
Dhamtari News: संविदा शिक्षकों की एक भावुक तस्वीर धमतरी जिले से सामने आई है। बुधवार शाम आत्मानंद स्कूलों (SEGES) में कार्यरत संविदा शिक्षकों ने शहर की सड़कों पर कैंडल मार्च निकाला। यह मार्च न केवल अपनी मांगों को सरकार तक पहुंचाने के लिए था, बल्कि उन साथियों को नमन करने के लिए भी था जिन्होंने हाल ही के हादसों में अपनी जान गंवाई। घड़ी चौक से शुरू हुआ यह शांतिपूर्ण प्रदर्शन छत्रपति शिवाजी महाराज चौक पर जाकर समाप्त हुआ, जहां बड़ी संख्या में शिक्षकों ने अपने दिवंगत साथियों को याद किया।
दिवंगत साथियों को नम आंखों से दी विदाई
इस कैंडल मार्च का एक प्रमुख उद्देश्य उन शिक्षकों को श्रद्धांजलि देना था जिनकी आकस्मिक मृत्यु हो गई। शिक्षकों ने विशेष रूप से खल्लारी मंदिर में हुए रोपवे हादसे में जान गंवाने वाली महिला शिक्षिका और धमतरी की अन्य दुर्घटनाओं में मृत अपने साथियों की तस्वीरें हाथ में ले रखी थीं। संगठन के जिला अध्यक्ष गेवाराम मरकाम ने कहा कि हमारे साथी बिना किसी भविष्य की सुरक्षा के काम कर रहे थे और उनके जाने के बाद उनके परिवारों के सामने आर्थिक संकट खड़ा हो गया है।
6 साल से एक ही वेतन पर काम करने की मजबूरी
शिक्षकों ने शासन के प्रति अपनी गहरी नाराजगी व्यक्त करते हुए बताया कि वे साल 2019 से लगातार सेवाएं दे रहे हैं। पिछले छह वर्षों में महंगाई आसमान छू गई है, लेकिन संविदा शिक्षकों का वेतन आज भी वहीं स्थिर है जहां शुरुआत में था। शिक्षकों का कहना है कि एक ही निश्चित वेतनमान पर इतने लंबे समय तक काम करना अब उनके लिए आर्थिक रूप से असंभव होता जा रहा है। उन्होंने सरकार से मांग की है कि उन्हें नियमित कर्मचारियों के समान वेतनमान दिया जाए।
अनुकंपा नियुक्ति और बीमा कवर की मांग
संविदा शिक्षकों ने इस दौरान अपनी लंबित मांगों का एक चार्टर भी सामने रखा। उनकी सबसे बड़ी चिंता भविष्य की सुरक्षा को लेकर है। वर्तमान नियमों के अनुसार, किसी संविदा कर्मचारी की मृत्यु होने पर उसके परिजनों को अनुकंपा नियुक्ति देने का कोई प्रावधान नहीं है। इसके अलावा ये शिक्षक भविष्य निधि (PF), सामूहिक बीमा, ग्रेच्युटी और आकस्मिक मृत्यु सहायता जैसी बुनियादी सुविधाओं से भी वंचित हैं। शिक्षकों ने साफ कहा कि शिक्षा जैसे पवित्र कार्य में लगे लोगों के साथ इस तरह का भेदभाव नहीं होना चाहिए।
भेदभाव खत्म कर नियमितीकरण का इंतज़ार
शिक्षकों के इस संगठन ने स्पष्ट किया है कि वे केवल अपनी सुविधाओं की बात नहीं कर रहे हैं, बल्कि व्यवस्था में सुधार चाहते हैं। उन्होंने शासन से अपील की है कि सभी संविदा कर्मचारियों के साथ समान व्यवहार किया जाए और उन्हें नियमित किया जाए ताकि उन्हें भी अन्य सरकारी कर्मचारियों की तरह सामाजिक सुरक्षा मिल सके। शिक्षकों ने चेतावनी भरे लहजे में कहा कि यदि उनकी समस्याओं का शीघ्र समाधान नहीं हुआ, तो आने वाले समय में वे अपनी आवाज को और बुलंद करेंगे। फिलहाल धमतरी की सड़कों पर निकला यह कैंडल मार्च शासन के लिए एक सीधा संदेश है।



