
Dongargarh School News: छत्तीसगढ़ के डोंगरगढ़ से शिक्षा के मंदिर को शर्मसार करने वाली एक घटना सामने आई है। यहां के खालसा पब्लिक स्कूल में सातवीं कक्षा के एक छात्र को अपनी टीचर के गुस्से का इस कदर शिकार होना पड़ा कि उसके कान का पर्दा फट गया। मारपीट इतनी गंभीर थी कि 13 साल के मासूम सार्थक सहारे की सुनने की शक्ति हमेशा के लिए चली गई है। पुलिस ने इस मामले में कड़ी कार्रवाई करते हुए स्कूल की इंचार्ज शिक्षिका प्रियंका सिंह को गिरफ्तार कर लिया है। वहीं इस घटना में शामिल एक अन्य क्लास टीचर फिलहाल फरार है जिसकी तलाश सरगर्मी से की जा रही है।

केवल किताब निकालने में देरी पर बरपाया कहर
यह खौफनाक वाक्या 2 जुलाई 2025 का है। सातवीं का छात्र सार्थक सामाजिक विज्ञान की क्लास में बैठा था। क्लास टीचर नम्रता साहू ने सभी बच्चों से अपनी किताबें बाहर निकालने को कहा। सार्थक को बैग से किताब निकालने में कुछ ही सेकंड की देरी हुई लेकिन टीचर को यह बात नागवार गुजरी। नम्रता ने इसकी शिकायत स्कूल इंचार्ज प्रियंका सिंह से कर दी। इसके बाद दोनों शिक्षिकाएं क्लास में पहुंचीं और प्रियंका ने अपना आपा खोते हुए सार्थक के दोनों कानों पर पूरी ताकत से थप्पड़ बरसा दिए। चोट इतनी गहरी थी कि बच्चे को उसी वक्त सुनाई देना बंद हो गया।
घर पहुंचते ही छलका बच्चे का दर्द
स्कूल से घर लौटने के बाद सार्थक ने रोते हुए अपने माता-पिता को बताया कि उसे अब कुछ भी ठीक से सुनाई नहीं दे रहा है। घबराए हुए परिजनों ने उसे तुरंत अस्पताल पहुंचाया जहां डॉक्टरों ने जांच के बाद एक कड़वा सच सामने रखा। मेडिकल रिपोर्ट में पुष्टि हुई कि कान पर जोरदार वार होने के कारण पर्दा फट चुका है। बच्चे के पिता सुधाकर सहारे ने डोंगरगढ़ थाने पहुंचकर अपनी शिकायत दर्ज कराई। पुलिस ने मामले की गंभीरता को देखते हुए भारतीय न्याय संहिता (BNS) की विभिन्न धाराओं के तहत केस दर्ज किया और जांच शुरू की।
पुलिस की कार्रवाई और क्लास टीचर की तलाश
एसपी अंकिता शर्मा के निर्देश पर पुलिस टीम ने स्कूल में साक्ष्य जुटाए और चश्मदीदों के बयान दर्ज किए। पर्याप्त सबूत मिलने के बाद 11 अप्रैल को इंचार्ज शिक्षिका प्रियंका सिंह को उनके निवास स्थान से गिरफ्तार कर लिया गया। आरोपी को कोर्ट में पेश करने के बाद न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया है। पुलिस ने बताया कि क्लास टीचर नम्रता साहू गिरफ्तारी के डर से घर छोड़कर भाग गई है। पुलिस की टीमें उसके संभावित ठिकानों पर दबिश दे रही हैं और दावा किया जा रहा है कि उसे भी जल्द ही सलाखों के पीछे भेज दिया जाएगा।
बर्बाद हुई मासूम की जिंदगी, समाज में भारी रोष
सार्थक के परिवार का रो-रोकर बुरा हाल है। उनका कहना है कि शिक्षकों की इस क्रूरता ने उनके बेटे का भविष्य अंधकार में डाल दिया है। एक छोटी सी गलती की इतनी बड़ी सजा ने पूरे शहर को झकझोर दिया है। स्थानीय लोगों और अभिभावकों ने स्कूल प्रबंधन के खिलाफ भी अपना गुस्सा जाहिर किया है। लोगों की मांग है कि स्कूलों में शारीरिक दंड देने वाले शिक्षकों के खिलाफ ऐसे कड़े उदाहरण पेश किए जाएं ताकि भविष्य में किसी और बच्चे को इस तरह की प्रताड़ना न झेलनी पड़े। फिलहाल सार्थक का इलाज जारी है लेकिन डॉक्टरों ने उसकी रिकवरी को लेकर बहुत कम उम्मीद जताई है।



