
भारत में अगली जनगणना की तैयारियां अब अंतिम चरण में पहुंच गई हैं। केंद्र सरकार ने जनगणना 2027 को दो अलग-अलग हिस्सों में पूरा करने का फैसला किया है। इस महाभियान का पहला पड़ाव यानी ‘मकान सूचीकरण’ और ‘आवास गणना’ अगले साल 1 मई 2026 से शुरू होने जा रहा है। बिलासपुर जिले में इस प्रशासनिक कवायद को लेकर हलचल तेज हो गई है और जमीनी स्तर पर काम करने वाली टीमों को तैयार किया जा रहा है।
बिलासपुर में ट्रेनिंग का दौर शुरू
प्रशासनिक अमला इस सर्वे को बिना किसी गलती के पूरा करने के लिए जी-जान से जुटा है। बिलासपुर के एडीएम शिव बनर्जी ने जानकारी दी है कि जिले के सभी चार्ज अधिकारियों को विशेष प्रशिक्षण दिया जा रहा है। अधिकारियों को सिखाया जा रहा है कि किस तरह डिजिटल माध्यमों का उपयोग कर घर-घर से डेटा जुटाना है। 1 मई से प्रगणकों की टोलियां आपके दरवाजे पर दस्तक देना शुरू कर देंगी और यह सिलसिला सितंबर तक जारी रहेगा।
33 सवालों में सिमटेगा आपकी गृहस्थी का ब्योरा
इस बार की जनगणना केवल सिरों की गिनती तक सीमित नहीं है। सर्वे टीम आपसे कुल 33 सवाल पूछेगी जो आपकी जीवनशैली और आर्थिक स्थिति का आइना होंगे। इसमें परिवार के मुखिया के नाम से लेकर घर के निर्माण में इस्तेमाल हुई सामग्री तक की जानकारी ली जाएगी। सरकार यह जानना चाहती है कि प्रदेश के कितने घरों में पक्की छत है और कितने लोग आज भी बुनियादी सुविधाओं के लिए संघर्ष कर रहे हैं।
नल और बिजली कनेक्शन की होगी गिनती
सर्वे के दौरान आपके घर में मौजूद संसाधनों पर खास नजर रहेगी। प्रगणक आपसे पूछेंगे कि आपके घर में पीने के पानी का मुख्य स्रोत क्या है और क्या आपके पास वैध बिजली कनेक्शन है। इसके अलावा शौचालय की सुविधा और रसोई घर के प्रकार जैसे महत्वपूर्ण बिंदुओं पर भी डेटा जमा किया जाएगा। ये आंकड़े भविष्य में सरकारी योजनाओं के बेहतर क्रियान्वयन में मील का पत्थर साबित होंगे।
गैजेट्स और वाहनों की भी दर्ज होगी डिटेल
आधुनिक जीवन के साजो-सामान की जानकारी भी इस बार अनिवार्य है। आपके पास इंटरनेट कनेक्शन है या नहीं, आप टीवी देखते हैं या रेडियो सुनते हैं, इन सब बातों का रिकॉर्ड रखा जाएगा। यही नहीं, आपके घर में मौजूद दो पहिया या चार पहिया वाहन, फ्रिज, कूलर और मोबाइल फोन की संख्या भी इस 33 सवालों की सूची का हिस्सा है। इससे समाज के हर वर्ग की क्रय शक्ति का सही अंदाजा लग सकेगा।
पूरी तरह डिजिटल और पेपरलेस प्रक्रिया
जनगणना 2027 की सबसे बड़ी खासियत इसका हाई-टेक होना है। अब कागजी फॉर्म भरने का पुराना तरीका बीते दिनों की बात हो गई है। सभी प्रगणक अपने मोबाइल ऐप के जरिए मौके पर ही डेटा फीड करेंगे। हर मकान की ‘जियो-टैगिंग’ की जाएगी जिससे डेटा की सटीकता और पारदर्शिता बनी रहे। तकनीक के इस इस्तेमाल से परिणामों के विश्लेषण में भी काफी कम समय लगेगा।
खुद ऑनलाइन जानकारी भरने की भी सुविधा
अगर आप प्रगणक के घर आने का इंतजार नहीं करना चाहते हैं, तो सरकार ने ‘सेल्फ-एन्यूमरेशन’ यानी स्व-गणना का विकल्प भी दिया है। शिक्षित और तकनीक प्रेमी नागरिक अपने मोबाइल या कंप्यूटर की मदद से खुद ही अपनी जानकारी ऑनलाइन पोर्टल पर दर्ज कर सकेंगे। इससे न केवल समय की बचत होगी बल्कि डेटा की गोपनीयता भी सुनिश्चित की जा सकेगी।
गलत जानकारी देने पर हो सकती है जेल
प्रशासन ने नागरिकों को सतर्क किया है कि जनगणना एक गंभीर कानूनी प्रक्रिया है। यदि कोई व्यक्ति जानकारी देने से इनकार करता है या जानबूझकर गलत आंकड़े पेश करता है, तो उसके विरुद्ध कड़ी कानूनी कार्रवाई की जा सकती है। एडीएम शिव बनर्जी ने जिलेवासियों से अपील की है कि वे प्रगणकों का सहयोग करें और सही जानकारी दें, क्योंकि आपके दिए आंकड़े ही भविष्य की जनकल्याणकारी नीतियों का आधार बनेंगे।



