रायपुर में करोड़ों का राशन डकार गए माफिया: हजारों गरीबों का निवाला छीना, विभाग ने अब तक नहीं की एफआईआर

रायपुर जिले में राशन माफियाओं ने सरकारी व्यवस्था में सेंध लगाकर हजारों गरीब परिवारों का हक मार लिया है। आंकड़ों के मुताबिक, साल 2022 में 133 और 2024 में 33 राशन दुकान संचालकों ने करोड़ों रुपये के अनाज का गबन किया है। ताज्जुब की बात यह है कि इतना बड़ा घोटाला उजागर होने के बाद भी खाद्य विभाग के तेवर नरम बने हुए हैं। माफियाओं से सरकारी अनाज की वसूली यानी रिकवरी की रफ्तार बेहद सुस्त है, जिससे विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं।

21 दुकानों से गायब मिला हजारों क्विंटल अनाज

जांच रिपोर्ट के अनुसार, 2022 से 2024 के बीच 21 ऐसी राशन दुकानें मिली हैं, जहां से भारी मात्रा में खाद्य सामग्री गायब है। इन दुकानों से कुल 4293 क्विंटल चावल, 48 क्विंटल शक्कर और 73 क्विंटल नमक का कोई हिसाब-किताब नहीं मिला है। आरंग, धरसींवा और अभनपुर जैसे ग्रामीण क्षेत्रों में यह घोटाला सबसे ज्यादा व्यापक है। जांच में स्टॉक कम पाए जाने के बावजूद विभाग ने केवल कागजी नोटिस जारी कर खानापूर्ति कर दी है।

लाइसेंस रद्द होने के बाद भी चला रहे दुकानें

शहर की राशन दुकानों में भी बड़े पैमाने पर घालमेल की शिकायतें मिल रही हैं। सूत्रों का दावा है कि जिन दुकानों के लाइसेंस घोटाले के कारण रद्द किए जा चुके हैं, उन्हें दूसरी समितियों से अटैच कर दिया गया है। लेकिन पर्दे के पीछे से वही पुराने लोग इन दुकानों का संचालन कर रहे हैं। नियम कहता है कि कालाबाजारी साबित होने पर लाइसेंस रद्द करने के साथ जुर्माना और जेल की कार्रवाई होनी चाहिए, लेकिन रायपुर में आरोपी बेखौफ होकर दोबारा सक्रिय हैं।

विभाग की चुप्पी से उठ रहे मिलीभगत के सवाल

आरोप है कि खाद्य विभाग के अधिकारी और राशन माफियाओं के बीच साठगांठ है, जिसके कारण दोषियों पर दबाव नहीं बनाया जा रहा है। कई महीने बीत जाने के बाद भी अधिकांश मामलों में एफआईआर दर्ज नहीं कराई गई है। विभागीय सुस्ती के पीछे लेन-देन की आशंका जताई जा रही है। जब तक कड़ी कानूनी कार्रवाई नहीं होगी, तब तक गरीबों के हिस्से का अनाज इसी तरह बाजार में बिकता रहेगा और सरकारी खजाने को चपत लगती रहेगी।

रिकवरी के नाम पर टालमटोल कर रहे अफसर

खाद्य विभाग के अधिकारियों का तर्क है कि कई दुकानों से रिकवरी की जा चुकी है, इसलिए प्राथमिकी दर्ज नहीं कराई गई। हालांकि, हकीकत इसके उलट है क्योंकि अभी भी करोड़ों रुपये की वसूली लंबित है। उचित मूल्य की दुकानों के संचालकों को बचाने के लिए विभाग रिकवरी का हवाला दे रहा है, जबकि नियमानुसार गबन के मामले में फौजदारी मुकदमा चलना अनिवार्य है। केवल तीन दुकानों (गुमा, कारा और तेंदुआ) पर ही अब तक एफआईआर दर्ज हो पाई है।

सवा करोड़ की वसूली अब भी बाकी

रायपुर के खाद्य नियंत्रक भूपेंद्र मिश्रा ने स्वीकार किया है कि राशन दुकानों से वसूली की प्रक्रिया चल रही है। फिलहाल विभाग को करीब सवा करोड़ रुपये का राशन या उसकी कीमत वसूलनी बाकी है। सवाल यह है कि यदि विभाग सख्त होता तो यह राशि बहुत पहले जमा हो जानी चाहिए थी। अब देखना यह होगा कि क्या शासन इन राशन माफियाओं पर नकेल कसता है या गरीब जनता अपने हक के अनाज के लिए इसी तरह भटकती रहेगी।

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Ravi Pratap Pandey

रवि पिछले 7 वर्षों से छत्तीसगढ़ में सक्रिय पत्रकार हैं। उन्होंने राज्य के सामाजिक, राजनीतिक और सांस्कृतिक पहलुओं पर गहराई से रिपोर्टिंग की है। जमीनी हकीकत को उजागर करने और आम जनता की आवाज़ को मंच देने के लिए वे लगातार लेखन और रिपोर्टिंग करते रहे हैं।

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