
Dhamtari Ayurvedic Farming: छत्तीसगढ़ के धमतरी जिले में अब किसानों की किस्मत बदलने वाली है। जिले के किसान अब औषधीय पौधों की खेती के माध्यम से लखपति बन सकते हैं। इस दिशा में जिला प्रशासन ने बड़ी पहल करते हुए 200 एकड़ रकबे में औषधीय पौधों की खेती शुरू करने की योजना बनाई है। कलेक्टर अविनाश मिश्रा की अगुवाई में यह योजना तेजी से आगे बढ़ रही है। इसके तहत मखाना, नारियल, मिलेट्स और उद्यानिकी फसलों को भी बढ़ावा देने का प्रयास किया जा रहा है।
कुरूद, मगरलोड और धमतरी ब्लॉकों में होगी शुरुआत
प्रशासन द्वारा जिले के कुरूद, मगरलोड और धमतरी विकासखंडों के चयनित गांवों में पहले चरण के अंतर्गत लगभग 200 एकड़ भूमि पर औषधीय पौधों की खेती की जाएगी। अगले एक सप्ताह के भीतर इन गांवों और हितग्राही किसानों का चयन कर लिया जाएगा। इसके लिए पंचायत स्तर पर जागरूकता अभियान चलाया जा रहा है।
कलेक्टर की अध्यक्षता में हुई अहम बैठक
गुरुवार को इस योजना को लेकर कलेक्टर अविनाश मिश्रा ने औषधीय पादप बोर्ड के सीईओ जे.सी.एस. राव और अन्य अधिकारियों के साथ बैठक की। बैठक में जिले की जलवायु और मिट्टी की अनुकूलता को ध्यान में रखते हुए औषधीय खेती के संभावित क्षेत्रों की समीक्षा की गई। पादप बोर्ड के सीईओ ने बताया कि एक एकड़ भूमि में औषधीय पौधों की खेती कर किसान सालाना ₹75,000 से ₹1,00,000 तक की आमदनी प्राप्त कर सकते हैं।
हर्बल खेती से बनेगा ‘हर्बल जिला’
सीईओ ने सुझाव दिया कि वनभूमियों, सामुदायिक खेती और अनुबंध आधारित मॉडल के माध्यम से स्व-सहायता समूहों को भी इस योजना से जोड़ा जा सकता है। इससे धमतरी को ‘हर्बल जिला’ के रूप में नई पहचान मिल सकती है। बोर्ड द्वारा किसानों को बीज, पौध, प्रशिक्षण और अनुदान के साथ विपणन में सहयोग भी दिया जाएगा।
इन औषधीय पौधों की होगी खेती
धमतरी जिले में विशेष रूप से खस, ब्राह्मी, शतावरी, तुलसी, गिलोय, लेमनग्रास, बच और पचौली जैसे औषधीय पौधों की खेती का प्लान तैयार किया गया है। नर्सरी में इन पौधों की लगभग 20,000 पौधें उपलब्ध हैं, जिन्हें चालू मानसून में बूटीगढ़ और आसपास के क्षेत्रों में रोपा जाएगा। इसके अलावा 70 एकड़ में खस और 30 एकड़ में ब्राह्मी के पौधों की रोपाई की भी तैयारी की जा रही है।
हर्बल मंडी स्थापना का भी प्रस्ताव
किसानों को विपणन की बेहतर सुविधा देने के लिए प्रशासन ने धमतरी में एक हर्बल मंडी स्थापित करने की योजना भी तैयार की है। इसके लिए कृषि उपज मंडी परिसर में स्थान चिन्हित करने के निर्देश कलेक्टर द्वारा दिए गए हैं। मंडी बनने के बाद न केवल धमतरी के किसानों को, बल्कि आसपास के जिलों को भी औषधीय उत्पादों की बिक्री का लाभ मिलेगा।
धमतरी जिले में औषधीय पौधों की खेती को लेकर प्रशासन की यह पहल न केवल किसानों की आय बढ़ाने में मददगार साबित होगी, बल्कि यह जिला छत्तीसगढ़ में हर्बल खेती का प्रमुख केंद्र बन सकता है।



