
छत्तीसगढ़ सशस्त्र बल (CAF) भर्ती 2018 के वेटिंग लिस्ट वाले उम्मीदवारों का सब्र अब पूरी तरह टूट चुका है। पिछले 13 दिनों से नवा रायपुर के तूता धरना स्थल पर शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे इन युवाओं ने शनिवार को सीधे उपमुख्यमंत्री और गृहमंत्री विजय शर्मा के बंगले का घेराव कर दिया। कड़ाके की ठंड और अनिश्चित भविष्य के बीच ये अभ्यर्थी अकेले नहीं आए थे, बल्कि उनके साथ बुजुर्ग माता-पिता, गोद में मासूम बच्चे और न्याय की उम्मीद लिए पत्नियां भी मौजूद थीं। 7 साल के लंबे संघर्ष के बाद अब इन परिवारों ने “आर-पार” की लड़ाई का मन बना लिया है।
दाने-दाने को मोहताज हुए अभ्यर्थी
प्रदर्शन के दौरान हृदयविदारक दृश्य देखने को मिले। एक 5 साल की बच्ची अपने पिता को वर्दी दिलाने की मांग को लेकर हाथ में तख्ती लिए खड़ी थी, तो वहीं एक बेबस मां अपने बीमार बच्चे को गोद में लेकर पुलिस के घेरे के सामने बैठी नजर आई। अभ्यर्थियों ने बताया कि नौकरी की आस में उनकी जवानी बीत गई। आज वे मजदूरी करके अपना घर चलाने को मजबूर हैं। कई अभ्यर्थियों की शादी के वक्त यह वादा किया गया था कि सरकारी नौकरी पक्की है, लेकिन आज वे परिवार के सामने अपनी नजरें नहीं मिला पा रहे हैं।
हजारों पद खाली फिर भी वेटिंग लिस्ट को नहीं मिली हरी झंडी
इस पूरे विवाद की जड़ साल 2018 की भर्ती प्रक्रिया है। उस समय 1786 पदों के लिए विज्ञापन निकला था, जिसमें से 417 युवाओं को वेटिंग लिस्ट में डाल दिया गया। ताज्जुब की बात यह है कि विभाग में आज भी हजारों पद रिक्त हैं, लेकिन इन प्रशिक्षित युवाओं को नियुक्ति नहीं दी गई। नीचे दी गई तालिका से समझिए कि विभाग में भर्ती की क्या स्थिति है:
| विवरण | आंकड़े |
| कुल विज्ञापित पद (2018) | 1786 |
| वेटिंग लिस्ट में फंसे उम्मीदवार | 417 |
| CAF में वर्तमान रिक्त पद | 3,300 से अधिक |
| छत्तीसगढ़ पुलिस में कुल रिक्तियां | 17,820 |
| पुलिस बल की स्वीकृत क्षमता | 83,259 |
| वर्तमान में कार्यरत जवान | 65,439 |
उम्र की सीमा पार: अब किसी दूसरी नौकरी के काबिल भी नहीं बचे युवा
7 साल के इस लंबे अंतराल ने इन अभ्यर्थियों से बहुत कुछ छीन लिया है। लगभग 250 से ज्यादा उम्मीदवार अब ‘ओवरएज’ हो चुके हैं। जब भर्ती प्रक्रिया शुरू हुई थी, तब इनकी उम्र 28 से 32 साल के बीच थी, जो अब बढ़कर 40 के करीब पहुंच गई है। तकनीकी रूप से ये युवा अब किसी दूसरी सरकारी नौकरी के लिए फॉर्म भी नहीं भर सकते। अभ्यर्थियों का कहना है कि सरकार की देरी की सजा उनका पूरा परिवार भुगत रहा है। उनके पास अब खोने के लिए कुछ नहीं बचा है, इसलिए वे तब तक नहीं हटेंगे जब तक नियुक्ति पत्र हाथ में न आ जाए।
मुख्यमंत्री के दिल्ली से लौटते ही समाधान की उम्मीद
घेराव के बीच गृहमंत्री विजय शर्मा ने प्रदर्शनकारियों से मुलाकात की। उन्होंने स्थिति को समझते हुए कहा कि मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय फिलहाल दिल्ली के दौरे पर हैं। उनके रायपुर लौटते ही इस संवेदनशील मुद्दे पर कैबिनेट स्तर की चर्चा की जाएगी। मंत्री ने अभ्यर्थियों को आश्वासन दिया कि एक प्रतिनिधिमंडल को बुलाकर इस समस्या का स्थाई हल निकाला जाएगा। उन्होंने पुलिस मुख्यालय (PHQ) से एक नोटशीट मंगाने की बात भी कही, जिस पर सरकार विचार करेगी। हालांकि, अभ्यर्थी इसे महज एक और आश्वासन मान रहे हैं क्योंकि बीते सालों में वे कई बार ऐसे वादों को सुन चुके हैं।
जवानों की कमी और प्रशिक्षित युवाओं की अनदेखी
एक तरफ जहां छत्तीसगढ़ के नक्सल प्रभावित इलाकों में सुरक्षा बलों की भारी कमी महसूस की जा रही है, वहीं दूसरी तरफ पूरी तरह फिट और शारीरिक दक्षता परीक्षा पास कर चुके युवाओं को सड़कों पर बैठना पड़ रहा है। आंकड़ों के अनुसार प्रदेश पुलिस में लगभग 17 हजार से ज्यादा पद खाली हैं। ऐसे में वेटिंग लिस्ट के इन 417 युवाओं की भर्ती न करना न केवल उनके साथ अन्याय है, बल्कि राज्य की सुरक्षा व्यवस्था की मजबूती में भी एक बड़ी बाधा है। इन युवाओं का कहना है कि वे देश की सेवा करना चाहते हैं, लेकिन सिस्टम उन्हें दर-दर भटकने पर मजबूर कर रहा है।



