
रायपुर: छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक अस्मिता को रेलवे स्टेशनों पर पहचान दिलाने के लिए एम ए छत्तीसगढ़ी छात्र संगठन ने आवाज उठाई है। संगठन के प्रदेश अध्यक्ष ऋतुराज साहू ने सोमवार को रायपुर डीआरएम (मंडल रेल प्रबंधक) को ज्ञापन सौंपकर छत्तीसगढ़ के तीज-त्योहारों और विशेष अवसरों पर राज्य के सभी रेलवे स्टेशनों पर छत्तीसगढ़ी गीत प्रसारित करने की मांग की है।
रजत जयंती और छठ पूजा की तर्ज पर मांग
ऋतुराज साहू ने बताया कि रेलवे ने हाल ही में छठ उत्सव के मौके पर छत्तीसगढ़ के लगभग 20 स्टेशनों पर छठ गीत प्रसारित किए थे, जिसे उन्होंने एक स्वागत योग्य पहल बताया। इसी कड़ी को आगे बढ़ाते हुए, संगठन ने आगामी 1 नवंबर को राज्य की रजत जयंती वर्ष के मौके पर छत्तीसगढ़ी गीत चलाने की मांग की है।

गुरु घासीदास जयंती पर पंथी गीत की मांग
छात्र संगठन ने सिर्फ राज्योत्सव ही नहीं, बल्कि अन्य बड़े त्योहारों पर भी छत्तीसगढ़ी गीतों के प्रसारण की मांग की है। साहू ने बताया कि 18 दिसंबर को छत्तीसगढ़ के संत बाबा गुरु घासीदास जी की जयंती है। इस बड़े अवसर पर रेलवे स्टेशनों में पंथी गीत बजाया जाना चाहिए, जो सतनामी समाज और छत्तीसगढ़ी संस्कृति का महत्वपूर्ण हिस्सा है।
अस्मिता को ध्यान में रखकर बारामासी गीतों की मांग
संगठन ने यह भी तर्क दिया कि बिलासपुर मंडल देश को बड़े आय वर्ग का योगदान देता है। इसलिए छत्तीसगढ़ की अस्मिता को ध्यान में रखते हुए, सभी स्टेशनों पर बारहमासी गीत, ददरिया, सुवा, करमा और छत्तीसगढ़ वंदना गीत शुरू किए जाने चाहिए। इन गीतों को चलाने की मांग इसलिए की गई है, ताकि छत्तीसगढ़ी संस्कृति की गूंज यहाँ के निवासियों के अलावा बाहर से यात्रा करने वाले यात्रियों के कानों तक भी पहुँच सके।



