
Jagdalpur Stray Dog Sterilization Viral Video: छत्तीसगढ़ के जगदलपुर शहर से एक ऐसी तस्वीर सामने आई है जिसने सोशल मीडिया पर बहस छेड़ दी है। शहर में आवारा कुत्तों की बढ़ती संख्या को नियंत्रित करने के लिए नगर निगम ने नसबंदी अभियान तो शुरू किया, लेकिन इसका तरीका बेहद निराला रहा। महाराणा प्रताप वार्ड में कुत्तों को ऑपरेशन के लिए ले जाने से पहले बकायदा उनकी पूजा की गई। आवारा कुत्तों के माथे पर तिलक लगाया गया, आरती उतारी गई और उन्हें बड़े लाड-प्यार से दूध पिलाया गया। इस अनोखे ‘श्वान सम्मान’ का वीडियो अब इंटरनेट पर तेजी से वायरल हो रहा है।

श्वान देव की पूजा और फिर शुरू हुआ अभियान
महाराणा प्रताप वार्ड स्थित एसएलआरएम डोंगरी सेंटर में जब ‘एनिमल बर्थ कंट्रोल सेंटर’ का उद्घाटन होना था, तो वहां का नजारा किसी धार्मिक अनुष्ठान जैसा दिखा। आमतौर पर कुत्तों को पकड़ने के लिए जाल और डंडों का इस्तेमाल होता है, लेकिन यहां अधिकारी और नेता हाथ में पूजा की थाली लेकर खड़े थे। कुत्तों को शांत बैठाकर उनकी आरती उतारी गई। इस अभियान के जरिए निगम प्रशासन यह संदेश देना चाहता था कि वे जानवरों के प्रति संवेदनशील हैं, हालांकि यह तरीका लोगों के बीच चर्चा और कौतूहल का विषय बन गया है।
महापौर की अगुवाई में हुई अनोखी रस्म
इस पूरे कार्यक्रम का नेतृत्व खुद महापौर संजय पाण्डेय कर रहे थे। उन्होंने पहले श्वान की पूजा की और फिर नसबंदी केंद्र का औपचारिक शुभारंभ किया। महापौर का कहना है कि शहर में डॉग बाइट (कुत्तों के काटने) की घटनाएं लगातार बढ़ रही हैं और रात के समय सड़कों पर कुत्तों के झुंड से लोग डरे रहते हैं। रेबीज के खतरे को जड़ से खत्म करने के लिए यह महाअभियान चलाया जा रहा है। निगम का तर्क है कि पूजा-पाठ के जरिए उन्होंने एक सकारात्मक शुरुआत की कोशिश की है।
सोशल मीडिया पर खिंचाई: पीआर स्टंट या संवेदनशीलता?
जैसे ही इस पूजा की तस्वीरें और वीडियो सोशल मीडिया पर पहुंचे, यूजर्स ने चटखारे लेना शुरू कर दिया। कुछ लोगों ने इसे नगर निगम का सस्ता ‘पीआर स्टंट’ बताया, तो वहीं कुछ ने तंज कसते हुए लिखा कि सरकारी दफ्तरों में इंसानों को इतनी तवज्जो नहीं मिलती जितनी यहां कुत्तों को मिल रही है। सोशल मीडिया पर लोग यह भी सवाल उठा रहे हैं कि क्या अब वैज्ञानिक प्रक्रियाओं के लिए भी इस तरह के धार्मिक कर्मकांड जरूरी हो गए हैं। हालांकि, पशु प्रेमियों का एक वर्ग इसे जानवरों के प्रति दया भाव से जोड़कर देख रहा है।

ऑपरेशन में बेरहमी रोकने के लिए विशेष टीम
नगर निगम ने इस नसबंदी अभियान को सफल बनाने के लिए पुख्ता प्रशासनिक तैयारी की है। खास बात यह है कि इस टीम में स्थानीय पशु प्रेमियों और एनजीओ के सदस्यों को भी शामिल किया गया है। इनका मुख्य काम यह सुनिश्चित करना है कि कुत्तों को पकड़ने से लेकर उनके ऑपरेशन और रिकवरी तक किसी भी स्तर पर उनके साथ क्रूरता न हो। निगम प्रशासन का दावा है कि इस केंद्र के शुरू होने से आने वाले समय में शहर की सड़कों पर आवारा कुत्तों की संख्या में कमी आएगी और आम जनता सुरक्षित महसूस करेगी।
बढ़ते खतरे को टालने की कोशिश और जन अपील
जगदलपुर नगर निगम ने शहरवासियों से अपील की है कि वे इस नसबंदी अभियान में सहयोग करें। शहर के अलग-अलग वार्डों से आवारा कुत्तों को पकड़कर इस सेंटर लाया जाएगा, जहां पशु चिकित्सकों की निगरानी में उनका बंध्याकरण किया जाएगा। प्रशासन का कहना है कि यह शहर की स्वच्छता और सुरक्षा के लिए एक अनिवार्य कदम है। फिलहाल, नसबंदी के नतीजों से ज्यादा जगदलपुर के इस ‘आरती वाले ऑपरेशन’ की चर्चा पूरे प्रदेश में हो रही है, जिसने सरकारी काम को एक नया और विवादित रंग दे दिया है।



