
जगदलपुर: बस्तर के कोंटा क्षेत्र से स्वास्थ्य विभाग की संवेदनहीनता और लचर व्यवस्था की एक विचलित करने वाली तस्वीर सामने आई है। कोंडासावली पंचायत में एक ग्रामीण द्वारा जहर का सेवन कर लेने के बाद जब उसकी हालत गंभीर हुई, तो परिजनों ने तत्काल एंबुलेंस को फोन किया। घंटों इंतजार के बाद भी जब सरकारी मदद नहीं पहुंची, तो परिजनों ने हिम्मत नहीं हारी और लकड़ी की खाट को ही एंबुलेंस बना लिया। मरीज को खाट पर लादकर ग्रामीण ऊबड़-खाबड़ रास्तों और पक्की सड़क के किनारे पैदल ही अस्पताल की ओर दौड़ पड़े। करीब 5 किलोमीटर तक इसी तरह मरीज को ढोने के बाद उन्हें एंबुलेंस की सुविधा मिल सकी।
कागजों पर पक्की सड़क और उपस्वास्थ्य केंद्र: हकीकत में समय पर नहीं मिला इलाज, मौत से जूझते मरीज के साथ परिजनों का संघर्ष
हैरानी की बात यह है कि जिस इलाके से यह मामला सामने आया है, वहां कहने को तो पक्की सड़कें और सरकारी उपस्वास्थ्य केंद्र मौजूद हैं। इसके बावजूद आपात स्थिति में एक एंबुलेंस का समय पर न पहुंचना सिस्टम पर बड़े सवाल खड़े करता है। परिजनों का कहना है कि अगर वे खाट पर मरीज को लेकर सड़क की ओर नहीं दौड़ते, तो शायद समय पर अस्पताल पहुंचना मुमकिन नहीं होता। बस्तर के सुदूर इलाकों में आज भी ग्रामीण इसी तरह के ‘खाट युग’ में जीने को मजबूर हैं। यह दृश्य उन तमाम विकास कार्यों और स्वास्थ्य दावों को आइना दिखा रहा है, जो अक्सर फाइलों और विज्ञापनों में चमकते नजर आते हैं।
प्रशासन की चुप्पी से ग्रामीणों में भारी आक्रोश
इस घटना के वीडियो और तस्वीरें सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद स्थानीय लोगों में भारी नाराजगी है। लोग पूछ रहे हैं कि जब करोड़ों रुपये स्वास्थ्य सुविधाओं पर खर्च किए जा रहे हैं, तो अंतिम छोर पर बैठे व्यक्ति को बुनियादी सहायता क्यों नहीं मिल पा रही है? कोंटा जैसे संवेदनशील इलाकों में स्वास्थ्य सेवाओं का इस तरह चरमराना किसी बड़ी अनहोनी को न्योता देने जैसा है। बस्तर में सड़कों का जाल बिछाने और हाईटेक अस्पताल बनाने की बातें तो बहुत होती हैं, लेकिन जब जमीन पर किसी की जान बचाने की बारी आती है, तो सारा तामझाम फेल नजर आता है। अब देखना होगा कि इस लापरवाही पर जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ क्या ठोस कार्रवाई की जाती है।



