जेल की सलाखों के पीछे भक्ति का शोर: 2300 से ज्यादा कैदियों ने रखा नवरात्रि का व्रत, रोजेदारों के लिए भी खास इंतजाम

छत्तीसगढ़ की जेलों में इन दिनों माहौल बदला-बदला नजर आ रहा है। चारदीवारी के भीतर अपराधी नहीं, बल्कि साधक दिखाई दे रहे हैं। चैत्र नवरात्रि के पावन पर्व पर प्रदेश की विभिन्न जेलों में बंद हजारों कैदी आत्मशुद्धि और आध्यात्मिक शांति के लिए व्रत और उपासना में लीन हैं। जेल प्रशासन ने भी कैदियों की इस धार्मिक आस्था का सम्मान करते हुए विशेष प्रबंध किए हैं। जेल महानिदेशक हिमांशु गुप्ता के निर्देशों पर सभी जेलों में व्रत रखने वाले बंदियों के लिए फलाहार और पूजा-पाठ की सामग्री सुनिश्चित की गई है।

2,397 बंदियों का उपवास: पुरुष और महिला कैदी भक्ति में लीन

प्रदेश भर की जेलों से आए आंकड़ों के मुताबिक, इस बार कुल 2,397 कैदियों ने नवरात्रि का उपवास रखा है। इसमें 2,125 पुरुष बंदी और 272 महिला बंदी शामिल हैं। जेल के भीतर सुबह और शाम माता की आरती की गूंज सुनाई दे रही है। कई बंदी अपनी बैरकों में ही माता की तस्वीर लगाकर साधना कर रहे हैं। जेल अधिकारियों का कहना है कि विपरीत परिस्थितियों में भी धर्म और आध्यात्म का साथ कैदियों को सकारात्मक सोच की ओर ले जाता है और उनके व्यवहार में नरमी लाता है।

फल और दूध का प्रबंध: जेल प्रशासन ने दीं विशेष सुविधाएं

उपवास रखने वाले इन कैदियों की सेहत का ध्यान रखते हुए जेल मैन्युअल के अनुसार विशेष आहार की व्यवस्था की गई है। बंदियों को सुबह और शाम के वक्त ताजे फल, दूध और साबूदाने जैसे फलाहार दिए जा रहे हैं। इसके अलावा, जो बंदी दुर्गा सप्तशती का पाठ या चालीसा पढ़ना चाहते हैं, उन्हें धार्मिक पुस्तकें भी उपलब्ध कराई गई हैं। जेल प्रशासन का मानना है कि ऐसे आयोजनों से बंदियों के बीच अनुशासन बना रहता है और तनाव कम करने में मदद मिलती है।

अंबिकापुर जेल में कलश स्थापना: भजन-कीर्तन से गूंजा परिसर

सरगुजा संभाग की केंद्रीय जेल अंबिकापुर में इस बार भव्य आयोजन देखने को मिल रहा है। जेल अधीक्षक अक्षय सिंह राजपूत की देखरेख में बंदियों ने सामूहिक रूप से कलश स्थापना की है। यहाँ प्रतिदिन सुबह-शाम विधिवत पूजा-अर्चना की जा रही है। बंदी खुद ही भजन-कीर्तन की मंडली बनाकर माता के गीत गा रहे हैं। जेल के भीतर बने इस मंदिरनुमा माहौल से बंदियों के मानसिक और भावनात्मक सुधार में बड़ी मदद मिल रही है, जिससे वे अपने अतीत के अपराधों पर पश्चाताप कर नई शुरुआत की प्रेरणा ले रहे हैं।

रमजान की इबादत: 130 बंदियों ने रखे रोजे

जेलों में केवल नवरात्रि की ही धूम नहीं है, बल्कि रमजान के पवित्र महीने में भी आस्था की मिसाल देखने को मिल रही है। प्रदेश की जेलों में बंद लगभग 130 मुस्लिम कैदियों ने रोजा रखा है। इन रोजेदारों के लिए सेहरी (सुबह का भोजन) और इफ्तार (शाम का भोजन) के समय विशेष इंतजाम किए गए हैं। जेल की रसोई में खजूर और अन्य पौष्टिक खाद्य पदार्थ तैयार किए जा रहे हैं ताकि रोजा रखने वाले बंदियों को कोई शारीरिक कमजोरी महसूस न हो।

सुधार की ओर कदम: आध्यात्म से बदल रहा है नजरिया

जेल प्रशासन का मानना है कि जेल केवल दंड देने का स्थान नहीं, बल्कि सुधार का केंद्र होना चाहिए। जब बंदी धार्मिक अनुष्ठानों से जुड़ते हैं, तो उनके भीतर आत्मचिंतन की भावना जागती है। इससे जेल परिसर के भीतर लड़ाई-झगड़े कम होते हैं और बंदियों के बीच आपसी भाईचारा बढ़ता है। आध्यात्मिकता का यह रास्ता उन्हें सजा पूरी होने के बाद समाज की मुख्यधारा में सम्मान के साथ लौटने के लिए तैयार करता है।

धार्मिक सौहार्द की मिसाल: एक ही छत के नीचे व्रत और रोजा

छत्तीसगढ़ की जेलें इस समय साम्प्रदायिक सौहार्द का एक बड़ा उदाहरण पेश कर रही हैं। एक तरफ जहाँ हिंदू बंदी जय माता दी के जयकारे लगा रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ मुस्लिम भाई अल्लाह की इबादत में सिर झुकाए नजर आते हैं। अलग-अलग धर्मों के बंदियों का अपने-अपने पर्वों को पूरी श्रद्धा और शांति के साथ मनाना समाज के लिए भी एक बड़ा संदेश है। यह पहल दिखाती है कि बदलाव की संभावना हर इंसान के भीतर मौजूद है, बस उसे सही दिशा और माहौल की जरूरत होती है।

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Ravi Pratap Pandey

रवि पिछले 7 वर्षों से छत्तीसगढ़ में सक्रिय पत्रकार हैं। उन्होंने राज्य के सामाजिक, राजनीतिक और सांस्कृतिक पहलुओं पर गहराई से रिपोर्टिंग की है। जमीनी हकीकत को उजागर करने और आम जनता की आवाज़ को मंच देने के लिए वे लगातार लेखन और रिपोर्टिंग करते रहे हैं।

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