Bagoud Bulldozer Action: बगौद में भारी बवाल के बीच चला प्रशासन का बुलडोजर: 40 साल पुराने कब्जे और सरकारी पट्टे के दावे को किया जमींदोज

Bagoud Bulldozer Action: छत्तीसगढ़ के धमतरी जिले के कुरुद ब्लॉक के ग्राम बगौद में सोमवार दोपहर उस समय अचानक हड़कंप मच गया, जब राजस्व विभाग का प्रशासनिक अमला भारी पुलिस बल और तीन बुलडोजर लेकर मौके पर धमक पड़ा। प्रशासन ने यहां बजरंग चौक के पास बन रहे एक नए पक्के ढांचे को पूरी तरह अवैध अतिक्रमण बताते हुए मलबे में तब्दील कर दिया। इस अचानक हुई कार्रवाई के दौरान मौके पर पीड़ित परिवार और ग्रामीणों ने तीखा विरोध दर्ज कराया, जिससे प्रशासन को भारी विरोध का सामना करना पड़ा। जहां एक तरफ प्रशासन इसे सरकारी जमीन को मुक्त कराने की वैध कार्रवाई बता रहा है, वहीं पीड़ित पक्ष ने इसे पूरी तरह तानाशाही रवैया करार दिया है।

बजरंग चौक पर उमड़ा ग्रामीणों का हुजूम, हंगामे की आशंका के बीच तैनात था भारी पुलिस बल

Bagoud News: जैसे ही गांव में सरकारी अमले और बुलडोजर के दाखिल होने की भनक स्थानीय निवासियों को लगी, देखते ही देखते बजरंग चौक पर सैकड़ों ग्रामीणों की भारी भीड़ जमा हो गई। कानून व्यवस्था बिगड़ने और हंगामे की आशंका को भांपते हुए प्रशासन ने पहले से ही सुरक्षा के कड़े इंतजाम कर रखे थे। कार्रवाई के दौरान कुरुद के तहसीलदार सूरज बंछोर, स्थानीय पुलिस थाना प्रभारी, ग्राम पंचायत सरपंच दशोदा कमलेश साहू सहित राजस्व विभाग का पूरा मैदानी अमला और बड़ी संख्या में पुलिस के जवान मुस्तैद रहे ताकि किसी भी अप्रिय स्थिति से निपटा जा सके।

हमारे पास पट्टा और रजिस्ट्री दोनों हैं, पीड़ित साहू परिवार ने लगाए गंभीर आरोप

बुलडोजर की कार्रवाई की जद में आए पीड़ित अभय राम और हेमचंद साहू के परिवार ने इस पूरी प्रशासनिक कार्रवाई पर गहरा आक्रोश और नाराजगी जताई है। पीड़ित भाइयों का कहना है कि वे इस जमीन पर पिछले 40 से अधिक वर्षों से काबिज हैं और वहां पहले से ही उनके पूर्वजों द्वारा रखी गई पत्थर की पुरानी नींव मौजूद थी। उन्होंने इस जमीन को निजी मिल्कियत समझकर कानूनी तौर पर खरीदा था, जिसकी बकायदा वैध रजिस्ट्री उनके पास सुरक्षित है। इसके बावजूद उनकी दलीलों को अनसुना कर दिया गया।

साल 2017 में मिला था मुख्यमंत्री आबादी पट्टा, पूर्व में तहसीलदार कोर्ट ने माना था सही

पीड़ित पक्ष ने अपने दावों को मजबूत बताते हुए एक और बड़ा दस्तावेज पेश किया। उन्होंने बताया कि साल 2017 में राज्य शासन के विशेष अभियान के तहत उन्हें इसी जमीन का ‘मुख्यमंत्री आबादी पट्टा’ आधिकारिक रूप से जारी किया गया था। इस पट्टे की वैधता को लेकर पूर्व में तहसीलदार कोर्ट में एक मामला भी चला था, जिसमें अदालत ने उनके हक में फैसला सुनाते हुए पट्टे को सही ठहराया था। परिवार का आरोप है कि इतने पुख्ता दस्तावेज होने के बाद भी केवल राजनीतिक दबाव में आकर उनके आशियाने और दुकान को निशाना बनाया गया है।

अपील करने का भी नहीं मिला न्यूनतम समय, एसडीएम कोर्ट के आदेश के बाद अचानक ढहाया ढांचा

साहू परिवार ने कुरुद अनुविभागीय अधिकारी (एसडीएम) न्यायालय की कार्यप्रणाली पर भी गंभीर सवाल खड़े किए हैं। पीड़ितों का सीधा आरोप है कि एसडीएम कोर्ट द्वारा उनके खिलाफ आदेश पारित किए जाने के बाद उन्हें उच्च न्यायालय (हाईकोर्ट) में अपील दायर करने का न्यूनतम कानूनी समय भी नहीं दिया गया। प्रशासन ने न्यायपालिका के ऊपरी मंच पर जाने के उनके अधिकार को छीनते हुए आनन-फानन में रातों-रात फोर्स तैयार की और सोमवार दोपहर को अचानक उनके निर्माणाधीन ढांचे को जमींदोज कर दिया, जिससे उन्हें संभलने तक का मौका नहीं मिला।

एसडीएम न्यायालय के आदेश पर हटाया गया अतिक्रमण, व्यावसायिक निर्माण पर थी आपत्ति

दूसरी ओर, इस पूरे विवाद पर कुरुद के तहसीलदार सूरज बंछोर ने प्रशासन का आधिकारिक पक्ष सामने रखा है। उन्होंने बताया कि यह पूरी कार्रवाई अनुविभागीय अधिकारी (एसडीएम) न्यायालय के अंतिम आदेश के परिपालन में पूरी तरह कानूनी तौर पर की गई है। सरकारी राजस्व रिकॉर्ड के मुताबिक यह पूरी भूमि ‘आबादी भूमि’ के रूप में दर्ज है। इस जगह पर बिना किसी वैध व्यावसायिक पट्टे या सक्षम प्राधिकारी की अनुमति के एक बड़े गैर-आवासीय (व्यावसायिक) परिसर का निर्माण कार्य किया जा रहा था, जिसे जांच के बाद पूरी तरह अवैध मानते हुए हटाने की कार्रवाई की गई है।

सामाजिक प्रतिष्ठा को पहुंची गहरी चोट, इंसाफ के लिए हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाएगा पीड़ित परिवार

प्रशासन के इस अचानक हुए बड़े एक्शन से पीड़ित परिवार पूरी तरह टूट चुका है और खुद को ठगा सा महसूस कर रहा है। उन्होंने इस कार्रवाई को अपनी सामाजिक प्रतिष्ठा पर एक गहरी और सोची-समझी चोट बताते हुए साफ किया है कि वे इस एकतरफा कार्रवाई के खिलाफ चुप नहीं बैठेंगे। पीड़ित भाइयों ने कहा कि वे अपने पट्टे और रजिस्ट्री के असली कागजात लेकर जल्द ही बिलासपुर उच्च न्यायालय (High Court) में याचिका दायर करेंगे। इस बड़ी तोड़फोड़ की कार्रवाई के बाद से ग्राम बगौद में इस समय भारी तनावपूर्ण शांति पसरी हुई है।

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Ravi Pratap Pandey

रवि पिछले 7 वर्षों से छत्तीसगढ़ में सक्रिय पत्रकार हैं। उन्होंने राज्य के सामाजिक, राजनीतिक और सांस्कृतिक पहलुओं पर गहराई से रिपोर्टिंग की है। जमीनी हकीकत को उजागर करने और आम जनता की आवाज़ को मंच देने के लिए वे लगातार लेखन और रिपोर्टिंग करते रहे हैं।

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