
PM Awas Yojana Deadline CG: प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत अपना घर पाने का सपना देख रहे लोगों के लिए जरूरी खबर है। छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले में प्रशासन ने अब उन हितग्राहियों के खिलाफ कड़ा रुख अपनाया है जो मकान निर्माण में लापरवाही बरत रहे हैं। कलेक्टर अभिजीत सिंह ने साफ कर दिया है कि जिन लोगों को आवास की मंजूरी मिल चुकी है और किस्तें जारी हो गई हैं, लेकिन वे निर्माण में रुचि नहीं ले रहे हैं, उनकी पात्रता तुरंत रद्द कर दी जाएगी। मानसून की दस्तक से पहले सभी अधूरे प्रोजेक्ट्स को पूरा करने के लिए प्रशासन ने मई के अंत तक की समय-सीमा तय कर दी है।
लापरवाही पर गिरेगी गाज, निरस्त होगी आवास की स्वीकृति
कलेक्टोरेट सभाकक्ष में आयोजित समीक्षा बैठक के दौरान कलेक्टर ने नगर निगमों और नगर पालिकाओं के अधिकारियों को दो टूक निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि जो हितग्राही बार-बार समझाए जाने के बाद भी काम शुरू नहीं कर रहे हैं या निर्माण अधूरा छोड़ चुके हैं, उनकी फाइलें बंद की जाएं। ऐसे लोगों की जगह उन जरूरतमंदों को मौका दिया जाएगा जो वास्तव में अपना घर बनाना चाहते हैं। प्रशासन का मानना है कि सरकारी राशि का उपयोग समय पर होना चाहिए ताकि योजना का लाभ लक्षित वर्ग को मिल सके।
मानसून से पहले काम पूरा करने की चुनौती
मई महीने को अंतिम डेडलाइन के रूप में तय किया गया है। भिलाई, दुर्ग, चरोदा और रिसाली समेत सभी निकायों को निर्देश दिए गए हैं कि बारिश शुरू होने से पहले सभी लंबित और अधूरे मकानों की छत डल जानी चाहिए। कलेक्टर ने अधिकारियों से कहा कि वे ठेकेदारों पर दबाव बनाएं और मैनपावर बढ़ाकर काम की रफ्तार तेज करें। मानसून के दौरान निर्माण कार्य में आने वाली रुकावटों से बचने के लिए अगले कुछ हफ्ते प्रशासन के लिए काफी महत्वपूर्ण रहने वाले हैं।
अंशदान जमा करने वालों को तुरंत मिलेगा पजेशन
योजना में पारदर्शिता और ईमानदारी को बढ़ावा देने के लिए एक और बड़ा फैसला लिया गया है। जिन हितग्राहियों ने अपने हिस्से की राशि (अंशदान) बैंक में जमा कर दी है, उन्हें अब और इंतजार नहीं करना होगा। कलेक्टर ने आदेश दिया है कि ऐसे पात्र लोगों को प्राथमिकता के आधार पर तुरंत मकान का पजेशन सौंपा जाए। वहीं, जिन लोगों ने राशि लेने के बाद भी नींव तक नहीं खोदी है, उनके साथ बैठक कर कारण पूछा जाएगा और सुधार न होने पर कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
दफ्तर छोड़ फील्ड में उतरेंगे अधिकारी, मौके पर होगा समाधान
प्रशासन ने अब कागजी कार्यवाही के बजाय धरातल पर काम करने की रणनीति बनाई है। अधिकारियों को हिदायत दी गई है कि वे केवल ऑफिस में बैठकर फाइलों का इंतजार न करें, बल्कि सीधे वार्डों और निर्माण स्थलों का दौरा करें। कई बार हितग्राहियों को तकनीकी समस्याओं या लेआउट को लेकर दिक्कतें आती हैं, जिनका समाधान मौके पर ही किया जा सकता है। ठेकेदारों को भी सख्त चेतावनी दी गई है कि काम की गति बढ़ाने के चक्कर में गुणवत्ता के साथ कोई समझौता बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
वार्डवार मॉनिटरिंग की जिम्मेदारी, कमिश्नरों को मिले निर्देश
बैठक में भिलाई, दुर्ग और रिसाली के निगम आयुक्तों को विशेष जिम्मेदारी सौंपी गई है। कलेक्टर ने प्रत्येक आयुक्त को निर्देश दिया है कि वे अपने-अपने क्षेत्रों के प्रोजेक्ट्स की वार्डवार समीक्षा करें। अटके हुए प्रोजेक्ट्स में आ रही रुकावटों को दूर करने के लिए नियमित रूप से फील्ड विजिट सुनिश्चित की जाएगी। इस निगरानी तंत्र का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि किसी भी स्तर पर भ्रष्टाचार या टालमटोल की गुंजाइश न रहे और आम आदमी को उसका घर समय पर मिल जाए।
प्रधानमंत्री आवास योजना का लक्ष्य और पारदर्शिता
इस सख्त कार्रवाई का मुख्य उद्देश्य योजना की साख को बचाना और सरकारी धन का सही इस्तेमाल सुनिश्चित करना है। जिला प्रशासन का मानना है कि कड़े फैसलों से उन लोगों में डर बैठेगा जो सरकारी मदद का गलत फायदा उठाते हैं। साथ ही, इससे उन ईमानदार हितग्राहियों का मनोबल बढ़ेगा जो सीमित संसाधनों के बावजूद अपना घर बनाने की कोशिश कर रहे हैं। प्रशासन की इस सक्रियता से उम्मीद है कि दुर्ग जिले में आवास निर्माण के लक्ष्यों को समय पर हासिल किया जा सकेगा।



