
CGPSC Scam ED Raid: छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग (CGPSC) के बहुचर्चित भर्ती घोटाले में केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) के बाद अब प्रवर्तन निदेशालय (ED) की भी एंट्री हो चुकी है। वित्तीय गड़बड़ियों और अवैध लेन-देन के कोण से जांच कर रही ईडी की टीमों ने मंगलवार को राज्य में एक साथ चार अलग-अलग जगहों पर दबिश दी। केंद्रीय एजेंसी की इस अचानक हुई कार्रवाई से प्रशासनिक और राजनीतिक हलकों में एक बार फिर हड़कंप मच गया है। ईडी के निशाने पर आयोग के पूर्व चेयरमैन टामन सिंह सोनवानी, पूर्व सचिव जीवन किशोर ध्रुव और पूर्व परीक्षा नियंत्रक आरती वासनिक समेत इस घोटाले से जुड़े अन्य आरोपियों के करीबी लोग हैं।
चार अलग-अलग शहरों में ईडी की टीमों ने दी दबिश, सुबह-सुबह शुरू हुई तलाशी
जानकारी के मुताबिक ईडी की पांच टीमों ने तड़के सुबह ही भर्ती घोटाले के मुख्य आरोपी और आयोग के पूर्व चेयरमैन टामन सिंह सोनवानी के पैतृक गांव सरबदा में दस्तक दी। इसके साथ ही दो अन्य टीमों ने पूर्व सचिव जेके ध्रुव के भिलाई सेक्टर दस स्थित निवास पर घेराबंदी की। वहीं एक अन्य टीम ने रायपुर में पूर्व परीक्षा नियंत्रक आरती वासनिक के घर पर पहुंचकर जांच शुरू कर दी। अचानक हुई इस कार्रवाई से इन अधिकारियों के परिवारों में खलबली मच गई और टीमों ने घर के एंट्री और एग्जिट गेट को बंद करके छानबीन शुरू कर दी।

राजनांदगांव में भी पड़ा छापा, आरोपी अधिकारी के भाई के घर दस्तावेजों को खंगाल रही टीम
इन तीन बड़े पूर्व अधिकारियों के अलावा ईडी की एक टीम राजनांदगांव भी पहुंची। वहां शिक्षक कॉलोनी में रहने वाले कृषि विस्तार अधिकारी भूपेंद्र गनवीर के घर पर छापा मारा गया। भूपेंद्र गनवीर इस घोटाले के एक अन्य आरोपी ललित गनवीर के सगे भाई हैं। केंद्रीय एजेंसी की टीम घर के सभी सदस्यों से बंद कमरे में पूछताछ करने के साथ ही जमीन-जायदाद, बैंक खातों और पैसों के लेन-देन से जुड़े दस्तावेजों की बारीकी से जांच कर रही है ताकि यह पता लगाया जा सके कि घोटाले की रकम कहां निवेश की गई है।
साल 2020 से 2022 के बीच का है पूरा मामला, योग्य उम्मीदवारों की अनदेखी के लगे थे आरोप
यह पूरा मामला साल 2020 से 2022 के बीच आयोजित हुई आयोग की परीक्षाओं का है। उस दौरान छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग द्वारा निकाली गई विभिन्न भर्ती परीक्षाओं और इंटरव्यू की प्रक्रियाओं में भारी अनियमितताओं की बात सामने आई थी। आरोप लगे थे कि आयोग के बड़े अधिकारियों ने प्रभावशाली राजनेताओं और रसूखदार लोगों के रिश्तेदारों को फायदा पहुंचाने के लिए मेरिट में आने वाले योग्य उम्मीदवारों को जानबूझकर पीछे धकेल दिया था। इसके बाद डिप्टी कलेक्टर और डीएसपी जैसे प्रतिष्ठित पदों पर चयनित होने वाले कई नाम सवालों के घेरे में आ गए थे।
रिश्तेदारों को फायदा पहुंचाने के लिए नियमों में हेरफेर, सीबीआई की जांच में हुआ था बड़ा खुलासा
इस दिशा में जुलाई 2023 में कार्रवाई शुरू हुई जब छत्तीसगढ़ सरकार ने इन परीक्षाओं में हुए पक्षपात के आरोपों की जांच सीबीआई को सौंप दी थी। सीबीआई की जांच में यह हैरान करने वाला खुलासा हुआ कि पूर्व अध्यक्ष टामन सिंह सोनवानी ने अपने चहेतों को नौकरी दिलाने के लिए नियमों में ही बदलाव कर दिया था। अपने सगे भतीजे का चयन पक्का करने के लिए उन्होंने नियमों में लिखे शब्द ‘रिश्तेदार’ को बदलकर ‘परिवार’ कर दिया था। इसके अलावा कुछ खास लोगों को पास कराने के लिए प्रश्न पत्र पहले ही लीक करने के साक्ष्य भी मिले थे।
पद के दुरुपयोग के आरोप में रायपुर जेल में बंद हैं मुख्य आरोपी, गिरफ्तारियों की लिस्ट है लंबी
इस बड़े घोटाले में पद का दुरुपयोग करने के आरोप में आयोग के तत्कालीन सचिव जीवन किशोर ध्रुव, परीक्षा नियंत्रक आरती वासनिक और ललित गनवीर जैसे कई बड़े नामजद अधिकारी वर्तमान में रायपुर की सेंट्रल जेल में बंद हैं। इस मामले में गिरफ्तारियों की सूची काफी लंबी है। सीबीआई ने टामन सिंह सोनवानी के अलावा बजरंग पावर इस्पात कंपनी के डायरेक्टर श्रवण कुमार गोयल, उनके बेटे शशांक गोयल, बहू भूमिका कटियार और उपनियंत्रक ललित गनवीर समेत कई अन्य लोगों को हिरासत में लिया था जिनमें से कुछ लोग फिलहाल कोर्ट से जमानत पर बाहर हैं।
भर्ती व्यवस्था की विश्वसनीयता पर उठे थे गंभीर सवाल, अब मनी लॉन्ड्रिंग के कोण से जांच तेज
डिप्टी कलेक्टर और डीएसपी जैसे सम्मानजनक पदों पर अपनों को मलाई बांटने के इस खेल ने राज्य की पूरी प्रशासनिक पारदर्शिता को दांव पर लगा दिया था। अब इस मामले में ईडी की एंट्री होने से यह साफ हो गया है कि घोटाले की रकम का कहां-कहां इस्तेमाल हुआ और इसमें किस तरह का अवैध लेन-देन किया गया था। आने वाले दिनों में जांच का दायरा बढ़ने से इस घोटाले से जुड़े कुछ और बड़े चेहरों की मुश्किलें बढ़ सकती हैं और कुछ नई गिरफ्तारियां भी संभव हैं।



