
छत्तीसगढ़ की माटी के एक और होनहार रत्न ने देश की सबसे प्रतिष्ठित परीक्षा में अपनी सफलता का परचम लहराया है। धमतरी जिले के मगरलोड क्षेत्र के रहने वाले डायमंड सिंह ध्रुव ने संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) सिविल सेवा परीक्षा क्रैक कर प्रदेश का गौरव बढ़ाया है। जारी परिणामों में डायमंड ने 623वीं रैंक हासिल की है। वर्तमान में छत्तीसगढ़ पुलिस में डीएसपी (DSP) के पद पर कार्यरत डायमंड की यह उपलब्धि इसलिए भी खास है क्योंकि उन्होंने निरंतर संघर्ष और अनुशासन के बल पर राज्य सेवा से देश की सेवा तक का सफर तय किया है।
पहले ही प्रयास में CGPSC में मारी थी बाजी
डायमंड सिंह ध्रुव की मेधा का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि उन्होंने महज 25 वर्ष की उम्र में अपने पहले ही प्रयास में छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग (CGPSC 2024) की परीक्षा उत्तीर्ण कर ली थी। उस परीक्षा में उन्होंने पूरे प्रदेश में 13वीं रैंक हासिल की और डीएसपी कैटेगरी में तीसरे स्थान पर रहे। एक युवा अधिकारी के रूप में कार्य करते हुए भी उनके भीतर बड़े लक्ष्यों को पाने की तड़प बनी रही, जिसने उन्हें UPSC की ओर प्रेरित किया।
साधारण पृष्ठभूमि और पारिवारिक संघर्ष
डायमंड मूल रूप से मगरलोड क्षेत्र के पसवानी गांव के निवासी हैं। उनके जीवन में एक गहरा व्यक्तिगत दुख भी आया; उनके पिता स्वर्गीय बलराम सिंह, जो जनपद पंचायत में करारोपण अधिकारी थे, का अप्रैल 2025 में निधन हो गया। पिता के साये के बिना भी डायमंड ने अपनी हिम्मत नहीं हारी। उनकी माता, जो एक सरकारी स्कूल में शिक्षिका हैं, उनके लिए शक्ति का मुख्य स्रोत बनी रहीं। डायमंड की यह सफलता उनके दिवंगत पिता के उस सपने की पूर्ति है, जिसमें वे अपने बेटे को उच्च प्रशासनिक सेवा में देखना चाहते थे।
शिशु मंदिर से दिल्ली के सफर की नींव
उनकी प्रारंभिक शिक्षा मगरलोड के शिशु मंदिर से हुई, जहाँ उनके व्यक्तित्व की नींव पड़ी। इसके बाद उन्होंने माना स्थित रेडियंट पब्लिक स्कूल से हाई स्कूल की शिक्षा पूर्ण की। बचपन से ही मेधावी रहे डायमंड ने स्कूली दिनों में ही प्रशासनिक अधिकारी बनने का संकल्प ले लिया था। वे जानते थे कि एक साधारण ग्रामीण पृष्ठभूमि से निकलकर देश की राजधानी तक पहुँचने का रास्ता केवल कड़ी मेहनत और किताबों से होकर ही गुजरता है।
बिना कोचिंग और एकेडमी के हासिल किया मुकाम
आज के दौर में जहाँ UPSC की तैयारी के लिए लाखों रुपये की कोचिंग को जरूरी माना जाता है, डायमंड ने एक मिसाल पेश की है। उन्होंने दिल्ली में रहकर करीब ढाई वर्षों तक कड़ी मेहनत की, लेकिन खास बात यह रही कि उन्होंने किसी कोचिंग या एकेडमी का सहारा नहीं लिया। स्वयं अध्ययन (Self-Study), इंटरनेट का सही उपयोग और कड़े अनुशासन के बल पर उन्होंने देश की सबसे कठिन परीक्षा में 623वीं रैंक प्राप्त की। उनकी यह शैली उन युवाओं के लिए प्रेरणा है जो संसाधनों की कमी का हवाला देते हैं।
IPS मिलने की प्रबल संभावना और नई जिम्मेदारी
UPSC में 623वीं रैंक और कैटेगरी समीकरणों को देखते हुए यह प्रबल संभावना जताई जा रही है कि डायमंड सिंह ध्रुव को भारतीय पुलिस सेवा (IPS) आवंटित हो सकती है। वर्तमान में डीएसपी के रूप में पुलिस की वर्दी पहनने वाले डायमंड अब भारतीय पुलिस सेवा के माध्यम से देश के आंतरिक सुरक्षा ढांचे का हिस्सा बनेंगे। उनकी इस उपलब्धि से न केवल मगरलोड, बल्कि पूरे छत्तीसगढ़ पुलिस विभाग में खुशी का माहौल है।
क्षेत्र में जश्न का माहौल और युवाओं के लिए प्रेरणा
डायमंड की सफलता की खबर जैसे ही उनके गृह ग्राम पसवानी और मगरलोड पहुँची, लोगों ने आतिशबाजी और मिठाई खिलाकर खुशी जाहिर की। स्थानीय लोगों का कहना है कि डायमंड हमेशा से शांत स्वभाव के और अपने लक्ष्यों के प्रति केंद्रित रहे हैं। उनकी सफलता ने ग्रामीण क्षेत्र के युवाओं को यह विश्वास दिलाया है कि यदि लक्ष्य स्पष्ट हो और मेहनत ईमानदारी से की जाए, तो गांव की गलियों से निकलकर भी देश के सर्वोच्च पदों तक पहुँचा जा सकता है।



