
CG Saree Distribution Controversy: प्रदेश की लगभग 1.94 लाख आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं को वर्दी के तौर पर जो साड़ियां बांटी गईं, उनकी गुणवत्ता और लंबाई को लेकर पूरे राज्य में विरोध शुरू हो गया है। 9.7 करोड़ रुपये के भारी-भरकम बजट से खरीदी गई इन साड़ियों के मापदंडों में भारी हेरफेर के आरोप लग रहे हैं। कार्यकर्ताओं का कहना है कि सरकार ने उनके हक के पैसे का इस्तेमाल घटिया सामान बांटने में किया है, जिससे विभाग की कार्यप्रणाली पर सवालिया निशान लग गए हैं।
लंबाई में हेराफेरी: आधा मीटर कपड़ा ‘गायब’
सरकारी टेंडर के नियमों के मुताबिक, प्रत्येक साड़ी की लंबाई 5.5 मीटर होनी अनिवार्य थी। हालांकि, जब कार्यकर्ताओं ने इन साड़ियों को खोलकर देखा, तो उनकी लंबाई महज 5 मीटर या उससे भी कम निकली। गणितीय नजरिए से देखें तो 1.94 लाख साड़ियों में प्रति साड़ी आधा मीटर कपड़ा कम देना, लगभग 1 लाख मीटर कपड़े के गबन की ओर इशारा करता है। 500 रुपये प्रति साड़ी की दर से हुए इस सौदे में लंबाई की यह कमी करोड़ों रुपये के भ्रष्टाचार का संकेत दे रही है, जिसकी अब बारीकी से जांच की जा रही है।
पहली धुलाई में ही उतर गया रंग
सिर्फ लंबाई ही नहीं, कपड़े की क्वालिटी ने भी विभाग की पोल खोल दी है। बिलासपुर, मस्तूरी और गनियारी जैसे क्षेत्रों से आई शिकायतों के अनुसार, साड़ियों को एक बार धोते ही उनका रंग पूरी तरह उतर गया और कपड़ा सिकुड़कर और भी छोटा हो गया। आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं ने आक्रोश जताते हुए कहा कि यूनिफॉर्म उनकी पहचान और गरिमा का प्रतीक है, लेकिन विभाग ने उन्हें ‘पोछा’ जैसा कपड़ा थमा दिया है। ऐसी साड़ियां पहनकर सार्वजनिक स्थानों पर काम करना उनके लिए अपमानजनक स्थिति पैदा कर रहा है।
भ्रष्टाचार के आरोपों पर गरमाई सियासत
इस मुद्दे को लेकर अब राजनीतिक गलियारों में भी घमासान शुरू हो गया है। कांग्रेस प्रवक्ता वंदना राजपूत ने सरकार पर सीधा प्रहार करते हुए इसे एक बड़ा ‘साड़ी घोटाला’ करार दिया है। उन्होंने आरोप लगाया कि महिला एवं बाल विकास मंत्री खुद एक महिला हैं, फिर भी उनके कार्यकाल में बहनों के अधिकारों के साथ खिलवाड़ हो रहा है। कांग्रेस ने मांग की है कि वितरित की गई साड़ियां वापस ली जाएं और इस पूरे खरीदी कांड की उच्च स्तरीय निष्पक्ष जांच कराकर दोषियों को जेल भेजा जाए।
मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े ने खुद किया ‘क्वालिटी टेस्ट’
मामले के बढ़ते प्रभाव को देखते हुए महिला एवं बाल विकास मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े ने खुद मोर्चा संभाला। उन्होंने बताया कि उन्होंने अपने घर पर इन साड़ियों को धोकर और सुखाकर उनकी गुणवत्ता की जांच की है। मंत्री ने स्वीकार किया कि कुछ जगहों से शिकायतें मिली हैं और उन्होंने तत्काल अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि जहां भी साड़ियां दोषपूर्ण पाई गई हैं, उन्हें वापस लिया जाए। उन्होंने यह भी भरोसा दिलाया कि किसी भी स्तर पर भ्रष्टाचार बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और सप्लायर के खिलाफ भी एक्शन लिया जाएगा।
भुगतान पर लगी रोक, विभागीय जांच शुरू
घोटाले की गूंज बिलासपुर से लेकर राजधानी रायपुर तक पहुंचने के बाद विभाग ने फिलहाल सप्लायर फर्म के भुगतान पर रोक लगा दी है। विभाग की संचालक ने एक विशेष जांच कमेटी गठित की है जो साड़ियों के सैंपल की लैब टेस्टिंग और फिजिकल वेरिफिकेशन करेगी। सवाल यह उठ रहा है कि आखिर बिना क्वालिटी चेक किए करोड़ों का स्टॉक जिलों में कैसे भेज दिया गया? क्या इसमें विभागीय अधिकारियों और ठेकेदारों की कोई बड़ी मिलीभगत है? इन सवालों के जवाब अब जांच के बाद ही साफ हो पाएंगे।
कार्यकर्ताओं की मांग: सम्मान के साथ न हो समझौता
आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं का संगठन अब आर-पार की लड़ाई के मूड में है। उनका कहना है कि केवल साड़ियां बदलना समाधान नहीं है, बल्कि उन अफसरों पर कार्रवाई होनी चाहिए जिन्होंने घटिया माल को पास किया। उन्होंने मांग की है कि उन्हें अच्छी गुणवत्ता की टिकाऊ साड़ियां दी जाएं जो उनके कार्यक्षेत्र की कठिन परिस्थितियों के अनुकूल हों। फिलहाल, प्रदेश भर की आंगनबाड़ी बहनों की नजरें सरकार के अगले कदम और जांच रिपोर्ट पर टिकी हैं।
Also Read: छत्तीसगढ़ में राशन घोटाला: 14 लाख का चावल डकार गए समूह के पदाधिकारी, सरपंच पति समेत तीन पर FIR



