महासमुंद में सोलर प्लांट पर बवाल: SDM दफ्तर के बाहर रातभर धरने पर बैठीं विधायक चातुरी नंद, ग्रामीणों ने मोर्चा खोला

महासमुंद जिले के सरायपाली ब्लॉक में प्रस्तावित सोलर पावर प्लांट को लेकर विवाद गहरा गया है। जंगलबेड़ा गांव के ग्रामीणों के साथ क्षेत्रीय विधायक चातुरी नंद एसडीएम कार्यालय के सामने धरने पर बैठ गई हैं। विधायक का कहना है कि वे गांव के बच्चों और किसानों के भविष्य को बचाने के लिए सड़क पर उतरी हैं। उन्होंने इस आंदोलन को अन्याय के खिलाफ आत्मसम्मान की आवाज बताया है। विधायक ने साफ कर दिया है कि जब तक ग्रामीणों को न्याय नहीं मिल जाता और उनकी मांगों पर कोई ठोस निर्णय नहीं होता, वे धरना स्थल से नहीं हटेंगी।

ग्रामसभा की अनुमति के बिना काम शुरू करने का आरोप

ग्रामीणों का सबसे बड़ा विरोध इस बात को लेकर है कि गोदावरी सोलर पावर प्लांट का निर्माण नियमों को ताक पर रखकर किया जा रहा है। उनका आरोप है कि पंचायत और ग्रामसभा से कोई अनुमति लिए बिना ही कंपनी ने काम शुरू कर दिया है। विधायक चातुरी नंद ने भी इस मुद्दे को उठाते हुए कहा कि जब विधानसभा में खुद उद्योग मंत्री ने स्वीकार किया है कि ग्रामसभा की अनुमति नहीं मिली है, तो फिर निर्माण कार्य कैसे जारी है? उन्होंने इस पूरे प्रोजेक्ट की वैधता पर सवाल खड़े किए हैं।

‘हरेली सहेली’ योजना की जमीन छीनने की शिकायत

आंदोलनकारी ग्रामीणों ने शासन पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि उन्हें अपनी ही जमीन से बेदखल किया जा रहा है। ग्रामीणों के अनुसार ‘हरेली सहेली’ योजना के तहत लगभग 90 गरीब परिवारों को भूमि आवंटित की गई थी, लेकिन अब सोलर प्लांट के लिए उनसे यह जमीन छीनी जा रही है। किसानों का कहना है कि खेती की जमीन जाने से उनके पास आजीविका का कोई साधन नहीं बचेगा। इस बेदखली ने ग्रामीणों के बीच भारी रोष पैदा कर दिया है जिसके कारण महिलाएं भी बड़ी संख्या में प्रदर्शन में शामिल हुई हैं।

जलस्रोत और सार्वजनिक रास्तों पर संकट

सोलर प्लांट के निर्माण से गांव के प्राकृतिक संसाधनों को भी भारी नुकसान पहुंचने की बात सामने आ रही है। ग्रामीणों का कहना है कि निर्माण कार्य के कारण गांव के सार्वजनिक रास्तों, तालाबों और एनीकट को क्षतिग्रस्त कर दिया गया है। इससे न केवल मवेशियों के लिए पानी की समस्या खड़ी हो गई है, बल्कि क्षेत्र का जलस्तर गिरने का भी डर बना हुआ है। बड़े पैमाने पर पेड़ों की कटाई से पर्यावरण को होने वाले नुकसान को लेकर भी ग्रामीण काफी चिंतित हैं और इसकी निष्पक्ष जांच की मांग कर रहे हैं।

कलेक्टर से शिकायत के बाद भी नहीं हुई कार्रवाई

गांव के सरपंच मधुबन भोई और पंच घासीराम चौहान ने बताया कि उन्होंने इस धांधली की शिकायत कलेक्टर से भी की थी। कई बार आवेदन देने के बाद भी जब जिला प्रशासन ने कोई कदम नहीं उठाया, तो ग्रामीणों का सब्र टूट गया। शुक्रवार शाम से शुरू हुआ यह प्रदर्शन रात भर जारी रहा क्योंकि एसडीएम से उनकी कोई सीधी चर्चा नहीं हो सकी। ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही प्लांट का काम नहीं रोका गया और उनकी जमीनें वापस नहीं मिलीं, तो वे भूख हड़ताल जैसे कड़े कदम उठाएंगे।

भारी पुलिस बल तैनात, आंदोलन को मिला समर्थन

एसडीएम कार्यालय के बाहर बढ़ते तनाव को देखते हुए प्रशासन ने सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए हैं। धरना स्थल पर विधायक के साथ कांग्रेस कमेटी के कई स्थानीय नेता और जनप्रतिनिधि भी एकजुट होकर ग्रामीणों का साथ दे रहे हैं। विधायक प्रतिनिधि दीपक साहू और तन्मय पंडा जैसे नेताओं ने भी इस संघर्ष को जायज ठहराया है। प्रशासन फिलहाल बीच का रास्ता निकालने की कोशिश कर रहा है, लेकिन ग्रामीण अपनी मांगों पर अड़े हुए हैं जिससे स्थिति काफी संवेदनशील बनी हुई है।

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Ravi Pratap Pandey

रवि पिछले 7 वर्षों से छत्तीसगढ़ में सक्रिय पत्रकार हैं। उन्होंने राज्य के सामाजिक, राजनीतिक और सांस्कृतिक पहलुओं पर गहराई से रिपोर्टिंग की है। जमीनी हकीकत को उजागर करने और आम जनता की आवाज़ को मंच देने के लिए वे लगातार लेखन और रिपोर्टिंग करते रहे हैं।

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