
छत्तीसगढ़ के नगरीय प्रशासन विभाग में उस समय हड़कंप मच गया जब विभाग के डायरेक्टर और वरिष्ठ IAS अधिकारी रिमिजुएस एक्का पर अपने मातहतों के साथ अभद्र व्यवहार करने का आरोप लगा। जानकारी के मुताबिक 21 जनवरी 2026 को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए विकास कार्यों की समीक्षा की जा रही थी। इस डिजिटल मीटिंग में प्रदेशभर के नगर निगम आयुक्त, सीएमओ और इंजीनियर जुड़े हुए थे। आरोप है कि बैठक के दौरान कार्यों की धीमी प्रगति देख साहब अपना आपा खो बैठे और उन्होंने अधिकारियों के लिए बेहद आपत्तिजनक शब्दों का इस्तेमाल किया।
हरामखोर और नालायक जैसे शब्दों से अपमानित करने का दावा
बैठक में शामिल अधिकारियों और कर्मचारियों का कहना है कि आईएएस एक्का ने उन्हें संबोधित करते हुए “नालायक, हरामखोर, बेवकूफ और चोर” जैसे अपशब्द कहे। कर्मचारियों के मुताबिक विभाग के शीर्ष पद पर बैठे व्यक्ति से इस तरह की भाषा की उम्मीद नहीं की जा सकती। घटना के बाद से ही नगरीय निकायों के कर्मचारियों में भारी गुस्सा देखा जा रहा है। उनका कहना है कि सरकारी तंत्र में काम के दबाव के बीच इस तरह का अपमानजनक व्यवहार उनके मनोबल को पूरी तरह तोड़ देता है और आत्मसम्मान को ठेस पहुंचाता है।
कर्मचारी संघ ने संभाला मोर्चा, मुख्य सचिव को लिखा पत्र
मामले की गंभीरता को देखते हुए नव-नियुक्त अधिकारी-कर्मचारी कल्याण संघ ने इस विवाद में सीधा हस्तक्षेप किया है। संघ ने राज्य के मुख्य सचिव (CS) को औपचारिक पत्र लिखकर पूरे घटनाक्रम की जानकारी दी है। पत्र में स्पष्ट रूप से उल्लेख किया गया है कि लोकतांत्रिक प्रशासनिक व्यवस्था में वरिष्ठता का मतलब यह नहीं है कि किसी को गाली देने का अधिकार मिल जाए। संघ ने इसे प्रशासनिक गरिमा पर हमला बताते हुए दोषी अधिकारी के खिलाफ सख्त रुख अपनाने की मांग की है।
‘माफी मांगें अधिकारी या फिर हो अनुशासनात्मक कार्रवाई’
कर्मचारी संगठनों ने सरकार के सामने दो टूक मांग रखी है। उनका कहना है कि या तो संबंधित आईएएस अधिकारी सार्वजनिक रूप से अपने शब्दों के लिए माफी मांगें, अन्यथा उनके खिलाफ कड़ी अनुशासनात्मक कार्रवाई शुरू की जाए। संघ का तर्क है कि यदि जमीनी स्तर पर काम करने वाले अधिकारियों के साथ ऐसा बर्ताव जारी रहा, तो भविष्य में कोई भी कर्मचारी जिम्मेदारी से काम करने के बजाय डरा हुआ महसूस करेगा। इस मुद्दे को लेकर अब राज्य के अलग-अलग संभागों में भी विरोध के स्वर उठने लगे हैं।
अफसरशाही में ‘डर के माहौल’ पर जताई चिंता
प्रदेशभर के नगरीय निकाय पदाधिकारियों का कहना है कि विकास कार्यों में कमियों को दूर करने के लिए मार्गदर्शन और संवाद जरूरी है, न कि अपमान। कर्मचारियों ने आरोप लगाया कि विभाग में जानबूझकर डर का माहौल बनाने की कोशिश की जा रही है। अधिकारियों का मानना है कि गाली-गलौज और तीखी टिप्पणियां प्रशासनिक कार्यक्षमता को बढ़ाने के बजाय उसे नुकसान पहुंचाती हैं। यदि समय रहते इस प्रवृत्ति पर लगाम नहीं लगाई गई, तो आने वाले दिनों में कर्मचारी कामकाज ठप कर आंदोलन की राह पर चल सकते हैं।
मुख्य सचिव के जवाब का इंतजार, तनाव बरकरार
वर्तमान में नगरीय प्रशासन विभाग में तनाव की स्थिति बनी हुई है। मुख्य सचिव को भेजी गई शिकायत के बाद अब सबकी नजरें शासन के अगले कदम पर टिकी हैं। अधिकारी और कर्मचारी इस बात पर अड़े हैं कि जब तक सम्मान बहाल नहीं होता, वे अपना विरोध जारी रखेंगे। वहीं, दूसरी ओर विभाग के वरिष्ठ स्तर से इस मामले में अभी तक कोई आधिकारिक सफाई पेश नहीं की गई है। प्रशासनिक गलियारों में इस विवाद को लेकर चर्चाओं का बाजार गर्म है और लोग इसे अफसरशाही के अहंकार की उपज मान रहे हैं।
प्रशासनिक मर्यादा और नियमों का हवाला
जानकारों का कहना है कि सिविल सेवा आचरण नियमावली (Conduct Rules) के तहत भी किसी भी अधिकारी को अपने सहकर्मियों या अधीनस्थों के साथ अमर्यादित व्यवहार करने की अनुमति नहीं है। कर्मचारी संघ अब इसी नियम के आधार पर अपनी लड़ाई को आगे बढ़ाने की तैयारी में है। संघ के नेताओं ने चेतावनी दी है कि यदि मुख्यमंत्री और मुख्य सचिव ने इस मामले में संज्ञान लेकर न्याय नहीं किया, तो वे सामूहिक अवकाश या अन्य कड़े कदम उठाने के लिए स्वतंत्र होंगे।
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