI) एक्शन मोड में आ गया है。 विभाग ने प्रदेशभर के सभी संयुक्त संचालक (JD) और जिला शिक्षा अधिकारियों (DEO) को पत्र लिखकर पिछले छह से दस महीनों के भीतर किए गए निलंबन और बहाली की पूरी कुंडली मांगी है。 इस आदेश के बाद शिक्षा विभाग के उन अफसरों और बाबुओं में हड़कंप मच गया है जो निलंबन को मनचाही पोस्टिंग का हथियार बनाकर भ्रष्टाचार को बढ़ावा दे रहे थे。
मनचाही पोस्टिंग के लिए निलंबन बना ‘हथियार’
शिक्षा विभाग में निलंबन और बहाली का यह गोरखधंधा काफी पुराना और व्यवस्थित है。 दरअसल, युक्तियुक्तकरण की प्रक्रिया के दौरान जब किसी शिक्षक का तबादला दूरदराज के इलाकों में कर दिया जाता है, तो वे अफसर और बाबुओं से साठगांठ कर लेते हैं。 पहले जानबूझकर आदेश की अवहेलना कराई जाती है ताकि डीईओ निलंबन की कार्रवाई करें。 कुछ महीनों के निलंबन के बाद, बहाली के समय अनुकंपा दिखाते हुए उसी शिक्षक को उसके मनपसंद स्कूल में पदस्थ कर दिया जाता है。 यह कानूनी रास्ता अपनाकर नियम विरुद्ध पोस्टिंग पाने का एक कारगर तरीका बन चुका था。
युक्तियुक्तकरण के विवादों के बीच विभाग की सख्ती
हाल ही में हुई शिक्षकों की युक्तियुक्तकरण प्रक्रिया के दौरान कई विवाद सामने आए थे, जिसके चलते मामला हाई कोर्ट तक भी पहुंचा。 इसी दौरान यह देखा गया कि जिन शिक्षकों की पोस्टिंग उनके घर से 30-40 किलोमीटर दूर हुई थी, उन्होंने ‘निलंबन-बहाली’ के फॉर्मूले का जमकर इस्तेमाल किया。 विभाग के भीतर बैठे कुछ प्रभावशाली बाबुओं और अधिकारियों की मिलीभगत से यह पूरा रैकेट संचालित हो रहा था。 अब मंत्री गजेंद्र यादव के पास इसकी लिखित शिकायतें पहुंचने के बाद इस भ्रष्टाचार की जड़ तक पहुंचने की कोशिश शुरू हो गई है。
डीपीआई का सख्त फरमान: 3 दिन में देनी होगी पूरी जानकारी
लोक शिक्षण संचालनालय ने अपने आदेश में स्पष्ट किया है कि 10 अक्टूबर 2025 से लेकर अब तक जितने भी शैक्षणिक और गैर-शैक्षणिक कर्मचारियों को निलंबित किया गया है, उनकी विस्तृत रिपोर्ट तीन दिनों के भीतर जमा करनी होगी。 अधिकारियों को केवल संख्या नहीं बतानी है, बल्कि यह भी स्पष्ट करना होगा कि निलंबन का आधार क्या था और बहाली के पीछे कौन से ठोस कारण रहे。 इस आदेश का उद्देश्य उन फाइलों को खंगालना है जिनमें नियम विरुद्ध तरीके से शिक्षकों को लाभ पहुंचाया गया है。
विभागीय जांच और आरोप पत्रों का भी होगा हिसाब
डीपीआई ने जेडी और डीईओ को एक निर्धारित प्रपत्र भेजा है जिसमें निलंबन और बहाली के साथ-साथ विभागीय जांच की प्रगति भी अंकित करनी होगी。 अधिकारियों को यह बताना होगा कि आरोप पत्र कब जारी किए गए, जांचकर्ता अधिकारी कौन था और जांच के दौरान अंतिम निर्णय क्या लिया गया。 सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि बहाली के बाद संबंधित कर्मचारी को किस संस्था या ब्लॉक में पदस्थ किया गया, इसकी भी जानकारी मांगी गई है。 इससे यह साफ हो जाएगा कि बहाली के बाद कितने शिक्षकों को उनके पुराने या मनपसंद स्थान पर वापस भेजा गया है。
भ्रष्टाचार पर जीरो टॉलरेंस: फर्जीवाड़े का होगा खुलासा
इस जांच का सबसे बड़ा पहलू यह है कि यदि किसी मामले में बिना पर्याप्त कारण के बहाली की गई है या निलंबन अवधि का निराकरण नियम विरुद्ध तरीके से हुआ है, तो संबंधित जिम्मेदार अधिकारियों पर भी गाज गिर सकती है。 लोक सेवा गारंटी और सुशासन के दावों के बीच शिक्षा विभाग में जारी इस ‘मैच फिक्सिंग’ जैसे खेल को खत्म करने के लिए सरकार ने जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाई है。 विभाग का मानना है कि इस डेटा के मिलान से कई बड़े फर्जीवाड़ों का पर्दाफाश होगा。
जेडी और डीईओ के लिए आवश्यक जानकारी का प्रारूप
आदेश के अनुसार, सभी जिलों के अधिकारियों को निम्नलिखित बिंदुओं पर विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत करनी होगी:
- निलंबन आदेश क्रमांक और उसका स्पष्ट कारण
- बहाली का आधार और पदस्थापना वाली नई संस्था का नाम
- आरोप पत्र जारी करने की तिथि और विभागीय जांच की वर्तमान स्थिति
- जांचकर्ता और प्रस्तुतकर्ता अधिकारी का नाम और पद
- निलंबन अवधि के निराकरण के संबंध में लिया गया अंतिम निर्णय



