
छत्तीसगढ़ में धान खरीदी का सीजन अपने अंतिम पड़ाव पर है, लेकिन इस बीच सोशल मीडिया पर वायरल हुए एक कथित ऑडियो ने प्रशासनिक गलियारों में खलबली मचा दी है। इस ऑडियो में एक खाद्य अधिकारी कथित तौर पर समिति प्रबंधकों को निर्देश दे रहे हैं कि किसानों के टोकन आवेदन पेंडिंग रखे जाएं। अधिकारी को यह कहते सुना जा रहा है कि अगर ज्यादा टोकन काटे गए तो प्रबंधकों की नौकरी खतरे में पड़ सकती है। हालांकि, इस वायरल क्लिप की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन इसने राजनीतिक और सामाजिक हलकों में बहस छेड़ दी है।
“निपट जाओगे” वाली चेतावनी का पूरा सच
Conference call के माध्यम से हुई इस बातचीत में अधिकारी समिति प्रबंधकों से टोकन की स्थिति का जायजा ले रहे थे। जब एक प्रबंधक ने अपने क्षेत्र में ज्यादा आवेदकों की जानकारी दी, तो अधिकारी भड़क गए। उन्होंने सख्त लहजे में कहा कि टारगेट से ज्यादा टोकन काटना भारी पड़ सकता है। ऑडियो में प्रबंधक यह सफाई देते सुनाई दे रहे हैं कि पटवारियों के सत्यापन के कारण टोकन बन रहे हैं, जिस पर अधिकारी ने साफ निर्देश दिया कि फिलहाल किसी भी किसान का नया टोकन न काटा जाए और आवेदनों को रोक कर रखा जाए।
विपक्ष हमलावर और तारीख बढ़ाने की मांग
कांग्रेस और अन्य विपक्षी दल इस मामले को लेकर सरकार पर निशाना साध रहे हैं। उनका आरोप है कि अभी भी बड़ी संख्या में किसान अपना धान बेचने के लिए कतार में हैं, लेकिन प्रशासन जानबूझकर टोकन जारी नहीं कर रहा है। किसानों की ओर से धान खरीदी की अंतिम तिथि 31 जनवरी से आगे बढ़ाने की मांग भी जोर पकड़ने लगी है। विपक्ष का दावा है कि अगर समय सीमा नहीं बढ़ाई गई, तो कई छोटे किसान बिचौलियों के हाथों धान बेचने को मजबूर हो जाएंगे।
सरकार का रुख: फिलहाल नहीं बढ़ेगी समय सीमा
सरकार की ओर से सहकारिता मंत्री केदार कश्यप ने स्थिति स्पष्ट कर दी है। उन्होंने मीडिया से चर्चा के दौरान कहा कि फिलहाल धान खरीदी की तारीख बढ़ाने का कोई विचार नहीं है। मंत्री के मुताबिक, सरकार का ध्यान केवल वास्तविक किसानों से ही धान खरीदने पर है। उनका कहना है कि पिछले वर्षों के मुकाबले इस बार बिचौलियों और सीमावर्ती राज्यों से आने वाले अवैध धान पर कड़ी निगरानी रखी जा रही है, जिससे धान खरीदी का वास्तविक डेटा सामने आ रहा है।
रिकॉर्ड खरीदी और अब तक का भुगतान
Administration द्वारा जारी ताजा आंकड़ों के अनुसार, 13 जनवरी तक छत्तीसगढ़ में 17,77,419 किसानों से 105.14 लाख मीट्रिक टन धान खरीदा जा चुका है। इसके बदले में किसानों के खातों में 23,448 करोड़ रुपये की रिकॉर्ड राशि पहुंचाई गई है। विभाग का दावा है कि यह अब तक के इतिहास में तय समय के भीतर की गई सबसे बड़ी खरीदी और भुगतान है। सरकार का तर्क है कि व्यवस्था पूरी तरह पारदर्शी है और जो असली किसान हैं, उन्हें कोई परेशानी नहीं हो रही है।
बिचौलियों पर प्रशासन की टेढ़ी नजर
अवैध धान खपाने वालों के खिलाफ भी बड़ी कार्रवाई की गई है। सरकार का कहना है कि धान खरीदी के आंकड़ों में आई गिरावट का एक बड़ा कारण बिचौलियों पर कसा गया शिकंजा है। प्रदेश के बॉर्डर वाले जिलों में हजारों क्विंटल धान जब्त किया गया है। अधिकारियों का मानना है कि सख्त निगरानी की वजह से केवल वही धान समितियों तक पहुंच रहा है, जो छत्तीसगढ़ के पंजीकृत किसानों का है। इसी सख्ती की वजह से कुछ केंद्रों पर टोकन को लेकर अतिरिक्त सावधानी बरती जा रही है।



